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मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 11Y, Mar 10-16, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W011Y NLRB CMUP 

||श्री गणेशायेनमः||

पत्रांक; NL PGR REM 17313Y REM Dated; १३ मार्च. २०१७

प्रणब दा को प्रणाम!

मुझे आप से अपने पिछले पत्र का उत्तर प्राप्त नहीं हुआ.

दादा! सत्ता के हस्तांतरण के संधि के पूर्व ही हमारे पूर्वजों के ९० वर्ष के बलिदानों के बदले मे १८ जुलाई, १९४७ को आक्रांता जारज षष्टम् ने शब्द उपनिवेश’ (Dominion) के पूर्व शब्द स्वतंत्र’ (independent) जोड़ कर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ बना दिया, और तब से आज तक लागू है. जिसके अनुसार इंडिया को स्वतंत्रता नहीं दी गई, अपितु इंडिया का दो स्वतंत्र? उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को इंडिया बंट गया। इतना ही नहीं उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१.

http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php.

के अधीन फांसी का अपराध होगया.

दादा! आप भलीभांति जानते हैं कि इंडिया आज़ाद नहीं है, लेकिन विरोध नहीं कर सकते. उल्टे जो उपनिवेश का विरोध करे, उसे भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अंतर्गत फांसी दिलाने के लिए विवश हैं!

सन १९१७ तक एक ₹ =१३$ था. १९४७ में घट कर १$ हुआ. ८ नवम्बर २०१६ तक एक $ का मूल्य ६७ हुआ. अब नमो ने शून्य कर दिया!

http://www.aryavrt.com/rupya

नीचे संलग्नक १ एलिजाबेथ के उपनिवेश की सरकार का उत्तर है. मेरा मामला अब समाप्त हो चुका है.

Current Status :           CASE CLOSED

Date of Action :           17 Nov 2016

http://www.aryavrt.com/nl-anne-1-3  के अध्ययन से आप को ज्ञात होगा कि राजस्व अभिलेखों में जालसाजी लोकसेवकों ने की है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन आप लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं.

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) की शर्त है,

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व| अनुच्छेद ३९(ग).

सत्ता के हस्तांतरण के इस कुटिल समझौते के बल पर आज एलिजाबेथ मानवजाति को लूट रही है. लोकसेवक भी. लुट रहे हैं. मूर्ख यहूदी, ईसाई (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व मुसलमान (कुरान २:३५). सभी आपस में एक दूसरे के जान के शत्रु बने हुए हैं. लेकिन किसी के अंदर मानवता के विनाश की जड़ एलिजाबेथ के उपनिवेश, सत्ता के हस्तांतरण, इस्लाम और ईसाइयत के विरोध का साहस नहीं है. गलती से अगर किसी ने विरोध कर दिया तो उसे मिटा दिया गया. मुझे व हमारे १४ सहयोगियों को मिटाया जा रहा है.

राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! आप अपना पूजास्थल, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या आप को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?

मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला. १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. कोई विदेशी कर्ज न था. आज प्रति व्यक्ति ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१६ तक; ७० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने नागरिकों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे|

२०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने कोई आजादी नहीं दिलाई. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द स्वतंत्रका जोड़ा जाना. चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

सन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है| जिनके पास वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के जान-माल की रक्षा का दायित्व है, उनको पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश कर दिया गया है|

एलिजाबेथ, जिसके आप दास हैं, कौन है? विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

यानी कि आप भलीभांति जानते हैं कि एलिजाबेथ ईसा का राज्य स्थापित करने के लिए आप की वैदिक सनातन संस्कृति और आप को नष्ट करेगी.

पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना (कुरआन ८:१७) व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद (काफिरों की हत्या करने का असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार) है|

इन आततायियों को आप अपनी ही धरती पर, भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन शपथ लेने के कारण, संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए विवश हैं!

जातिसंहारकों का संरक्षणपोषण व संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ और का संकलन किया गया है| शासक और लोकसेवक तभी तक सत्ता और सेवा में रहेंगे, जब तक एलिजाबेथ का हित साधते यानी ईसा के राज्य का संरक्षणपोषण व संवर्धन करते रहेंगे| यानी अपना ही सर्वनाश सुनिश्चित करते रहेंगे|

इस प्रकार दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ और भारतीय संविधान के अनुच्छेदों२९(१), ३९(ग), ६० व १५९ के बल पर तत्कालीन शासकों के नेतृत्व में एलिजाबेथ ने जजों सहित आत्मघाती लुटेरे लोकसेवकों की एक सेना बना रखी है, जो दिए की लौ पर मरने वाले पतिंगों की भांति पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपना जीवन, सम्पत्ति, नारियां, वैदिक सनातन संस्कृति और धरती गवाने में लिप्त हैं. लोकसेवकों को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है.

लोकसेवक ईसाई व मुसलमान ईशनिन्द्कों और खूनियों के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते. पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपने ही शत्रुओं का संरक्षणपोषण व संवर्धन करना उनकी विवशता है. लोकसेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे अपना सर्वनाश करें अथवा नौकरी गवाएं.

फिर भी उनके पास एक विकल्प है. आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करें. निर्णय लोकसेवकों के हाथ में है. आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करेंगे, अथवा एलिजाबेथ के उपनिवेश में रह कर अपनी धन, धरती, नारियां और धर्म गवाएंगे.

लोकसेवकों को तो यह भी पता नहीं होता कि उनको मिले निर्देशों का उद्गम स्थान कहाँ है?

आप लोगों को श्राप देने या दंड देने की मेरी सरकार को कोई आवश्यकता नहीं है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों को अपनी लूट, हत्या और बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे रखा है. आप पद, प्रभुता और पेट के लोभ में भारतीय संविधान के संरक्षणपोषण व संवर्धन की शपथ ले चुके हैं.

जज, लोकसेवक, राष्ट्रपति और राज्यपाल सबको इसी मौत के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेनी ही पड़ेगी| शपथ लिए बिना कोई पद, प्रभुता और पेट का प्रबंध नहीं कर सकता| वोट देकर भी उपरोक्त संवैधानिक स्थितियों को कोई नहीं बदल सकता|

बपतिस्मा/अज़ान ईशनिंदा है. चर्च/मस्जिद से ईसाई/मुसलमान काफिरों को कत्ल करने का उपदेश देता है| लेकिन कोई विरोध नहीं कर सकता.

लोकसेवक ईसाई व मुसलमान ईशनिन्द्कों और खूनियों के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते. पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपने ही शत्रुओं का संरक्षणपोषण व संवर्धन करना उनकी विवशता है. लोकसेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे अपना सर्वनाश करें अथवा नौकरी गवाएं.

दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है| वर्तमान परिस्थितियों में एलिजाबेथ द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोकसेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (एलिजाबेथ के दासों) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए अब्रह्मी संस्कृतियाँ. उपनिवेश व भारतीय संविधान उत्तरदायी है|

फिर भी उनके पास एक विकल्प है. आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करें. निर्णय लोकसेवकों के हाथ में है. आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करेंगे, अथवा एलिजाबेथ के उपनिवेश में रह कर अपनी धन, धरती, नारियां और धर्म गवाएंगे.

                           +++ संलग्नक १+++

Status as on 19 Nov 2016

Registration Number    :         DARPG/E/2016/13261

Name Of Complainant :         AP Tripathi

Date of Receipt   :         28 Jul 2016

Received by         :         Department of Administrative Reforms and Public Grievances

Forwarded to      :         Government of Uttar Pradesh

Contact Address :         Chief Minister Secretariat

                   U.P. Secretariat,

                   Lucknow226001

Contact Number :         05222215137

Grievance Description  :         महामहिम प्रणब दा, इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है. उसने वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए आप लोगों को पट्टे पर दिया है. अभी डाकू आतंकवादी महामहिम राम नाइक राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कराकर और जजों को धमका कर मेरी २ अरब की सम्पत्ति लूटे हुए है. जब अमेरिकी लाल भारतीय लोगों और उनकी माया संस्कृति की भांति उपनिवेशवासी और उनकी वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी, तब लोकसेवकों और आप का नम्बर आएगा. अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Current Status     :         CASE CLOSED

Date of Action     :         17 Nov 2016

Details        :         लोक शिकायत अनुभाग–1(मा० मुख्यमंत्री कार्यालय)आदेश दिनांक 06-09-2016 के संबंध उप जिलाधिकारी सदर गोरखपुर की जांच आख्यानुसार उक्त प्रकरण का संबंध शासन स्तर से है।,लोक शिकायत अनुभाग–1(मा० मुख्यमंत्री कार्यालय)आदेश दिनांक 06-09-2016 के संबंध उप जिलाधिकारी सदर गोरखपुर की जांच आख्यानुसार उक्त प्रकरण का संबंध शासन स्तर से है।,प्रार्थना पत्र तहसील स्त1र से सम्बन्धित नही है. ,निस्ताआरण आख्याक संलग्न् है.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

१३/०३/१७

Registration Number is : DARPG/E/2017/05890

http://www.aryavrt.com/muj17w11-nlrb-cmup


 

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