Muj17W05Y SadhviKo MuktKaro



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 05y, Jan 27-Feb 02, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W05Y SadhviKo MuktKaro 

||श्री गणेशायेनमः||

साध्वी प्रज्ञा को मुक्त करो.

महामहिम श्री बान की मून व अन्य राज्याध्यक्ष गण!

मैं मालेगांव बम कांड में साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त हूँ. साध्वी की ज़मानत ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने प्राथमिक यानी एटीएस की जांच पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। कोर्ट ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।

जी हाँ! यदि जिहाद और उपनिवेश का विरोध अपराध है, तो आर्यावर्त सरकार वे अपराध कर रही है. साहस हो तो आर्यावर्त सरकार के संस्थापक अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी को युद्ध अपराधी घोषित कर तोप से उड़वाइये. उपनिवेश को आजादी कहने का नाटक बंद कीजिए.

राज्यपाल व जज को ब्रिटिश उपनिवेश की दासता करने में लज्जा नहीं आती. बाइबल, कुरान व भारतीय संविधान किसी उपनिवेशवासी को जीवित रहने का अधिकार नहीं देते. लेकिन कोई जज बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान, खुत्बे और खतने का कोई विरोधी नहीं! विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/azaan-aur-snvidhan

दो उपनिवेश इंडिया व पाकिस्तान का गठन तीन यौन कांडों, २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी के ब्रह्मचर्य के प्रयोग, एडविना के प्रातः जिन्ना के साथ और रात में नेहरु के साथ हम बिस्तर का परिणाम है.  

सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमीं से हमारी वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गौ, गुरुकुल, गायत्री और गंगा को नष्ट करा कर, अपने  सम्प्रभुता गवां कर, हम उपनिवेशवासी अपने ही सर्वनाश के अभिभावक बनने के लिए विवश कर दिए गए हैं.

जज के उपरोक्त निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी उपनिवेशवासी को जिहाद व उपनिवेश का विरोध करने का अधिकार ही नहीं है. क्योंकि अब्रह्मी संस्कृतियों का कोई आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता.

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

उपनिवेशवासियों की स्थिति बलिपशु की कर दी गई है, जो भलीभांति जानता है कि उसे बलि चढ़ना है, फिरभी वह मैं मैं तो करता रहता है, लेकिन बलि चढ़ने से बच नहीं पाता.

भारतीय संविधान के अनु३९(ग) का आदर करते हुए अनु३१ मिटा. जमीदारी, सोना, , सहाराश्री को लूटा. टाटा व रिलायंस आदि लुटेंगे. थोमस मुनरो (Thomas Munro) ने मद्रास रेजीडेंसी में साक्षरता जानने के लिए १८२३ में सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ १००% साक्षरता थी.

जो दलित और पिछड़ा समाज, शिक्षक ब्राह्मणों का भिक्षा देकर भरण पोषण करता था और बदले में जो ब्राह्मण तथाकथित दलित समाज की संतति को सम्प्रभु बनाता था, आज वही दलित और पिछड़ा समाज ब्राह्मणों का शत्रु बन गया है. लेकिन जिन लोगों ने उनके सम्प्रभु बनाने वाले गुरुकुलों को नष्ट कर, उनकी सकल सम्पदा लूट कर और प्रताड़ित कर उन्हें दास बना लिया है, उनके विरुद्ध वे कुछ नहीं बोल सकते!

तथाकथित प्रजातंत्र के चारो स्तंभों के लोगों ने पद, प्रभुता और पेट के लोभ में सहर्ष अपनी स्वतंत्रता, जीने और सम्पत्ति का अधिकार त्याग दिया है. धरती की कोई नारी अपना सम्मान नहीं बचा सकती.

वह राज्यपाल या जज मूर्ख ही होगा, जो बपतिस्मा, अज़ान के विरुद्ध कार्यवाही कर नौकरी गवांना चाहेगा... राज्यपाल सहित लोकसेवक का पेशा सत्य को नष्ट करना है. बिल्कुल झूठ कहना; समाज को दूषित करना और गालियां देना राज्यपाल, जज व लोकसेवकों की विवशता है. राज्यपाल पर्दे के पीछे शासकों (एलिजाबेथ) के लिए कार्य करने वाले मातहत और उपकरण हैं. ... बौद्धिक वेश्याएं हैं.

१५ अगस्त, १९४७ के बाद आर्यावर्त सरकार पहली बार उपनिवेश से मुक्ति हेतु लड़ रही है.

वैदिक सनातन संस्कृति के जीवित बचने के सारे रास्ते बंद हो गए हैं. बचना हो तो गुरूकुलों को पुनर्जीवित करने हेतु उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान और खुत्बे समाप्त करने हेतु आर्यावर्त सरकार की शरण में आयें.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

०१ फरवरी. २०१७

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Registration Number is : PMOPG/E/2017/0062721

 

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