Muj17W03Y SMPRABHU BANEN



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 03Y, Jan 13-19, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W03Y SMPRABHU BANEN

  

||श्री गणेशायेनमः||

सम्प्रभु बनें.


आप जन्म लेने के साथ ईश्वर के अंश ब्रह्म से युक्त थे. अपने माँ बाप के अज्ञान के कारण आप ब्रह्मचर्य निर्माण केन्द्र गुरुकुल को त्याग कर मैकाले के यौनशिक्षा केन्द्र में प्रवेश लेकर वीर्यहीन हो गए.

परब्रह्म यहूदी, ईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. बाइबल के वचन के विरूद्ध मनुष्य जन्मना पापी नहीं है. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| प्रत्येक व्यक्ति को परब्रह्म द्वारा, उसके जन्म के साथ ही दिया गया, ईश्वरीय उर्जा का अनंत स्रोत, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं।  वीर्यवान को पराजित या अधीन नहीं किया जा सकता है| मनुष्य की छोड़िये, वीर्यवान सांड़ को भी अधीन नहीं किया जा सकता और न बांधा ही जा सकता है|

यद्यपि सिंह का कोई संगठन नहीं होता, तथापि, वीर्यवान होने के कारण, पूरे जंगल पर राज्य करता है. निर्णय आप स्वयं करें| आप १९४७ से अपहृत अपने स्वतंत्रता का युद्ध लड़ेंगे या एलिज़ाबेथ के उपनिवेश में अपने जीवन और सम्पत्ति के अधिकार से वंचित रहेंगे? ( भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग)). विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/muj16w01-khtna-16101

हमें एकता की आवश्यकता ही नहीं है. आवश्यकता है गुरुकुलों की. कपिल मुनि ने तिनका भी नहीं उठाया और महाराज सगर की सारी सेना भष्म कर दी. परशुराम की कोई सेना नहीं थी, अकेले २१ बार आतताई क्षत्रियों का विनाश किया. हनुमान निहत्थे लंका में घुसे और लंका में आग लगा दिया. चाणक्य ने मगध के राजा घनानंद का विनाश कर पूरे भारत पर साम्राज्य स्थापित किया. आदि शंकराचार्य ने अकेले बौद्ध धर्म का अंत कर ४ पीठ बनाये और सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया.

ईसाईयों व मुसलमानों के शत्रु स्वयं कैथोलिक ईसाई हैं| अभी वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए ईसाई मूर्ख मुसलमानों (कुरान २:३५) का उपयोग कर रहे हैं| एलिजाबेथ ने इंडिया व पाकिस्तान सहित ५३ ईसाई व इस्लामी राष्ट्रों को अपना उपनिवेश बना रखा है| खिलाफत को मिटाने के लिए ईसाईयों ने उनके ही भाई तुर्की बिन फैसल अल सऊद का उपयोग किया| दोनों तभी तक जीवित हैं जब तक वैदिक सनातन संस्कृति जीवित है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिटी, तुर्की के खलीफाईराक के सद्दाम और अफगानिस्तान के भांति ईसाइयत और इस्लाम मिट जायेंगे| हम वैदिकपंथी ईसाईयों व मुसलमानों का अहित नहीं करेंगे| अतः मुसलमान कौम के हित हमसे मिलने से अधिक सुरक्षित हैं|

एक ओर पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा काफिरों को कत्ल कर देना ही काफिरों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है|

दूसरी ओर वैदिक सनातन धर्म, जो किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है, जो मात्र वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

यद्यपि बाइबल में खतना करने की स्पष्ट आज्ञा है, तथापि इस्लाम में खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह रिवाज है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य बात यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त भी नहीं है. अतः मुसलमानों को हमारी नेक सलाह है कि वे अपनी भावी पीढ़ी का खतना न करें| अपने भावी पीढ़ी के अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति के जनक वीर्य को नष्ट न होने दें| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है| वीर्यवान बन कर ही मुसलमान अपनी रक्षा कर पाएंगे|

बाइबल में वीर्यहीन बनना मजहब का आवश्यक कृत्य है. प्रमाण देखिये,

मूसा ने वीर्यक्ष्ररण को बाइबल में महिमामंडित किया, “और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.(बाइबल, उत्पत्ति १७:११).

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

अतः उपनिवेश से मुक्ति हेतु आर्यावर्त सरकार से जुड़ें.

अप्रति.

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