Muj16W52B DAS PRTINIDHI



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 24Y,  Jun 10-16, Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com andhttp://www.aryavrt.com Muj16w24y uno kl16608

||श्री गणेशायेनमः||

प्रेसनोट

IN THE COURT OF SH. SANDEEP GUPTA MM ROHINI DISTT. COURTS, DELHI

FIR No. 406/2003 u/s 153A PS NARELA DELHI.

AND

FIR No. 166/2006 u/s 153A and 295A PS NARELA DELHI.

सुनवाई की तारीख़: २२  जुलाई. २०१६.

सेवा में,

महामहिम श्री बान की मून महोदय!

कृपया मेरे पिछले अंक

http://www.aryavrt.com/muj16w23y-lgdelhi_uno-part2 का अवलोकन करें.

मेरी हत्या का नया षड्यंत्र

मैं साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त हूँ और जानना चाहता हूँ कि चर्च, बपतिस्मा  उपनिवेश, अजान, खुत्बे और मस्जिद का विरोध अपराध कैसे है? मेरे विरुद्ध मालेगांव मामले में अभियोग क्यों नहीं चला?

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

यह भी बता दूं कि मैंने बाबरी ढांचा पूर्व प्रधानमंत्री पूज्य श्री नरसिंहराव और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याणसिंह के आशीर्वाद से गिरवाया था|

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

शपथपत्र देने के बाद भी मेरे विरुद्घ अभियोग क्यों नहीं चला?

उपनिवेश की मल्लिका एलिजाबेथ के अंदर साहस हो तो, भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन, मुझे फांसी दे. किसी नए कानून की भी आवश्यकता नहीं है.

मैं आर्यावर्त सरकार का संस्थापक हूँ और आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को इसलिए मिटाना चाहता हूँ कि ए संस्कृतियां मानव मात्र को वीर्यहीन यानी ईश्वर विहीन करके अपने अनुयायियों सहित सबको दास बनाकर उपासना की स्वतंत्रता का परित्याग करने के लिए विवश करती हैं| इन संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं| अब ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रही हैं|

आज तक एलजी के दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति पर जिन धाराओं के अधीन मेरे विरुद्ध उपरोक्त अभियोग चले और चल रहे हैं, वे ही धाराएं बपतिस्मा/अज़ान का प्रसारण करने वाले  ईसाईयों व मुसलमानों पर लागू होती हैं. अंतर यह है कि मैं जो भी लिखता हूँ, भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा में लिखता रहा हूँ. जबकि वे कत्ल करते व ईशनिंदा करते हैं। 

क्या मैं जान सकता हूँ कि सन १८६० से आज तक किसी ईसाई व मुसलमान के विरुद्ध किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग क्यों नही चलवाया?

भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों के गले पर रखी हुई तलवार है|

अंग्रेजों ने पाक पिता गांधी द्वारा वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए मुसलमानों और ईसाईयों को इंडिया में रखवाया है.

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

गांधीवध के बाद भारतीय संविधान का संकलन कर उपनिवेशवासियों पर थोपा गया. जिसका अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को लुप्त करने के लिए संकलित किया गया है. वह भी अत्यंत धूर्तता से. अनुच्छेद वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की कठोर सच्चाई को सीधे नहीं कहता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंव द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है.

एलिजाबेथ उपनिवेश की असलियत को उपनिवेशवासियों के संज्ञान में नहीं लाना चाहती है.

एलिजाबेथ ने मेरी सारी सम्पत्तियां लूट ली हैं. आर्यावर्त सरकार के मुख्यालय के सारे मार्गों पर अतिक्रमण करा रखा है. मुख्यालय की पश्चिमी गली को बिकवा दिया है. मैं ३ वर्षों से अपने मुख्यालय गया ही नहीं. अगर गया होता तो मेरी हत्या हो चुकी होती.

नए षड्यंत्र के अधीन २८ मई २०१६ से, जब से मैंने श्रीमती अनु कश्यप को किरायेदार रखा है, मेरी पत्नी वहाँ रहना चाहती हैं. ताकि एलिजाबेथ उसकी हत्या करा दे.   सुपारी देकर हत्या  कराने का अभियोग लगा कर मुझे फांसी पर लटका दिया जाये और उपनिवेश का विरोध समाप्त हो जाये. 

यह पत्र मैं विश्व के समस्त राष्ट्राध्यक्षों को इसलिए लिख रहा हूँ कि मेरी रक्षा की जाये और मानवजाति को उपनिवेशवाद से मुक्ति दिलाई जाये. यदि हमारे परिवार के किसी व्यक्ति की हत्या होती है, तो एलिजाबेथ को तुरंत फांसी दी जाये.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

http://pgportal.gov.in Registration Number is : DARPG/E/2016/09589

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