Muj16W52B DAS PRTINIDHI



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 52B, Dec 23-29, 2016. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj16W52B DAS PRTINIDHI Dated:29/12/2016

 

||श्री गणेशायेनमः||

प्रेसनोट

http://www.aryavrt.com/muj16w52ay-das-prtinidhi

IN THE COURT OF SH. VIKRAM MM R/N 116, ROHINI DISTT. COURTS, DELHI

FIR No. 406/2003 u/s 153A PS NARELA DELHI.

AND

FIR No. 166/2006 u/s 153A and 295A PS NARELA DELHI.

सुनवाई की तारीख़: ७ जनवरी, २०१७.

दास प्रतिनिधि महामहिम बैजल.

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/muj16w52ay-das-nmo

एलजी तेजेन्द्र खन्ना मस्जिद अकबराबादी बनवाने में विफल हो गए. फिर एलजी जंग जंग में लगाये गए. अब एलजी बैजल जी मनोनीत हुए हैं.

एलजी और जज उपनिवेशवासियों के चुने प्रतिनिधि नहीं होते. एलिजाबेथ के उपनिवेश, ईसाइयत और इस्लाम की रक्षा हेतु इनका मनोनयन किया जाता है.

उपरोक्त अभियोगों की वापसी हेतु मैं १३ वर्षों से सरकार से अनुरोध कर रहा हूँ. इसके अतिरिक्त आर्यावर्त सरकार के १४ अधिकारी बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण २००८ से जेलों में बंद हैं. दारा सिंह तो १९९९ से ही बंद हैं. लेकिन मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा करने वाला और कत्ल करने के खुत्बे देने वाला कोई मुसलमान बंदी नहीं बना.

इतना ही नहीं उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा, राष्ट्रपति और राज्यपाल के स्वेच्छा से, मृत्युदंड का अपराध है.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

वह राष्ट्रपति, राज्यपाल, जज अथवा लोकसेवक मूर्ख ही होगा, जो उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान के विरुद्ध कार्यवाही कर, शमित मुखर्जी, गांगुली, स्वतंत्रकुमार, राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी आदि की भांति नौकरी गवांना चाहेगा... मीडिया सहित लोकसेवक का पेशा सत्य को नष्ट करना है. बिल्कुल झूठ कहना; समाज को दूषित करना और गालियां देना मीडिया, जज, राष्ट्रपति, राज्यपाल व लोकसेवकों की विवशता है. राज्यपाल पर्दे के पीछे शासकों (एलिजाबेथ) के लिए कार्य करने वाले मातहत और उपकरण हैं. ... बौद्धिक वेश्याएं हैं.

मालेगांव कांड में मैं साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त हूँ. जज ने निर्णय दिया, ”साध्वी की ज़मानत ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने प्राथमिक यानी एटीएस की जांच पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। कोर्ट ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यंहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।

मेरे उपरोक्त अभियोग वापस लेने का, उपरोक्त आदेशानुसार कोई लोकसेवक, जज, राष्ट्रपति और राज्यपाल न साहस कर सका और न कर ही सकेगा! उल्टे उपरोक्त लोग इसलिए नियुक्त किये गए हैं कि जो भी बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान, जिन्होंने उपनिवेशवासियों के स्वतंत्रता, जीवन, धरती, सम्पत्ति और उत्पादन के साधन के अधिकार छीन लिए हैं, का विरोध करे, उसे नष्ट कर दें.

मजेदार बात यह है स्वयं उपरोक्त लोग भी उपनिवेश, चर्च, बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान से पीड़ित हैं, लेकिन बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते!

लोकसेवक, नमो, जज, राष्ट्रपति और राज्यपाल एलिजाबेथ के बलिपशु हैं. भारतीय संविधान और कानूनों से बंधे हैं. अतएव वे उपनिवेश से मुक्ति नहीं ले सकते और न ही इंडिया में मस्जिद और अज़ान बंद करा सकते हैं? क्या उपरोक्त लोग एलिजाबेथ के बलिपशु बने रहने, ईशनिंदा व कत्ल करने के खुत्बे सुनने में लज्जा या भय का नहीं अनुभव करते? क्या उपरोक्त लोगों ने सोचा कि वे कितने असहाय हैं? क्या मानवजाति जीवित बचेगी?

आर्यावर्त सरकार उपनिवेशवासियों के जान माल और नारियों के सम्मान की रक्षा करना चाहती है.

उपनिवेशवासियों की जान और सम्पत्ति को लूटने का किसी सरकार के पास अधिकार नहीं है. सबका भयादोहन हो रहा है. यदि लोकसेवक, जज, राष्ट्रपति और राज्यपाल अपनी रक्षा चाहें तो आर्यावर्त सरकार को गुप्त सहयोग दें.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

२९/१२/१६

 

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