Muj16W47CY KALADHN



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 47CY, Nov 18-24, 2016. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj16W47CY KALADHN Dated:24/11/2016

 

||श्री गणेशायेनमः||

कालाधन

प्रणब दा को प्रणाम!

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व| अनुच्छेद ३९(ग).

१. यह कि उपनिवेश के सर्वसाधारण के पास एलिजाबेथ ने पीनेसके. का पानी भी नहीं छोड़ा है. अतएव उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार एडविना के वैश्यालय, जिसमे आप रहते हैं, में संकेंद्रित पीने का पानी भी काला धन है.

२. यह कि सत्ता के हस्तांतरण के कुटिल समझौते के बल पर आज एलिजाबेथ मानवजाति को लूट रही है. लोकसेवक भी लुट रहे हैं. मूर्ख यहूदी, ईसाई (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व मुसलमान (कुरान २:३५) सभी आपस में एक दूसरे के जान के शत्रु बने हुए हैं. लेकिन किसी के अंदर मानवता के विनाश की जड़, एलिजाबेथ के उपनिवेश, भारतीय संविधान, सत्ता के हस्तांतरण, इस्लाम और ईसाइयत के विरोध का साहस नहीं है. गलती से अगर किसी ने विरोध कर दिया तो उसे मिटा दिया गया. मुझे व हमारे ९ सहयोगियों को मिटाया जा रहा है.

३. यह कि राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. उपनिवेशवासी अपना सोना न बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! दादा! आप अपना पूजास्थल, भावी पीढी, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या आप को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?

४. यह कि मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला. १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. कोई विदेशी कर्ज न था. आज प्रति व्यक्ति ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१६ तक; ७० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने उपनिवेशवासियों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे| जिस सर्वसाधारण के हित हेतु उपनिवेशवासियों की सम्पत्ति और उत्पादन के साधन एलिजाबेथ ने लूटे, वे ही सबसे अधिक कर्ज के बोझ से दब गए. अभी भी एलिजाबेथ अपने लूट से बाज नहीं आ रही है.

५.यह कि भारत सोने की चिड़िया था. यहाँ सोना गिना नहीं, तौला जाता था. सन १९१७ तक एक ₹ =१३$ था. १९४७ में घट कर १₹=$ हुआ. कालाधन - कालाधन का हौवा खड़ा करके ८ नवम्बर २०१६ तक एक $ का मूल्य ६७ हुआ.

६.यह कि इंडियन उपनिवेशवासी जिसे कहते हैं, वह देने का प्रतिज्ञा पत्र है. धारक का रिजर्वबैंक के पास रहता है, जिसे धारक को देने के लिए गवर्नर प्रतिज्ञा बद्ध है. इतना ही नहीं, केन्द्रीय सरकार द्वारा का प्रतिज्ञापत्र प्रत्याभूत भी है.रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की धारा ३३(२) के अनुसार १५ अक्टूबर, १९९० तक १ का मूल्य ०.११८४८९ ग्राम शुद्ध सोना था, १९९० के बाद से की कोई कीमत ही नहीं!

७. यह कि सन १९४८ के पूर्व बिक्रीकर नहीं था और १९९१ के पूर्व जीएसटी नहीं था.

८. यह कि सन १९८७ में मैंने तीसहजारी कोर्ट में गवर्नर से नोट के बदले सोना देने की मांग करते हुए एक वाद प्रस्तुत किया था.

९.यह कि मेरी मांग दिल्ली उच्च न्यायालय तक निरस्त होती रही. अंत में कानून में १९९० के प्रभाव से संशोधन हो गया. सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार नहीं की. एलिजाबेथ अपने ही वचन से मुकर गई. जब कि इस धोखाधड़ी से जज भी पीड़ित हैं!

१०.यह कि सरकार जान माल की रक्षा के लिए है, जान लेने और लूटने के लिए नहीं|

११.यह कि अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर ईसाई व मुसलमान सहित सभी उपनिवेशवासियों से प्रथम संविधान संशोधन द्वारा लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही २०/०६/१९७९ से मिटा दिया गया है| (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८).

१२. यह कि बीती को बिसारिये! क्या न्यायमूर्ति श्री ठाकुर जी रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार से पूछेंगे कि नये नोट (वचन पत्र) के बदले RBI कितना सोना देगी?

१३. यह कि सन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है| जिनके पास वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के जान-माल की रक्षा का दायित्व है, उनको पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश कर दिया गया है|

१४. यह कि एलिजाबेथ, जिसके आप दास हैं, कौन है? जानने हेतु नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

१५. यह कि आप भलीभांति जानते हैं कि एलिजाबेथ ईसा का राज्य स्थापित करने के लिए आप की वैदिक सनातन संस्कृति और आप को नष्ट करेगी. लेकिन कुछ नहीं कर सकते.

१६. यह कि दादा! आप यह भी भलीभांति जानते हैं कि इंडिया आज़ाद नहीं है, लेकिन विरोध नहीं कर सकते. उल्टे जो उपनिवेश का विरोध करे, उसे भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अंतर्गत फांसी दिलाने के लिए विवश हैं!

१७. यह कि पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना (कुरआन ८:१७) व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद (काफिरों की हत्या करने का असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार) है|

१८. यह कि इनके हिस्से की धरती देकर भी इनको आप अपनी ही धरती पर, भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन शपथ लेने के कारण, संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए विवश हैं!

प्रार्थना

विमुद्रीकरण करके सोविएत यूनियन जैसे सम्पन्न देश तक मिट गए. अतः अपने वचन निभाए RBI व एलिजाबेथ सरकार, अन्यथा हमे उपनिवेश से मुक्त करे. सम्पादक.

 http://www.aryavrt.com/muj16w47cy-kaladhn

Registration Number is : DARPG/E/2016/22006


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