Muj16W46BY KRKIISIMA 16N12Y



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 46BY, Nov 11-17, 2016. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj16W46BY KRKIISIMA 16N12Y Dated:12/11/2016

 पत्रांक: DARPG16n121 दिनांक: १२/११/१६

प्रणब दा को प्रणाम!

मैं, अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, आर्यावर्त सरकार का संस्थापक और साध्वी प्रज्ञा का सहअभियुक्त हूँ. मैं मानवजाति को अब्रह्मी संस्कृतियों से बचाना चाहता हूँ. मैं आप से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर जानना चाहता हूँ:-

यह कि सरकार जान माल की रक्षा के लिए है, जान लेने और लूटने के लिए नहीं|

यह कि NIA के जज, जो सीधे आप के नियंत्रण में है, ने निर्णय दिया, “साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।

यह कि पूजा स्थल भंजन कराने वाला, (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३), लूट व दूसरे के नारी के अपहरण की शिक्षा देने वाला (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), दुधमुहों की हत्या कराने वाला और नारियों का उनके पुरूषों के आँखों के सामने बलात्कार कराने वाला जेहोवा ईश्वर कैसे है? (बाइबल, याशयाह १३:१६)

यह कि जेहोवा और अल्लाह से अपने प्राण बचाना और आतताई सरकार के विरुद्ध सरकार बनाना अपराध कैसे है?

यह कि राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! दादा आप अपना पूजास्थल, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या आप को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?

यह कि मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला. १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. कोई विदेशी कर्ज न था. आज प्रति व्यक्ति ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१६ तक; ७० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने नागरिकों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे|

यह कि सन १९४८ के पूर्व बिक्रीकर नहीं था और १९९१ के पूर्व जीएसटी नहीं था.

यह कि पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना (कुरआन ८:१७) व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद (काफिरों की हत्या करने का असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार) है| आप मुझे बतायें कि जिहाद पर चर्चा करना अपराध कैसे है? कौन से संविधान संशोधन से उपनिवेशवासियों को भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार से वंचित किया गया है?

यह कि वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ मैंने पूर्व में भी आप को याचिका भेजी थी. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/azaan-aur-snvidhan

यह कि २०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने उपनिवेशवासियों के आजादी के आंदोलन का अपहरण क्यों कर लिया? उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द स्वतंत्रका जोड़ा जाना. चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है.

अतएव आप से अनुरोध है कि ईसाइयत और इस्लाम से रक्षा हेतु आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

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