Muj16W43BY NIVEDAN



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 43BY, Oct 21-27, 2016. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj16W43BY NIVEDAN Dated:10/24/2016

||श्री गणेशायनमः||

विश्व के उपनिवेशवासियों से निवेदन:

सपनों की दुनियां से बाहर आईये. मेरे प्रश्नों का उत्तर ढूंढिए...

थोमस मुनरो (Thomas Munro) ने मद्रास रेजीडेंसी में साक्षरता जानने के लिए सन १८२३ में सर्वे किया था, उसने लिखा कि मद्रास रेजीडेंसी में १००% साक्षरता है.

प्रश्न है कि अछूत, दलित और पिछड़े समाज को भी शिक्षित करना उस समय के ब्राह्मणों का ही दायित्व था. फिर अछूत, दलित और पिछड़े समाज के भावी संतानों को ब्राह्मणों ने कैसे साक्षर बनाया?

जो अछूत, दलित और पिछड़ा समाज शिक्षक ब्राह्मणों का भिक्षा देकर भरण पोषण करता था और बदले में जो ब्राह्मण तथाकथित दलित समाज की भावी पीढ़ी को सम्प्रभु ब्रह्मचारी बनाता था, आज वही दलित और पिछड़ा समाज ब्राह्मणों का शत्रु बन गया है. आज अछूत, दलित और पिछड़ा समाज स्वेच्छा से निःशुल्क गुरुकुलों का बहिष्कार कर अपनी भावी पीढ़ी को मैकाले के महंगे यौनशिक्षा स्कूलों में भेजकर दास बना रहा है. गो को कत्लखाने भेज रहा है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/muj16w01-khtna-16101

http://www.aryavrt.com/indian-educationact-1858hd

इंडियन उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का गांधी ने देश के बैरिस्टरों से मिल कर अपहरण कर लिया. उपनिवेशवासी स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने का साहस भी गवां बैठे हैं. क्योंकि उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

इंडिया स्वतंत्र नहीं, एलिजाबेथ का स्वतंत्र? उपनिवेश है. आइये देखें उपनिवेश किसे कहते हैं?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैंजहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है।

सारे ब्रिटिश कानून जस के तस लागू हैं. एलिजाबेथ को धरती की सभी संस्कृतियों और उनके अनुयायियों को अर्मागेद्दन द्वारा नष्ट कर केवल ईसा की पूजा करानी है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

कोई उपनिवेशवासी उपनिवेश का विरोध क्यों नहीं करता? उल्टे मेरे पास तमाम पत्र आ रहे हैं कि इंडिया दैट इज भारत स्वतंत्र है. मैं लोगों को दिग्भ्रमित करता हूँ. मेरा सुझाव है कि सत्ता हस्तान्तरण के मात्र २७ दिन पूर्व १८ जुलाई, १९४७ को ब्रिटिश संसद में पारित निम्नलिखित अधिनियम का पहला पैरा पढ़ें,

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

“An Act to make provision for the setting up in India of two independent Dominions, to substitute other provisions for certain provisions of the Government of India Act 1935, which apply outside those Dominions, and to provide for other matters consequential on or connected with the setting up of those Dominions…”

इंडिया को बाँटने और अपने कानूनों को उपनिवेश वासियों पर लागू करने का ब्रिटेन को अधिकार कैसे है? दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास सुरक्षित है, वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ किये गये किसी भी विरोध को बड़ी चतुराई से निष्क्रिय कर देती है| इस प्रकार एलिजाबेथ राष्ट्रपति और राज्यपाल के कंधे पर रायफल रख कर अपने शत्रुओं को मार रही है और कोई एलिजाबेथ के विरुद्ध ऊँगली भी नहीं उठा सकता!

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

http://www.aryavrt.com/fatwa

उपनिवेशवासी जीवित कैसे बचेंगे?

उपनिवेशवासी जानना चाहते हैं कि उपनिवेश का विरोध और मस्जिद, जहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है?

उपनिवेशवासियों को कत्ल करने से जिनको जन्नत मिलेगी और नारियों का बलात्कार करने से हूरें. उनको उपनिवेशवासी इंडिया में क्यों रहने दें?

राज्यपाल और जज इस बात से अत्यधिक आतंकित हैं कि मैंने बाबरी ढांचा गिरवा दिया. हम मस्जिद, अज़ान और खुत्बे का विरोध कर रहे हैं. हम इस्लाम ब्रांड साम्प्रदायिक सद्भाव, “मात्र अल्लाह पूज्य है!” को बिगाड़ रहे हैं. हम एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहने के लिए तैयार नहीं हैं. हमने स्वतंत्र आर्यावर्त सरकार बना ली.

उपरोक्त तथ्य तब उभड़ कर सामने आये, जब जज ने राज्यपाल की संस्तुति पर निम्नलिखित आदेश दिया:-

साध्वी की ज़मानत ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने प्राथमिक यानी एटीएस की जांच पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। कोर्ट ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यंहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।

अज़ान द्वारा मुसलमान स्वयं राज्यपालों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं और कत्ल करने के खुत्बे देते हैं.

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ सन १८६० में संकलित की गई. क्या कोई राज्यपाल मस्जिद और अज़ान बंद कर सका?

अतः उपनिवेश. भारतीय संविधान, राष्ट्रपति, राज्यपाल, चर्च, मस्जिद, बाइबल और कुरान के रहते मानवजाति सुरक्षित नहीं है.

इनसे मुक्ति हेतु मानवजाति आर्यावर्त सरकार का सहयोग करे.   अप्रति.

 

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