Muj16W31A NIYMANUSAR KARYAVAHI



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 31A, Jul 29 Aug 04, 2016. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj16W31A NIYMANUSAR KARYAVAHI

 ||श्री गणेशायेनमः||

Muj16W31A NIYMANUSAR KARYAVAHI

०४ अगस्त २०१६

पुनर्स्मरण

To adcuttarakhand;

प्रेषक: अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी पुत्र स्व० बेनी माधव त्रिपाठी,

मंगल आश्रम, टिहरी मोड़, मुनि की रेती, ऋषिकेश, टिहरी गढ़वाल २४९१३७ उख

विषय: पेंशन में विलम्ब; निस्तारण तक विशेष आपदा कोष से आर्थिक सहायता हेतु आग्रह.

पत्रांक; Muj16W31A NIYMANUSAR KARYAVAHI                      दिनांक; August 4, 2016

संदर्भ: सचिव सिचाई का पत्र संख्या 470 / II-2016-01(09) / 2015 दिनांक २0 मई, २०१६

BLIPSHU RAJYAPAL 16526y Punrsmaran2                   Dated; 26/05/2016

एवं http://www.aryavrt.com/muj16w14-rashtrpti-shasan

श्रीमती अनु कश्यप की सिचाई सचिव से भेंट. दिनांक ३ अगस्त, २०१६.

सेवा में,

महामहिम श्री कृष्ण कान्त पाउल, राज्यपाल, उत्तराखंड, देहरादून-२४८००१.

महामहिम महोदय,

कृपया उपरोक्त पत्रों एवं भेंट का संदर्भ लें.

अपने विशेष आपदा कोष से मेरी आर्थिक सहायता तो आप उसी दिन से कर सकते थे, जब मैंने आप से आग्रह किया था. लेकिन एलिजाबेथ की आज्ञा नहीं थी. आज भी आप विवश हैं.

अब्रह्मी संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण/घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियों आज तक विफल नहीं हुईं| आप जीवित नहीं बच सकते.

नियमों, जिनका मैंने हवाला दिया है. के अनुसार मैं उप्र नहीं जाऊंगा. आप ही, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अनुसार, एक मात्र ऐसे अधिकारी हैं, जो मेरा प्रकरण निपटा सकते हैं. लेकिन आप मुझे पेंशन नहीं दिलवाएंगे. क्योंकि एलिजाबेथ की आज्ञा नहीं है.

सचिव जी के माध्यम से इंडियन उपनिवेश की मल्लिका एलिजाबेथ ने अपेक्षा की है कि मेरे पेंशन प्रकरण में प्रमुख सचिव सिचाई, उप्र नियमानुसार कार्यवाही कराने का निर्देश करें. मैंने नियमों का हवाला दिया है. पुनः दे रहा हूँ.

“It has, accordingly, been decided that if, in future, service records are found to be incomplete or imperfect at the time of processing and finalizing pension cases, those cases will not be delayed but the officials responsible for the maintenance of the records will be held accountable for any deficiencies, failure or omissions therein, and action will be initiated against them…

कृपया मेरे अनुरोध पत्र दिनांक जुलाई २८, १९८४ की छायाप्रति (संलग्न) का अवलोकन करें. मेरा १४ वर्षों का वेतन अप्राप्त रहा. (४ अगस्त, १९६९ से मार्च, १९९३ तक) मैंने अपनी सेवा पुस्तिका मंगवा कर प्रकरण का निस्तारण करने के बाद ही कार्यमुक्त करने का आग्रह था. किस नियम के अधीन विभाग ने मेरे पत्र का उत्तर देना भी उचित नहीं समझा?

सचिव जी के पत्र संख्या 470 / II-2016-01(09) / 2015 दिनांक 20 मई, २०१६ का पैरा ४ स्वयं स्वीकार करता है कि मेरी सेवा पुस्तिका चंद्रप्रभा प्रखंड से अप्राप्त रही. यानी उत्तरदायी अधिकारी विष्णुप्रयाग, जोशीमठ, जो सेवा पुस्तिका के रखरखाव के लिए उत्तरदायी थे, के अधिकारी हैं. क्या उनके विरुद्ध कार्यवाही भी उप्र करेगा?

नियम यह कहता है,

“… but that it would be unfair to a retiring Government servant if he had to suffer because of the lapses of those responsible for the proper maintenance of service records.

“The fact that under the new procedures the presumption will be in favor of the Government servant if the records are incomplete or deficient in any manner underlines the importance of ensuring the proper, regular and timely completion of all the service and accounts records by the offices concerned, so as to  minimize the occasion for making such presumptions…”

जब आप का विभाग मेरी सेवा पुस्तिका के रखरखाव में चूक कर बैठा, तो नियम तो यही कहता है कि आप मुझे पीड़ित नहीं कर सकते! मुझे पेंशन उत्तराखंड ही देगा. फिर सचिव महोदय द्वारा मेरे पेंशन प्रकरण को किस नियम के अधीन उप्र भेजा जा रहा है?

जो नियम मुझे ज्ञात है व जिसे गुप्त रखने के लिए आप का मनोनयन हुआ है, उसे बाइबल से उद्धरित करता हूँ, “परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७). न मैं एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहना चाहता हूँ और न ही ईसा को राजा मानता हूँ. इसीलिए एलिजाबेथ चाहती है कि मुझे पीड़ित किया जाये. कत्ल किया जाये. लेकिन देश उपनिवेश है, किसी को पता न लगे. आप लोगों को तो इस डायन की दासता करने में लज्जा भी नहीं आती!

उपनिवेश विरोधी होने के कारण आप, नियमानुसार, मुझे फांसी दिलवा सकते हैं. (भारतीय दंड संहिता की धारा १२१). क्या मुझे फांसी दिलवा पायेंगे? महामहिम जी! ईसाइयत और इस्लाम का एक भी विरोधी जीवित नहीं छोड़ा जाता. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

६ दिसंबर, १९९२ में बाबरी ढांचा गिरवाने के बाद से ही मैं एलिजाबेथ के मनोनीत जजों व राज्यपालों द्वारा तबाह किया जा रहा हूँ. यदि वैदिक सनातन धर्म में धर्मार्थ भोजन एवं दक्षिणा की प्रथा नहीं होती, तो मैं कभी का भूखों मर चुका होता. एलिजाबेथ को आप को दास भी बनाये रखना है और देशवासी उपनिवेशवासी हैं, इस तथ्य को छिपाना भी.

आप डायन एलिजाबेथ के मनोनीत बलिपशु हैं. उत्तराखंड की लूट का हिस्सा एलिजाबेथ तक पहुँचाने का आप पर उत्तरदायित्व है. माननीय हरीश रावत की जनता द्वारा चुनी सरकार को आप गिरा चुके हैं. एलिजाबेथ का हिस्सा पहुँच गया, तो फिर सरकार बहाल भी हो गई.

आप के पास तो यह भी साहस नहीं कि उपनिवेश के विरुद्ध बोल सकें. बपतिस्मा/अज़ान द्वारा प्रातः से रात तक चर्चों/मस्जिदों से ईशनिंदा सुनते हैं. कत्ल होने के खुत्बे सुनते हैं. वह भी अपनी पुलिस द्वारा संरक्षण देकर. आप ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अधिकार होते हुए भी कभी किसी ईमाम, फादर या मौलवी पर अभियोग नहीं चलाया!

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

महामहिम जी! मानवजाति को ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान से खतरा है. आप जरा उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान. खुत्बों, ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान का विरोध करके दिखाएँ. आप को अपनी महिमा का पता चल जायेगा.

भवदीय,

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

दिनांक: ०४/०८/१६

प्रतिलिपि: प्रमुख सिचाई सचिव, उप्र सरकार.

संलग्नक: छायाप्रति कार्यमुक्त करने के पूर्व वेतन और बकायों के निस्तारण हेतु आग्रह.

Registration Number is : DARPG/E/2016/13707


 

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AyodhyaP Tripathi,
Aug 4, 2016, 1:12 AM
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