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मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 31, Jul 29 Aug 04, 2016. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj16W31 BETI DIVAS

||श्री गणेशायेनमः||

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[11:57pm, 24/07/2016] DëEPäk🤗:  से साभार:

अगर भारत की आजादी के सत्तर साल बाद भी कोई व्यक्ति सरेआम किसी की बेटी बहन को पेश करने का आदेश देता है, तो कहीं न कहीं यहां भारतीय लोकतंत्र पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है।

मेरी टिप्पणी:

आजादी? कैसी आजादी और कैसा लोकतंत्र? यह इंडिया दैट इज भारत है. नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

इंडिया एलिजाबेथ का स्वतंत्र? उपनिवेश है, जिसका विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. मैं साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त हूँ. सन २००८ से इस धारा के लागू किये जाने की मांग कर रहा हूँ. एलिजाबेथ की उपनिवेश सरकार घोषित करे कि मैं उसके उपनिवेश के विरुद्ध युद्ध करने वाला युद्ध अपराधी हूँ और मुझे फांसी दे.

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके शांति के धर्म और सहिष्णु इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना (कुरआन ८:१७) व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का शांतिपूर्वक किया गया जिहाद है. काफिरों की नारियां नसीमुद्दीन और उनकी उम्मा की हैं. (कुरान २३:६). भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) इस्लाम को अपनी इसी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार देता है| अतः दोषी है तो भारतीय संविधान और राज्यपाल.

नसीमुद्दीन द्वारा एक भाजपा नेता की बेटी मांगने की घटना को यदि आप एक सामान्य घटना मानते हैं तो शायद आप इतिहास की एक और बड़ी भूल का हिस्सा बन रहे हैं। आपसे आपकी बेटी मांगने की यह घटना वैसी ही है, जैसी आज से बीस साल पहले काश्मीर में घटी थी, जब किसी दूसरे नसीमुद्दीन ने कश्मीरी पंडितों से उनकी बेटियां मांगी थी। यह दिन उन दिनों से बहुत अलग नही हैं, जब मोहम्मद बिन कासिम की सेना ने मुल्तान के लोगों से उनकी बेटियां मांगी थी, जब तैमूर की सेना ने दिल्ली से उसकी बेटियां मांगी थी, जब ख़िलजी की सेना ने नालंदा से उसकी बेटियां मांगी थी। आपसे आपकी बेटियां मांगने वाला यह अरबी आतंक कोई नया नही है, आप इतिहास के पन्ने उलट कर देखिये, सत्य आपकी आँखे लाल कर देगा।

मेरी टिप्पणी:

बारह साल तो बहुत लम्बी आयु है. अल्लाह ने ६ वर्ष की आयशा का निकाह ५२ साल के मोहम्मद से किया था.

इतिहास की बातें तो इतिहास हैं, पर यदि आजादी के बाद भी यही घटना दुहराई जा रही हो, तो यहां राष्ट्र की संप्रभुता के साथ साथ उसके पुरुषों के पौरुष पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। अगर हमारी बारह साल की बेटी को यह कहना पड़ता है, कि बोलिये नसीमुद्दीन अंकल, मैं खुद को कहाँ पेश करूँ तो हमें सोचना होगा कि हम कितना गिर चुके हैं।

मेरी टिप्पणी:

बार बार आजादी लिखना छोड़ दीजिए. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/indian-educationact-1858hd

उपनिवेशवासी का पौरुष तो गुरुकुलों के नष्ट होते ही नष्ट होगया. अब भावी पीढ़ी को गुरुकुल के ब्रह्मचारी बनाइये. मैकाले के यौनशिक्षा का बहिष्कार कीजिए.

दोष नसीमुद्दीन का नहीं, दोष भारतीय संविधान का है, जिसका अनुच्छेद२९(१) बेटीसेविवाह करानेवाले ईसा (बाइबल,,कोरिन्थिंस७:३६) व पुत्रवधूसे निकाहकराने वालेअल्लाह (कुरान, ३३:३७-३८) को अपनीसंस्कृतिको बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है.

उस भारत में जहां हम यह मानते आये हैं कि बेटियां किसी एक की नहीं पुरे गांव की होती हैं, जहां हम कुमारियों का चरण पूजते समय उसकी जात पूछे बिना उसे दुर्गा स्वीकार करते है, वहां की बेटियां क्या इतनी असहाय हैं? दयाशंकर की बेटी सिर्फ दयाशंकर की बेटी नही है, वह पुरे राष्ट्र की बेटी है।

मेरी टिप्पणी:

आप का कोई राष्ट्र नहीं! इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है और संयुक्त राष्ट्र संघ के सार्वभौम मानवाधिकार (UDHR Art 25(2)) का हस्ताक्षर कर्ता सदस्य है. इस अनुच्छेद ने हर कन्या को वैश्या बनने पर सरकारी संरक्षण दे रखा है. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. इससे बड़ी असहायता क्या हो सकती है? विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

Http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar

नसीमुद्दीन ने सिर्फ एक राजपूत की बेटी नहीं मांगी, उसने पुरे उत्तर प्रदेश की बेटी मांगी है। उसने ब्राम्हण, यादव, राजपूत , हरिजन, बनिया , दलित सबकी बेटी मांगी है। आप तनिक सोचेंगे, कि एक बारह साल की लड़की को जब यह कहना पड़ा होगा कि "बोलिये नसीमुद्दीन अंकल मैं खुद को कहाँ पेश करूँ" तो उसके मन में क्या चल रहा होगा? क्या वह अंदर ही अंदर मर नही गयी होगी? अब आपको सोचना होगा उत्तर प्रदेश, कि क्या अब भी चंगेज और ख़िलजी की संतानो को आप अपनी बेटियां देंगे या उनका विरोध करेंगे। दलित और सवर्ण के झगडे में बटना छोड़िये, वे हमारे साझे दुःख थे। जिन दिनों आप कष्ट काटते थे, उन दिनों सवर्णों के लिए भी कोई सुख का भंडार नही था। सुख सदैव दो फीसदी लोगों के हिस्से में रहा है। दलित सवर्ण तमाशे का सच देखना हो तो आइये मैं दिखाता हूँ। आइये, देखिये गोपालगंज के थांवे शक्तिपीठ में सैकड़ों किलोमीटर दूर से आती नवविवाहित दुल्हनें अपने पति के गमछे में बधे अपने आँचल के कोर से जिस रहसु देव की मूर्ति का पांव पोछती हैं, वो रहसु देव जाति के चमार थे। देखिये झारखण्ड में, मात्र सौ-डेढ़ सौ साल पहले जन्मे जिस योद्धा को आज पूरा राज्य भगवान कह कर पूजता है, वे विरसा भगवान भी दलित थे। आपके उत्तर प्रदेश में ही पूरा राज्य क्या रविदास को भगवान कह कर नही पुजता? छोड़िये इन आपसी झगड़ों को। आपको आपस में तोड़ने के हजारो तरीके अपनाये जायेंगे, राजनैतिक दलाल आपकी बस्ती में आग लगाने के सैकड़ों मौके ढूंढेंगे। स्वयं एयर कंडीसन में बैठ कर आपको आग में झोंकने वाले कथित विचारक खूब जहर उगलेंगे। राजनैतिक गलियारों से हर महीने लाखों का उत्कोच ले कर जहर बोने वाले खूब प्रवचन देंगे। इन जहरीले लोगों से बचने का प्रयास कीजिये। यह समय स्वयं की रक्षा करने का है, और यह काम आप साथ रह कर ही कर सकते हैं। उठिए, खड़े होइए, और बताइये राजनीत के इन गंदे चेहरों को, कि भारत की बेटियां किसी के आगे पेश होने के लिए नही जन्मीं। बताइये कि हम अभी इतने असहाय नही हुए कि कोई हमारी बेटियों की ओर गन्दी नजर डाले और हम देखते रहें। बताइये कि हमारी बेटियां हमारी पूज्य हैं, हमारी लक्ष्मी हैं। खड़े होइए अपनी उस बारह साल की बेटी के साथ।    

मेरी टिप्पणी:

हमारे पूर्वज तब चुप रहे जब आतताई ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रोका गया. नसीमुद्दीन ने मांगी नहीं है, नसीमुद्दीन को वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों की बहन बेटियां २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने सौंप दी हैं. मुक्ति चाहिए तो ईसाइयत और इस्लाम मिटाइए. गुरुकुलों को पुनर्जीवित कीजिये.

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) सम्प्रभु मनुष्य को वीर्यहीन कर अधीन करने वाले इस्लाम को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा विवश कर दिए गए हैं. (भारतीय संविधान, अनुच्छेद ६० व १५९)

यह न भूलें कि मोहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी पर रासुका लगा है. अज़ान व मस्जिद का विरोध करने के कारण मैं सन १९९२ से पीड़ित हूँ और मेरे साध्वी प्रज्ञा सहित १३ सहयोगी २००८ से जेल में हैं. इस्लाम, मस्जिद, अज़ान व खुत्बों का एक भी विरोधी चैन से नहीं है. जबकि भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन आपको इस्लामकोमिटानेका कानूनी अधिकार है. ईशनिंदा और कत्ल करने की धमकी राष्ट्रपति और राज्यपाल भी सुनते हैं, लेकिन कुछ कर नहीं सकते.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०)

Registration Number is : DARPG/E/2016/13471

http://www.aryavrt.com/muj16w31-beti-divas


 

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AyodhyaP Tripathi,
Jul 31, 2016, 2:32 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Jul 31, 2016, 2:26 AM
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