Muj16W30J JJ NE PALLETGN KA PRAYOG VRJIT KIYA



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 30J, Jul 22-28, 2016. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj16W30J JJ NE PALLETGN KA PRAYOG VRJIT KIYA

 

||श्री गणेशायेनमः||

Muj16W30J JJ NE PALLETGN KA PRAYOG VRJIT KIYA

“*फ़ौज बंद करे पैलेट गन का प्रयोग *

“संसार में पहली बार किसी देश की अदालत तय कर रही है कि उसके देश की सेना किस हथियार से लड़े??? ये आदेश दे कर, जज साहब, अपनी बुलेट प्रूफ कार में बैठ कर, अपने 2 पुलिस कमांडों, जिनके हाथों में कारबाइन थी, के साथ, अपने उस सरकारी आवास चले गए, जिसकी रक्षा में AK-47 ले कर, 2 गनर हमेशा तैनात रहते हैं ।।।।।।

उपरोक्त टिप्पणी श्री राहुल पांडे (मंगल पांडे नहीं) की है.

अमरनाथ की यात्रा बाधित है. जज का आदेश नदारद है!

दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ पढ़ लीजिए.

पहली बार नहीं, यह तो २८ जनवरी,१९५० को सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना के बाद से आज तक जारी है.

संविधान के अनु० ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ व संविधान सभा के लोग न लूट पाए, उसे सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया (एआईआर, १९५१, एससी ४५८) व अब तो इस अनुच्छेद को २०-६-१९७९ से भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है|

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान पर सुनवाई नहीं हो सकती. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

ईमाम मस्जिदों से काफ़िर उपनिवेशवासियों के गरिमा का हनन करते हैं, वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की और काफिरों के नरसंहार की घोषणा और इष्टदेवों की निंदा करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का न्यायपालिका ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). उन्हें मिल भी रहा है.

न्यायपालिका ने भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) भी दिया है|

हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/) यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान और बपतिस्मा भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित है.

समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कन्याओं को पब में शराब पीने और नंगे नाचने का अधिकार, सगोत्रीय विवाह के कानून तो जजों ने ही पास किये हैं|

क्योंकि जजों को भारतीय संविधान को बनाये रखने की शपथ लेनी पड़ती है. (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, के प्रारूप ४ व ८)

यानी कि जज राज्यपाल के आज्ञाकारी बलिपशु हैं और राज्यपाल इंडियन उपनिवेश की मल्लिका गो नर भक्षी एलिजाबेथ के बलिपशु हैं.

बकरीद के दिन किसी सहिष्णु, सर्वधर्मसमभाव के जीते जागते स्वरूप मुसलमान के यहाँ उस बकरे को हलाल होते देखिये, जो मैं-मैं करते हुए, न अपने जान की रक्षा कर पाता है और न कोई जज उसकी सुनवाई कर सकता है. और हाँ! मुसलमान को ग्लानि नहीं होती, अपितु जन्नत प्राप्ति का बोध होता है. उपनिवेशवासी उसी बलि के बकरे का प्रारूप तब तक है, जब तक उपनिवेशवासी है.

इतना ही नहीं! मुसलमान अल्पसंख्यक भी हैं. अपनी उपरोक्त गंगा जमुनी संस्कृति को बनाये रखने का उनको भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से असीमित मौलिक मजहबी अधिकार प्राप्त है.

अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम निजी कानून, वक्फ, मदरसों, उर्दू शिक्षकों, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा के बदले वेतन व हज अनुदान देने के लिए संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन राष्ट्रपति व राज्यपाल विवश हैं|

और मौत के फंदे उपनिवेश और भारतीय संविधान का एक भी विरोधी नहीं. जिसने विरोध किया, रासुका या मकोका में बंद हुआ. साध्वी प्रज्ञा से बड़ा उदाहरण कोई हो भी नहीं सकता.

क्या आप गौ नर भक्षी डायन एलिजाबेथ के उपनिवेश का विरोध करेंगे? नहीं तो कफन की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी. नर्क के ईंधन बनेंगे. और हाँ! जज साहब आप के अगली पंक्ति में रहेंगे. बेचारे जज!

मैंने ऊपर जो भी लिखा है, न्यायपालिका की अवमानना है और उपनिवेश के विरूद्ध युद्ध भी. मैं देश के महामूर्ख बलिपशु जजों को चुनौती देता हूँ कि मेरे विरुद्ध अभियोग चलायें. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मुझे फांसी दिलवाएं.

है हिम्मत किसी बलिपशु जज के पास?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2016/13055

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jul 25, 2016, 10:40 PM
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