Muj16W29 JMANT KISLIYE



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 29, Jul 15-21, 2016. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj16W29 JMANT KISLIYE

  

||श्री गणेशायेनमः||

जमानत किसलिए.

FIR ATSPSCR 18/2008 धाराएँ ३०२, १२०, १५३ आदि. 

सरकार बनाम साध्वी प्रज्ञा व अन्य.

महामहिम प्रणब दा को प्रणाम!

मैं अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, पुत्र स्व० बेनी माधव त्रिपाठी (सू० स०) आर्यावर्त सरकार फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१ साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त हूँ. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

एनआईए के विशेष जज ने साध्वी प्रज्ञा पर लगाये १० आरोप; जमानत ख़ारिज

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.indiatvnews.com/news/india-10-things-said-by-special-nia-court-while-rejecting-sadhvi-pragya-s-bail-plea-336983

साध्वी की ज़मानत ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने प्राथमिक यानी एटीएस की जांच पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। कोर्ट ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यंहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।

सत्ता के हस्तांतरण के संधि के पूर्व ही हमारे पूर्वजों के ९० वर्ष के बलिदानों के बदले मे १८ जुलाई, १९४७ को आक्रांता जारज षष्टम् ने शब्द उपनिवेश’ के पूर्व शब्द ‘स्वतंत्रजोड़ कर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ बना दिया, और तब से आज तक लागू है. जिसके अनुसार इंडिया को स्वतंत्रता नहीं दी गई, अपितु इंडिया का दो स्वतंत्र? उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को इंडिया बंट गया।

आप के अधीन कानूनविदों की फौज है. कोई परिवर्तन हुआ हो तो कानूनविदों से पूछ कर उपनिवेशवासियों को बताएं. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, का जिसने भी विरोध किया वह अम्बेडकर सहित जीवित नहीं बचा. चुनाव धोखा है| चुनाव द्वारा मतदाता (Voter) भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग), कुरान और बाइबल के हठधर्म नहीं बदल सकते. आर्यावर्त सरकार जानना चाहती है कि ब्रिटेन के पास इंडिया को २ भागों इंडिया व पाकिस्तान में बाँटने का अधिकार कैसे था?

सारे कानून आज भी ब्रिटिश के ही हैं। चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| यह आज़ादी नहीं धोखा है. उपनिवेशवासियों की आजादी का अपहरण किया गया है. आर्यावर्त सरकार मानवजाति को इस चक्रव्यूह से निकालना चाहती है.

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, जेल में सन १९९९ से बंद दारा सिंह ने, २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों और अब कमलेश तिवारी ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये. यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय, जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है.

हो सकता है कि साध्वी प्रज्ञा सभी आरोपों से इंकार करती हों, लेकिन मैं जज के सभी आरोपों को स्वीकार करता हूँ.

मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्धरत हूँ. मैं इंडिया को उपनिवेश, चर्च, बाइबल, मस्जिद, कुरान, अज़ान और खुत्बों से मुक्त कर भारत बनाना चाहता हूँ. मैकाले के दास बनानेवाली यौनशिक्षा को समाप्त कर ब्रह्मचारी बनानेवाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित करना चाहता हूँ. अतएव मैं उपनिवेश की वर्तमान मल्लिका गौ-नर भक्षी जेसुइट एलिजाबेथ का भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन अपराधी हूँ. एलिजाबेथ कौन हैं? विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

लेकिन इस धारा के अधीन मेरे अथवा मेरे सहयोगियों के विरुद्ध कभी कोई अभियोग नहीं चला. मेरे और मेरे सहयोगियों के विरुद्ध जो भी अभियोग चल रहे हैं उन धाराओं के अधीन अभियोग चलाने का एलिजाबेथ के उपनिवेश के पास कोई अधिकार ही नहीं है, क्यों कि हमने जो भी किया है, भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के सीमाओं में रहते हुए, प्राइवेट प्रतिरक्षा में किया है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अधीन अपराध ही नहीं है.

उपनिवेशवासी १८ जुलाई, सन १९४७ से ही ब्रिटिश स्वतंत्र? उपनिवेश के बलिपशु हैं. (ब्रिटिश नागरिकता अधिनियम १९४८) भारतीय दंड संहिता की धारा १२१, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है, के अधीन जो उपनिवेश का विरोध करेगा, उसकी फांसी पक्की. कोई अपील या दलील नहीं.

यह सच है कि मैं मानवमात्र को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए युद्धरत हूँ. स्वतंत्र जीवन मानवमात्र का जन्मसिद्ध अधिकार है. अब्रह्मी संस्कृतियाँ किसी को जीने का अधिकार नहीं देतीं. ईसाई व मुसलमान दोनों ही मानवजाति का नरसंहार करेंगे. इसलिए चर्च/मस्जिद में विष्फोट करना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है. मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया. ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करने के कारण ५० अभियोग चले. ३ आज भी लंबित हैं.

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का लक्ष्य है|

गांधीवध के बाद भारतीय संविधान का संकलन कर उपनिवेशवासियों पर थोपा गया. जिसका अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को लुप्त करने के लिए संकलित किया गया है. वह भी अत्यंत धूर्तता से. यह अनुच्छेद नरसंहार की कठोर सच्चाई को सीधे नहीं स्वीकार करता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों के संस्कृति, भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है.

दादा! एनआईए व जज सीधे आप के अधीन हैं. फिर भी आप इनका कुछ नहीं बिगाड सकते. आप दया के पात्र हैं. पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों का परिरक्षण {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६}, संरक्षण {अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम निजी कानून व वक्फ} और प्रतिरक्षण {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षा, मदरसों, उर्दू शिक्षकों, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन और हज अनुदान} करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं|

यह युद्ध आप नहीं लड़ सकते. क्या आप के पास मेरी गुप्त सहायता करने का साहस है? अयोध्या प्र० त्रिपाठी.

Registration Number is : DARPG/E/2016/12413

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jul 18, 2016, 3:41 PM
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