Muj16W28B JMANT KISLIYE



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 28B,  Jul 08-14, Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com andhttp://www.aryavrt.com Muj16W28B JMANT KISLIYE

||श्री गणेशायेनमः||

उपनिवेशवासियों के न्यायालय में:

FIR ATSPSCR 18/2008 धाराएँ 302, १२०, १५३ आदि.

सरकार बनाम साध्वी प्रज्ञा व अन्य.

मुझे यह जान कर प्रसन्नता हुई कि जज ने मुसलमान अमजद खान की दखल याचिका स्वीकार की है और आशा करता हूँ कि उपनिवेश के जज मेरी भी यह दखल याचिका स्वीकार करने का साहस जुटाएंगे.

साध्वी की ज़मानत ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने प्राथमिक यानी एटीएस की जांच पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। कोर्ट ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यंहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।

उपनिवेशवासी १८ जुलाई, सन १९४७ से ही ब्रिटिश स्वतंत्र? उपनिवेश के बलिपशु हैं. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है, के अधीन जो उपनिवेश का विरोध करेगा, उसकी फांसी पक्की. कोई अपील या दलील नहीं.

यह अधिनियम आक्रांता जारज षष्टम की संस्तुति के बाद ब्रिटिश संसद में पारित हुआ और तब से आज तक लागू है, कोई परिवर्तन हुआ हो तो कानूनविद बताएं. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रोक लिया. देखे कि इनका लक्ष्य क्या है?

उपरोक्त अधिनियम और राष्ट्रीय गान के अनुसार उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के बलिपशु हैं, जिसका लक्ष्य  अर्मागेद्दन द्वारा धरती के सभी प्रजातियों के ईष्टदेवों को मिटाकर केवल ईसा की पंथनिरपेक्ष? पूजा करवानी है.

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का लक्ष्य है|

गांधीवध के बाद भारतीय संविधान का संकलन कर उपनिवेशवासियों पर थोपा गया. जिसका अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को लुप्त करने के लिए संकलित किया गया है. वह भी अत्यंत धूर्तता से. यह अनुच्छेद नरसंहार की कठोर सच्चाई को सीधे नहीं स्वीकार करता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है.

बपतिस्मा व अज़ान ईशनिंदा है. चर्च/मस्जिद से ईसाई/मुसलमान द्वारा अविश्वासियों को कत्ल करने का उपदेश दिया जाता है| ईसाई बपतिस्मा को अस्तित्व के लिए आवश्यक बताता है और मुसलमान काफ़िर को कत्ल करने से जन्नत पाता है. बाइबल, बपतिस्मा और चर्च के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) यानी हर उपनिवेशवासी की मृत्यु पक्की.

भोपाल मीटिंग में मैं भी था. साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त हूँ.

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

यह सच है कि मैं मानवमात्र को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए युद्धरत हूँ. स्वतंत्र जीवन मानवमात्र का जन्मसिद्ध अधिकार है. अब्रह्मी संस्कृतियाँ किसी को जीने का अधिकार नहीं देतीं. ईसाई व मुसलमान दोनों ही मानवजाति का नरसंहार करेंगे. इसलिए चर्च/मस्जिद में विष्फोट करना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है. इसके लिए मैंने ई० सन २००० में ही आर्यावर्त सरकार की स्थापना की है. अपने पुत्र डॉ दिनेश त्रिपाठी को मैंने राजा नियुक्त किया था. जगतगुरु एवं कुलपति स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ के नेतृत्व में मैं उनका राज्याभिषेक करवाना चाहता था. देश उपनिवेश है, इस बात की उपनिवेशवासियों को जानकारी न होने पाए और हो भी जाये तो कोई विरोध न कर पाए, इसीलिए मालेगांव कांड एलिजाबेथ और उसके मातहतों एवं उपकरणों द्वारा कराया गया है.

साध्वी प्रज्ञा जी पर आरोप है कि वे मालेगांव मस्जिद कांड में शामिल थीं. ईशनिंदा और नरसंहार केंद्र मस्जिदों में विष्फोट करा दिया! एलिजाबेथ की बलिपशु बनने से इंकार कर दिया. मैंने भी बाबरी ढांचा गिरवाया. सभी मस्जिद गिराने के लिए प्रयत्नशील हूँ. हमने भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ (प्राइवेट प्रतिरक्षा) के अधिकार का उपयोग किया. लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अनुसार साध्वी या मैंने कोई अपराध नहीं किया है. जमानत किसलिए? सरकार स्पष्टीकरण दे.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) आर्यावर्त सरकार, फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

१४ जुलाई. २०१६

http://pgportal.gov.in      Registration Number is : DARPG/E/2016/12250

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jul 14, 2016, 6:01 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Jul 14, 2016, 5:57 AM
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