Muj16W14 Rashtrpti Shasan



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 14, Apr 01-06, 2016. This issue is Muj16W14 Rashtrpti Shasan


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj16W14 Rashtrpti Shasan

||श्री गणेशायेनमः||

प्रेसनोट

प्रेषक:-

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी पुत्र स्व० श्री बेनी माधव त्रिपाठी, मंगल आश्रम, टिहरी मोड़, मुनी की रेती, टिहरी गढ़वाल, २४९१३७, उत्तराखंड   

पत्र स० 16331RP     Dtd.        Thursday, March 31, 2016

विषय - सिंचाई विभाग उ० ख० द्वारा सर्विस बुक गायब करके १६ वर्षो से तरह तरह के बहाने बताकर मूल मुद्दे से हटकर पत्र व्यवहार में उलझाये रखकर पेंशन व मूल वेतन के बकाये का भुगतान न करना.

यह प्रदेशों का विवाद है. उप्र कहता है कि भुगतान उत्तराखंड करेगा (संलग्नक 2P-ID CEG KA MKD.pdf ) और उत्तराखंड कहता है कि उत्तर प्रदेश. ( 3P-CEG KA RPY 16218.pdf ) मैं भूखों मर रहा हूँ..

संदर्भ: मुख्य अभियंता गढ़वाल द्वारा मुख्य अभियंता एवं विभागाध्यक्ष (कार्मिक अनुभाग), सिचाई विभाग, उत्तराखंड को प्रेषित पत्र स० 918 /मु०अ०/ गढ़वाल/ ई-6/ जी०. दिनांक, 18 फरवरी, 2016.

मुख्यमंत्री कार्यालय का पत्रांक VIP(M)(B)1887/XXXV-1/2016(1) देहरादून – दिनांक २९-०२-२०१६. जो अब अस्तित्व मे नहीं है.

एवं अधिशासी अभियंता का पत्रांक 786/ पी०एम०जी०एस०वाई० सि०ख० श्रीनगर/ अयोध्या प्रसाद/ दिनांक 17/03/2016

सेवा में,

महामहिम श्री पाल महोदय!

Indian Constitution’s Article 156. (1) The Governor shall hold office during the pleasure of the President.

२०वीं सदी के मीरजाफर, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी, पाकिस्तान जिसकी लाश पर बन सकता था, ने इंडिया को ईसाइयत और इस्लाम को सौंप दिया और हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का अपहरण कर लिया. निम्नलिखित अभिलेख के अधीन उपनिवेशवासी आज भी ब्रिटिश स्वतंत्र? उपनिवेश की प्रजा हैं. १९४७ से आज तक उपनिवेशवासी स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने का साहस भी गवां बैठे हैं. क्योंकि उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है और मरना कोई नहीं चाहता.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

एलिजाबेथ, जिसके उपनिवेशवासी बलिपशु हैं, को अर्मागेद्दन द्वारा सभी धर्मों को नष्ट कर केवल ईसा की पूजा करवानी है

https://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

जो भी जज या लोकसेवक ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करता है, नौकरी गवां देता है, अतः मेरे मामले में कोई निर्णय नहीं होता.

http://intellibriefs.blogspot.in/2005/02/imam-and-shankaracharya-not-rule-of.html

बपतिस्मा/अज़ान बाइबल/कुरान, उपनिवेशवाद और संविधान से स्वयं आप भी पीड़ित हैं, मैं १९९१ से आजतक न तो उपनिवेश से मुक्ति ले सका और न बपतिस्मा/अज़ान ही बंद करा पाया.

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा हैधरती को भी दो हिस्सों, दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम, में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद यानी काफिरों की हत्या करने का असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षणपोषण व संवर्धन करता है. यानी मानवमात्र के गले पर रखी तलवार है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), ६०, १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ आदि को मानवजाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है. इस्लाम, ईसाइयत अज़ानमस्जिद और मदरसे तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), राष्ट्रपति और राज्यपाल से प्रायोजित हैं|

उपनिवेश के विरुद्ध कोई बोल न पाए इसीलिए उपरोक्त कानूनों के बल पर तत्कालीन शासकों के नेतृत्व में एलिजाबेथ ने जजों सहित आत्मघाती लुटेरे लोकसेवकों की एक सेना बना रखी है, जो दिए की लौ पर मरने वाले पतिंगों की भांति पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपना जीवन, सम्पत्ति, नारियां, वैदिक सनातन संस्कृति और धरती गवाने में लिप्त हैं. लोकसेवकों को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है.

आर्यावर्त सरकार लुप्त अनुच्छेद ३१ (संपत्ति का मौलिक अधिकार} का पुनर्जीवन और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग) का उन्मूलन चाहती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ का भी उन्मूलन चाहती है| जिस समाजवाद की आड़ में उपनिवेशवासी को लूटा जा रहा है, वह चीन में भी दफन हो चुका है|

अब्रह्मी संस्कृतियों संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियों आज तक विफल नहीं हुईं| जज व उपनिवेशवासी दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन एलिजाबेथ के मनोनीत आतंकवादी और भ्रष्ट राज्यपालों द्वारा शासित हैं|

जिस सरकार को चुनने मे उत्तराखंड के उपनिवेशवासियों को महीनों लगे, उसे आप ने २ दिन मे गिरा दिया. जब कि आप जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं हैं.

आप की स्थिति बलि के बकरे की है, जिसे भलीभांति ज्ञात होता है कि उसे कत्ल होना है, लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता.

माउंटबेटन ने ईसाइयत के लिए अपनी पत्नी एडविना का वैश्यालय खोल लिया. क्या आप वैदिक सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए मुझे पेंशन भी नहीं दिलवा सकते? ताकि मैं आप को बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान से मुक्ति दिला सकूं. आप एलिजाबेथ के गुप्तचरों से घिरे हैं, अतः लड़ नहीं सकते. फिरभी उपनिवेश से मुक्ति के लिए मुझे सहयोग दे सकते हैं.

मेरा मामला पेंशन नियम ६४ या ६९ के अंतर्गत आता है. नियम का निचोड़ नीचे दे रहा हूँ.

“It has, accordingly, been decided that if, in future, service records are found to be incomplete or imperfect at the time of processing and finalizing pension cases, those cases will not be delayed but the officials responsible for the maintenance of the records will be held accountable for any deficiencies, failure or omissions therein, and action will be initiated against them. The Heads of Departments will ensure that these directions are complied with…

“Statements required to be maintained for proper monitoring and reporting system. - In simplifying the procedure with a view to eliminate delays in the payment of superannuation pension and retirement gratuity Government have proceeded on the basis that in spite of every effort imperfections may remain in the records and procedures but that it would be unfair to a retiring Government servant if he had to suffer because of the lapses of those responsible for the proper maintenance of service records. The fact that under the new procedures the presumption will be in favour of the Government servant if the records are incomplete or deficient in any manner underlines the importance of ensuring the proper, regular and timely completion of all the service and accounts records by the offices concerned, so as to  minimise the occasion for making such presumptions…

 “Any case, where payment of pension is delayed, has to be viewed seriously. The causes of delay in such a case have to be identified and remedial steps taken so that such delays should not occur in future. This can only be ensured if the Heads of the Departments will personally scrutinize the statements and issue such directions as they may consider necessary where payments of pensions have been delayed. Any deficiency in the procedure should be brought to the notice of this ministry at the appropriate level so that rules may be amended accordingly.”

मेरे आग्रह दिनांक २८ जुलाई, १९८४ के बाद भी मेरी सेवा पुस्तिका को गायब उत्तराखंड ने किया है, मैंने अपने वेतन और अन्य विवादों के कारण ट्रिब्यूनल में १९८३ में ही याचिका डाल दी थी और मेरी सेवा पुस्तिका को बदले के भावना से गायब किया गया है. ट्रिब्यूनल के निर्णय से ही मेरी १६ वर्ष की सेवाएं सत्यापित हो चुकी हैं.

मेरा आग्रह है कि आप अपने कर्मचारियों को दंडित कीजिए. और मुझे अविलम्ब अनंतिम पेंशन दीजिए.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) आर्यावर्त सरकार, फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

३१ मार्च. २०१६

http://pgportal.gov.in का Registration Number DARPG/E/2016/05240 है.

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

 http://www.aryavrt.com/muj16w14-rashtrpti-shasan


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AyodhyaP Tripathi,
Mar 31, 2016, 1:29 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Mar 31, 2016, 1:29 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Mar 31, 2016, 1:30 AM
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786IDUK.pdf
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AyodhyaP Tripathi,
Mar 31, 2016, 1:30 AM
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