Muj15W12 Apradhi Kaun



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 20 Year 20 ISSUE 12, Mar 27 – Apr 02, 2015. This issue is Muj15W12 Apradhi Kaun


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj15W12 Apradhi Kaun

IN THE COURT OF SH. SANDEEP GUPTA MM ROHINI DISTT. COURTS, DELHI

FIR No. 406/2003 u/s 153A PS NARELA DELHI.

AND

FIR No. 166/2006 u/s 153A & 295A PS NARELA DELHI.

सुनवाई की तारीख़: मई ५, २०१५.

अपराधी कौन?

महामहिम श्री नजीब जंग महोदय,

कृपया मेरे पिछले अंकों Muj15W09Y & 11y Lg 196CrPC का अवलोकन करें.

आतताई एलिजाबेथ

रोनाल्ड रीगन ने कहा था, “स्वतंत्रता के अस्तित्व को मिटने में एक पीढ़ी से अधिक का समय नहीं लगता| इसे हम अपने संतानों के रक्त में प्रवाहित नहीं करते| स्वतंत्रता के लिए लड़ना और इसे सुरक्षित कर भावी पीढ़ी को लड़ने के लिए देना पड़ता है|”

इंडिया को तो स्वतंत्रता मिली ही नहीं! सत्ता के हस्तांतरण के संधि के पूर्व ही आक्रांता अंग्रेजों ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७ को हॉउस ऑफ कामन्स में १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित इंडिया का दो उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को इंडिया बंट गया। गांधी और माउंटबेटन मिलकर उपनिवेशवासियों’ को बेघर, नरसंहार और नारियों का बलात्कार कराते रहे. विवरण नीचे की लिंक पर:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने इंडिया में अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को रोका. विवरण नीचे की लिंक पर:-

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

अतः अपनी खैर मनाइए. आप ईसा को अपना राजा नहीं मानते, अतएव एलिजाबेथ आप को कत्ल करा कर आप का मांस खायेगी और लहू पिएगी.

http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर, मानवमात्र को कत्ल होने के लिए, सदा सदा के लिए हमारी धरती को हमसे छीन कर संयुक्त रूप से हत्यारे, लुटेरे और बलात्कारी दास मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| तभी से इंडिया और पाकिस्तान दोनों उपनिवेश हैं और आप दास. लोकसेवक हों या शासक - सभी लूट, हत्या और बलात्कार में लिप्त हैं.

जो भी उपनिवेश को दासता कहे, उसे तबाह करने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल का मनोनयन किया गया है.

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है

नमो के नेतृत्व में एलिजाबेथ ने राज्यपालों, जजों सहित लोकसेवकों की एक सेना बना रखी है, जो दिए की लौ पर मरने वाले पतिंगों की भांति पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपना जीवन, सम्पत्ति, नारियां, वैदिक सनातन संस्कृति और धरती गवाने में लिप्त हैं. लोकसेवकों को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है.

ईशनिन्दकों और खूनियों को महिमामंडित करने, संरक्षण, वेतन व हज अनुदान देने वाली सरकार अपराधी नहीं, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा करने वाला अपराधी है और उसका उत्पीड़न आज भी जारी है.

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

आतंकवादी जज, जिन्होंने अज़ान को पंथनिरपेक्ष पूजा का बुलावा, चर्च व मस्जिद को पूजा स्थल, बाइबल व कुरान को धर्म पुस्तक और ईसाइयत और इस्लाम को पंथनिरपेक्ष उपासना पद्धति माना, अपराधी नहीं है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). लेकिन आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी सन २००८ से आज तक जेल में इसलिए बंद हैं कि वे अज़ान को ईशनिंदा और मस्जिद को अपराध स्थल मानते हैं और उनको नष्ट कर रहे हैं|

धरती के किसी भी नारी का बलात्कार कराने वाले जेहोवा  (बाइबल, याशयाह १३:१६) व अल्लाह (कुरान २३:६) अपराधी नहीं हैं. इतना ही नहीं - बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह की छूट देने वाला ईसा व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने वाला और ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह करने वाला अल्लाह भी अपराधी नहीं है. लेकिन बिना प्रमाण नरायन दत्त तिवारी, आशाराम बापू, जज स्वतंत्रकुमार और गांगुली स्वघोषित यौन शोषण के अपराधी हैं, विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar 

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँ, “हमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है| हमारा विनाश, यदि आएगा, तो वह दूसरे प्रकार से आएगा| वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही| ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (एलिजाबेथ द्वारा) हथियार बना लिया गया है|” जजों पर विश्वास करके जनता यही कर रही है|

१५ अगस्त १९४७ से आज तक किसी ने, यहाँ तक कि किसी मुसलमान ने भी, भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, चर्च, बपतिस्मा, आदि का विरोध नहीं किया| किसी मौलवी ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध फतवा नहीं दिया और न कोई तालिबानी भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध लड़ा. सब ने अपने आश्रय दाता वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के साथ विश्वासघात किया|

इंडिया और पाकिस्तान की भांति विश्व के ५३ ईसाई व मुसलमान देश आज भी एलिजाबेथ के दास हैं| इंडिया को समाप्त करने के बाद भी मुसलमान व ईसाई एलिजाबेथ के दास ही रहेंगे| वस्तुतः इंडिया को मिटा कर मुसलमान अपना ही अहित करेंगे| उनका हज अनुदान, मुअज्जिनों, इमामों व मौलवियों का वेतन बंद हो जायेगा| उनका वक्फ बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग और मुस्लिम निजी कानून भी बेमानी हो जायेगा| उनको फिरभी एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति नहीं मिलेगी| न अल्लाह मिलेगा और न विशाले सनम| बेचारे मूर्ख मुसलमान (कुरान २:३५).

ईमाम मुसलमानों को आप के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| बदले में सर्वोच्च न्यायालय मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) और ईमामों को आप के कर के पैसे से वेतन दिलवा रहा है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६).

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है| दया के पात्र विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (नमो) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| हम भारतीय संविधान का उन्मूलन करेंगे||

मेरे विरुद्ध अभियोग आप की संस्तुति पर चल रहे हैं. भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन, बिना आप की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में संस्तुति के, अभियोग चल ही नहीं सकता. ईसाई व मुसलमान को वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को कत्ल करने का कानूनी, मजहबी और संवैधानिक अधिकार है और भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा मेरा कानूनी अधिकार है. यदि मेरा अपराध हो सकता है, तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन ही हो सकता है. क्योंकि मैं एलिजाबेथ के उपनिवेश का विरोध कर रहा हूँ. मुझे जज सहजता से फांसी दे सकता है, आप के संस्तुति की कोई आवश्यकता ही नहीं है. फिर आपकी संस्तुति क्यों? लेकिन एलिजाबेथ आप को अपना दास बनाये रखने के लिए मूर्ख बना रही है. एलिजाबेथ आज आप का दोहन हमे मिटाने के लिए कर रही है – कल आप और आप के उम्मा को मिटाएगी.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी: फोन ९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2015/03129

 http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त पंजीकृत न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

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AyodhyaP Tripathi,
Mar 21, 2015, 6:56 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Mar 21, 2015, 6:55 PM
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