Muj14w44 Vayam Rakshami



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 44, Oct 31-Nov 06, 2014. This issue is Muj14w44 Vayam Rakshami


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14w44 Vayam Rakshami

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९()- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भाग मौलिक अधिकार|

एलिजाबेथ के दास राज्यपालों के पुलिस के संरक्षण में मस्जिदों से ईमाम दिन में पांच समय अज़ान द्वारा ईशनिंदा करते हैं और खुतबे देते हैं कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुष्मन हैं| काफिरों को कत्ल कर दो| नारी का बलात्कार या तो मुसलमान करेगा या ईसाई| [भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), (कुरान २३:६) व (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. मंदिर रह नहीं सकता| अन्य धर्मावलम्बी के उपासना स्थल तोड़ना अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों का परम धर्म है| (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३ व कुरान १७:८१).

इन अधिकारों को संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए एलिजाबेथ के मनोनीत राष्ट्रपति व राज्यपाल, विवश हो कर, शपथ लेते हैं| [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९).

पुलिस किसी ईमाम के विरुद्ध सन १८६० से आज तक अभियोग न चला सकी| न राष्ट्रपति और राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति दे सके. राष्ट्रपति, राज्यपाल, जज और लोकसेवक, अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधियों को नष्ट करने के लिए विवश हैं.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() एलिजाबेथ को अपनी ईसाई संस्कृति और हामिद अंसारी को इस्लामी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| लेकिन हम वैदिक पंथियों को, जो विश्व के अल्पसंख्यकों में अल्पसंख्यक हैं, अपनी संस्कृति को बनाये रखने का अधिकार देना प्रेसिडेंट प्रणब दा और राज्यपालों द्वारा लिए गए शपथ भारतीय संविधान की अवहेलना है|

जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) सम्प्रभु मनुष्य को वीर्य हीन कर अधीन करने वाले इन संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीँ भारतीय संविधान का संकलन कर इंडिया संयुक्त रूप से अब्रह्मी संस्कृतियों को सौँप दिया गया है| अभी यह निर्णय नहीं हो पाया है कि धरती पर अब्रह्मी संस्कृतियों में से किसका वर्चस्व रहेगा? अतः मानवजाति का अस्तित्व ही संकट में है.

एलिजाबेथ मंदिर तोड़ना अपराध नहीं मानती| इसीलिए मात्र कश्मीर में १९९२ से आज तक १०८ मंदिरों के तोड़ने की तो आज तक कोई जांच नहीं हुई, लेकिन ४ मस्जिदों में विष्फोट के कारण हम भगवा आतंकवादी हैं| न्यायपालिका असहाय है| जज न्याय करते ही जेल जायेगा| बेचारे लोकसेवक पद, प्रभुता और पेट के लिये नसबंदी करवा कर दास बनते हैं और अपनी ही संस्कृति को मिटाने के लिये विवश हैं|

वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए {अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम निजी कानून व वक्फ}, {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षा, मदरसों, उर्दू शिक्षकों, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन की सुविधा दी गई है. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/)

जजों ने मानवता के हत्यारों जेहोवा व अल्लाह को ईश्वर घोषित कर रखा है. कुरान व बाइबल को धर्मपुस्तक घोषित कर रखा है. जज बाइबल और कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकते| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). ईमाम के लिए आप काफ़िर हैं. इस्लाम है तो काफ़िर नही. हम आप के लिए लड़ रहें हैं और प्रजातंत्र के चारो स्तम्भ अपने सर्वनाश की जड़ चर्चों, मस्जिदों और ईमामों को बचानेके लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं.

इंडिया के संत और कथावाचक वीर्य हीन करने वाली इन संस्कृतियों को ईश्वर तक पहुंचने के अलग अलग मार्ग बताते हैं| पादरी और ईमाम अपने चर्च और मस्जिदों से ईश्वर की निंदा करते हैं और वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के हत्या की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैं. जो विरोध करता है, उसे मिटा दिया जाता है. लेकिन किसी के पास विरोध का साहस नहीं| पद, प्रभुता और पेट के लिये हर लोकसेवक अपने ही सर्वनाश के लिये अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देने के लिये विवश है|

ईसाइयत और इस्लाम संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| लोकसेवक यह न भूलें कि एलिजाबेथ मानवजाति को मिटाने में लिप्त है| अतएव हमारी मुक्ति का मार्ग इस्लाम और ईसाइयत का समूल नाश है| हमें उपनिवेश से मुक्ति लेनी ही पड़ेगी.

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो, तुम पराजित नहीं हो सकते और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है| ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| लोकसेवक अपनी ही सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किये गए हैं| पराधीन लोकसेवक बेबस हैं| एक जेसुइट एलिजाबेथ ने, निर्विरोध, पूरे मानव जाति को वीर्यहीन कर, सबके प्राणों को संकट में डाल कर, अपने अधीन कर रखा है| किसी के पास एलिजाबेथ के विरोध का साहस नहीं!

आईएनए इस भ्रम में न रहे कि वह साध्वी प्रज्ञा को प्रताड़ित कर अब्रह्मी संस्कृतियों से मुक्ति पा जायेगा| जिस पद, प्रभुता और पेट के लिए आईएनए निरीह लोगों को प्रताड़ित कर रहा है, वह बचेगा नहीं| एलिजाबेथ सबसे पहले उनका ही सर्वनाश कराएगी. मेरा कर्तव्य है मानवजाति को आगाह करना. मनुष्य को अपने भले बुरे का निर्णय स्वयं करना है.               सम्पादक.

Registration Number is : DARPG/E/2014/07502

 

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AyodhyaP Tripathi,
Oct 26, 2014, 3:31 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Oct 26, 2014, 3:30 PM
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