Muj14W43Y Chhl



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 43, Oct 24-30, 2014. This issue is Muj14W43Y Chhl


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W43Y Chhl

मुझे अपने पिछले अंक Muj14W42Y AZAAN BND_KRO का उत्तर Closed (NO ACTION REQUIRED) मिल गया है. यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का http://pgportal.gov.in पर DARPG/E/2014/07288 न० व DARPG/E/2014/06762 द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है| अतः नागरिक ईशनिंदा सुनने और कत्ल होने के लिए विवश हैं!

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने १९४७ में मानवजाति को माउंटबेटन के हाथों बेंच दिया. देश पर शासन ब्रिटेन का था, है व तबतक रहेगा जब तक मानवजाति उपनिवेश से मुक्ति नहीं लेती.

किसान सांड़ को वीर्यहीन कर दास बना लेता है और (अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं का प्रयोग कर दास बनाती हैं| परब्रह्म मानवमात्र को हिंदू, यहूदी, ईसाई और मुसलमान में नहीं बाँटता. परब्रह्म, मानवमात्र को जन्म के साथ ही, वीर्य के रुप में अपनी सारी शक्ति देता है। वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, वह शक्ति है, जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्य का जितना अधिक संचय होगा मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा|

http://www.aryavrt.com/

वीर्यरक्षा के लिए ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति निःशुल्क गुरुकुल चलाती थी| गुरुकुलों को त्याग कर अब्रह्मी संस्कृतियाँ महँगी शिक्षा, खतना और यौनशिक्षा द्वारा वीर्य हीन कर (किसान की भांति सांड़ से बैल बना कर) मानवमात्र को दास क्यों बना रही हैं? अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध अपराध कैसे है? अब्रह्मी संस्कृतियों के तथाकथित धूर्त पैगम्बरों मूसा और मोहम्मद ने, जेहोवा और अल्लाह के आड़ में मनुष्य के शक्ति पुंज इसी वीर्य को एन केन प्रकारेण नष्ट कर, वह भी विश्वास के आधार परमजहब का अपरिहार्य कर्म बना कर, मानवमात्र को किसान के बैल की भांति, दास बनाने का घृणित अपराध किया है. ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो जेहोवा व अल्लाह को गढ़ने वाले पैगम्बर व उनके उत्तराधिकारी शासक व पुरोहित हैं.

अब्रह्मी संस्कृतियों के वीर्य हीनता की परम्परा दास बनाने वाला अभिशाप है| मैकाले के स्कूलों के षड्यंत्र के ज्ञान के लिए विश्वामित्र और मेनका की कथा प्रासंगिक है| इंद्र ने वीर्यवान विश्वामित्र को पराजित करने के लिए मेनका का उपयोग किया| मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६) ने तो इंद्र की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं|. एक ओर वैदिक सनातन संस्कृति है और दूसरी ओर (अ)ब्रह्मिक संस्कृति| निर्णय मानवजाति को करना है वह स्वतंत्रता चाहती है या नहीं?

हम काफ़िर लोग अब्रह्मी संस्कृतियों के विरुद्ध युद्ध लड़ रहे हैं| बाइबल, (बाइबल, लूका १९:२७), कुरान (कुरआन ८:१७) और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. इन आतताई संस्कृतियों को क्यों रोका गया है?

बिना प्रमाण तो जज व क़ाज़ी भी निर्णय नहीं करता! फिर भी आप खूनी, लुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को बिना प्रमाण ईश्वर मानने के लिए क्यों विवश कर दिए गए हैं? मूसा द्वारा गढे जेहोवा और मोहम्मद द्वारा गढे अल्लाह ने मानवमात्र को एक दूसरे का जानी शत्रु क्यों बना दिया है? जिस स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने ९० वर्षों तक संघर्ष किया, वह किसी व्यक्ति को कभी मिली ही नहीं और न ईसाइयत और इस्लाम के अस्तित्व में रहते कभी मिल ही सकती है| क्यों कि ईसाई सहित केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने. (बाइबल, लूका १९:२७) और अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९). चुनाव द्वारा भी अपरिवर्तनीय, काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना, जज ने मुसलमानों का मजहबी अधिकार क्यों स्वीकार किया है? (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). ध्यान रहे! २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने यही आजादी दिलाई है!

भारतीय संविधान का संकलन एक धोखा है| इसका संकलन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||)} और राष्ट्रकुल का एक सदस्य भी| स्वतंत्र कोई नहीं|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार क्यों दिया है? आत्म रक्षा हमारा मानवाधिकार है| हम अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं| एलिजाबेथ के उपनिवेश के दासों के पास हमारा उत्पीड़न करने का कोई अधिकार नहीं है| हम मानवमात्र को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए धरती के प्रत्येक मनुष्य से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम धर्मान्तरण के विरोधी हैं. जिसके कारण हमारे सहयोगी दारा सिंह सन १९९९ से जेल में हैं. इस्लाम विरोधी हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| जिसके कारण अपने ८ अन्य सहयोगियों सहित साध्वी प्रज्ञा सन २००८ से व धनंजय देसाई को इसी वर्ष से आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके जिए तो शासकों का दास बनकर|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2014/07493

 

ĉ
AyodhyaP Tripathi,
Oct 26, 2014, 9:51 AM
Ċ
AyodhyaP Tripathi,
Oct 26, 2014, 9:50 AM
Comments