Muj14W41A SADHVI PRAGYA



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 41A, Oct 10-16, 2014. This issue is Muj14W41A SADHVI PRAGYA


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W41A SADHVI PRAGYA

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महामहिम जी!

क्या आपको आतताइयों की दासता करने में लज्जा नहीं आती? क्या धरती पर मानवजाति बचेगी?

हम स्वयं अपने शत्रु हैं.

मानवजाति अपने शक्ति के मूल स्रोत से ही काट दी गई है. परब्रह्म यहूदी, ईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| उसको परब्रह्म से जन्म के साथ ही प्राप्त, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, सर्वशक्तिमानसर्वज्ञसर्व-व्याप्तवीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, वह शक्ति है, जिससे सब कुछयहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्य का जितना अधिक संचय होगा मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा| प्रमाण हेतु नीचे की लिंक क्लिक करें:-

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अब्रह्मी संस्कृतियों के तथाकथित पैगम्बरों मूसा और मोहम्मद ने जेहोवा और अल्लाह के आड़ में मनुष्य के शक्ति पुंज इसी वीर्य को एन केन प्रकारेण छीनने का घृणित अपराध किया. ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो जेहोवा व अल्लाह को गढ़ने वाले पैगम्बर और उनके उत्तराधिकारी शासक और पुरोहित हैं.

सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमीं से हमारे वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुलगौगंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है|

क्या आप उपनिवेश, बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं?

क्या आप अपने बेटे को निःशुल्क गुरुकुल में ब्रह्मज्ञान की शिक्षा दिला सकते हैं?

क्या किसान बैल से खेती कर सकता है?

क्या आप गंगामें गंदेनालों को जोड़ने से रोक सकते हैं?

क्या आप वेदों की माता गायत्री का जप करते हैं?

हम कश्मीर के लिए लड़ते हैं- लेकिन उपनिवेश से मुक्ति के लिए नहीं! हम गौरक्षा के लिए गोलियाँ खाते हैं - लेकिन धरती के सबसे बड़े गौ हत्यारे, गांधी को पूजते हैं! [http://www.aryavrt. com/gau-hatyara-gandhi इस्लामी राज्यों में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध था. भारत में गौ हत्या लैंसडाउन नामक अँगरेज़ ने शुरू कराई और गांधी ने जारी रखा. लेकिन हम गांधी व ब्रिटिश उपनिवेश के विरोधी नहीं हैं? http://www.aryavrt.com/judgment-gohatya-2005], २०वीं सदी के मीरजाफर, पाकपिता, राष्ट्रहंता, बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने अपने अन्य सहयोगी बैरिस्टरों के साथ मिल कर माउंटबेटन से सत्ता के हस्तांतरण का समझौता कर, मानवमात्र के नरसंहारक अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायीयों को बसाने का जघन्य अपराध किया है. भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम१९४७. तब से आज तक तमाम न्यायविद हुए, लेकिन किसी ने उपनिवेश का विरोध नहीं किया.

http://www.aryavrt.com/upniveshke-viruddhyuddh-muj14w24

http://www.aryavrt.com/muj14w32-15agst_ka-bahishkar_karen

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. यानी संवैधानिक अधिकार से स्वयं ईसाई व मुसलमान भी एक दूसरे को कत्ल करेंगे. यानी कि इनसे मानवजाति के अस्तित्व को संकट है.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अविश्वासियों का नरसंहार कराने के लिए, ईसाई व मुसलमान दोनों को अपने लूट, हत्या और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है.

क्या किसी ने सोचा कि वैदिक सनातन संस्कृति को बनाये रखने के लिए भारतीय संविधान में कौन सा अनुच्छेद है? उपरोक्त कथन के अनुसार वैदिक सनातन संस्कृति को धरती पर रहने ही नहीं दिया जायेगा?

प्रज्ञा सहित आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी सन २००८ से जेलों में चर्च, मस्जिद, बपतिस्मा, खुत्बे, अज़ान और नमाज़, जो भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध हैं, का विरोध करने के कारण बंद हैं. साध्वी की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है व उनको दवा के आड़ में जहर दिया जा रहा है, वे अब कैंसर से पीड़ित हैं.

काफ़िर ईशनिंदा और कत्ल होने की धमकियां सुनने के लिए विवश हैं. विरोध करने के कारण मैं ४२ बार जेल गया हूँ. ५० अभियोग चले हैं. ५ आज भी लम्बित हैं. मैं २ अरब रु० की सम्पत्ति का स्वामी हूँ. मेरे पक्ष में सन १९८९ के बाद से ही कई निर्णय भी है. लेकिन मेरी सारी सम्पत्ति सरकार ने लूट ली है. क्यों कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) किसी नागरिक को सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का अधिकार नहीं देता. जिन लोकसेवकों ने मेरी सम्पत्ति लूटी है, उनके विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के संरक्षण के कारण मैं शिकायत न कर सका और न जज अपराधी लोकसेवकों का कुछ बिगाड़ सके. मैं लोकसेवक भी हूँ. पक्ष में निर्णय रखने के बाद भी मुझे पेंशन नहीं मिलती.

जब कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत, अब्रह्मी संस्कृतियों को पद, प्रभुता और पेट के लोभ में, राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों के अधीन संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत शपथ द्वारा, विवश कर दिए गए हैं|

पुलिस के संरक्षण में, मस्जिदों से काफिरों के आराध्य देवों की ईश निंदा की जाती है, जिसे अज़ान और नमाज़ कहा जाता है और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे यानी उपदेश दिए जाते हैं. बदले में मुसलमानों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से हज अनुदान (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/) और वेतन (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) दिया जाता है.

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान पर किसी का जोर नहीं! जज भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ लेते हैं और राष्ट्रपति और राज्यपाल इनके संरक्षणपोषण व संवर्धन की! कोई जज बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान के विरुद्ध सुनवाई ही नहीं कर सकता! (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४)

http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

चर्च से घोषणा की जाती है, “केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार हैजो ईसा का दास बने| (बाइबललूका १९:२७). क्या मानवमात्र से स्वराज्य का अधिकार छीनने वाले इस तथाकथित दयालु जारज और प्रेत ईसा को धरती पर अपनी पूजा कराने का अधिकार है?

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद और असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार है|

मुसलमानों ने सउदी अरब, इराक और अफगानिस्तान से कोई सबक नहीं सीखा| हिंदू मुसलमानों को कत्ल नहीं करेंगे. लेकिन एलिजाबेथ ईसा के आदेश (बाइबल, लूका १९:२७) से अभी हिंदुओं को मरवा रही है| जब हिंदू मिट जायेंगे तो मुसलमानों की बारी आएगी| अपने असली शत्रु को पहचानें मुसलमान! प्रमाण ऊपर है,

http://www.aryavrt.com/muj14w33-smjhauta

http://www.aryavrt.com/muj14w40y-gambhir-prashna

इंडिया और पाकिस्तान सहित ५३ देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं. उपनिवेश से मुक्ति की मांग और मस्जिद, अज़ान और नमाज़ का विरोध राजद्रोह है.

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

मेरा धरती के सभी शासकों, जजों, पूँजी पतियों, व्यवसायियों, उद्योगपतियों और राज्याध्यक्षों से आग्रह है कि वे साध्वी प्रज्ञा और मुझको भूल जाएँ. अपने और अपने संततियों की चिंता करें. याद रखें! यह युद्ध मात्र आर्यावर्त सरकार लड़ सकती है. वे चाहें और हमारी सहायता करें तो उनकी रक्षा के लिए हम यह युद्ध लड़ने के लिए तैयार हैं. हम सुभाष की भांति खून नहीं मांग रहे, मात्र धन और जन मांग रहे हैं.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2014/06934

 

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AyodhyaP Tripathi,
Oct 10, 2014, 11:08 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Oct 10, 2014, 11:06 AM
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