Muj14W40Y GAMBHIR PRASHNA



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 40, Oct 03-09, 2014. This issue is Muj14W40Y GAMBHIR PRASHNA


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W40Y GAMBHIR PRASHNA

मानवजाति अपने शक्ति के मूल स्रोत से ही काट दी गई है. परब्रह्म यहूदी, ईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| उसको परब्रह्म से जन्म के साथ ही प्राप्त, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, सर्वशक्तिमानसर्वज्ञसर्व-व्याप्तवीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, वह शक्ति है, जिससे सब कुछयहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्य का जितना अधिक संचय होगा मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा| मल ही बल है और वीर्य ही जीवन| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

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अब्रह्मी संस्कृतियां ईश्वर तक पहुंचने के विभिन्न मार्ग नहीं, मानवमात्र को ईश्वर से दूर करने के मार्ग हैं. हमारा पहला प्रश्न यह है कि इंडिया में अब्रह्मी संस्कृतियां क्यों रोकी गई हैं?

अब्रह्मी संस्कृतियों के तथाकथित पैगम्बरों मूसा और मोहम्मद ने, जेहोवा और अल्लाह के आड़ में मनुष्य के शक्ति पुंज इसी वीर्य को एन केन प्रकारेण छीन कर, किसान के बैल की भांति, दास बनाने का घृणित अपराध किया. ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो जेहोवा व अल्लाह को गढ़ने वाले पैगम्बर और उनके उत्तराधिकारी शासक और पुरोहित हैं.

इंद्र ने विश्वामित्र को परास्त करने के लिए मेनका का उपयोग किया. पैगम्बरों ने धरती की सभी नारियां अपने अनुयायियों को सौंप दी हैं.

नमो सहित इंडियन नागरिक ब्रिटिश उपनिवेश के अधिकारहीन दास हैं| {भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. क्या नमो को एलिजाबेथ की दासता से मुक्ति नहीं लेना चाहिए?

चर्च से घोषणा की जाती है, “केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार हैजो ईसा का दास बने| (बाइबललूका १९:२७). क्या मानवमात्र से स्वराज्य का अधिकार छीनने वाले जारज और प्रेत ईसा को धरती पर रहने का अधिकार है?

स्वर्ग उन्हें ही मिलेगा, जो बपतिस्मा ले| एलिजाबेथ के साम्राज्य विस्तारवादी प्रेत और जारज ईसा को अर्मगेद्दन द्वारा धरती पर केवल अपनी पूजा करानी हैक्या यही उपासना की आज़ादी है?

मस्जिदों से मुअज्ज़िन/ईमाम काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं और हर शुक्रवार को काफिरों को कत्ल करने की मुसलमानों को शिक्षा देते हैं. क्या मस्जिद और अज़ान बंद नहीं होने चाहियें?

मकतबों के मौलवियों को, जो काफिरों को कत्ल करने और नारी बलात्कार की शिक्षा देते हैं, सरकार वेतन देती है. स्कूलों में उर्दू अध्यापकों की नियुक्ति की गई है, जब कि उर्दू और अंग्रेजी में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ हैं. क्या धरती की सबसे समृद्ध, वैज्ञानिक और गणक (computer) के लिए सबसे उपयुक्त संस्कृत भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति और निःशुल्क शिक्षा देने वाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित नहीं किया जाना चाहिए?

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद और असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार है| [भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)].

पुलिस संरक्षण में मस्जिदों से प्रतिदिन ५ बार नियमित रूप से और नियमित समय पर लाउडस्पीकर पर अज़ान यानी ईशनिंदा का प्रसारण किया जाता है और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं| काफिरों को अज़ान और कलिमाद्वारा चेतावनी दी जाती है, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “केवल अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|”

अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन - दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ से प्राप्त एकाधिकार के अंतर्गत, पद, प्रभुता और पेट के लोभ में, राष्ट्रपति और राज्यपाल [भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ लेने के कारण] जेल भेजवाने के लिए विवश हैं. कोई जज कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

क्या मस्जिद, अज़ान, नमाज़ और खुत्बों के विरोधियों को मिटाने वाले उपरोक्त अनुच्छेद १५९ व ६० और धारा १९६ समाप्त नहीं होने चाहियें?

क्या आप को नहीं लगता कि वैदिक सनातन संस्कृति के बचने के सारे मार्ग बंद कर दिए गए हैं? क्या भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), जो इन आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी लूट, मार और नारी बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है, नहीं निरस्त होना चाहिए? क्या अज़ान, नमाज़ और खुत्बों को संरक्षण देने वाली भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए?

और अंत में यह भी बता दूं कि इंडिया में इस्लाम और ईसाइयत को मानवजाति के नरसंहार के लिए रखा गया है. जब कि इन संस्कृतियों को धरती पर रहने का अधिकार ही नहीं है| इमाम अज़ान, नमाज़ और खुत्बों द्वारा प्रतिदिन आप व विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी अविश्वासियों के हत्या कीनारियों के बलात्कार कीलूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैंफिरभी राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी शासकों ने भय वश नहींबल्कि मानवमात्र को दास बनाने के रणनीति के अंतर्गतअपना जीवनधननारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैंअब्रह्मी संस्कृतियों का कोई आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता. चाहे वह आसमा बिन्त मरवान होंया अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी होंया तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैंविशेष नीचे लिंक पर:-

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

यह भी जान लें कि उपरोक्त सच्चाइयों को लिखने के कारण ही मैं ४२ बार जेल गया हूँ. अब तक मुझ पर ५० अभियोग चले हैं, जिनमे से ५ आज भी लम्बित हैं. मेरे ९ सहयोगी मालेगांव मस्जिद बम कांड व अन्य आरोपों में सन २००८ से जेलों में हैं. अतएव उपरोक्त सच्चाइयों को लिखने का किसी के पास साहस नहीं है. मैं इसलिए लिख पा रहा हूँ, क्यों कि मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है और मुझे मरने से भय नहीं है. यह युद्ध हमारे अतिरिक्त कोई नहीं लड़ सकता. जिसे अपना कल्याण चाहिए, हमारी सहायता करे.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2014/06762

 

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AyodhyaP Tripathi,
Oct 4, 2014, 1:05 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Oct 4, 2014, 1:03 PM
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