Muj14W39 RAJDEEP SCANDAL



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 39, Sep 26-Oct 02, 2014. This issue is Muj14W39 RAJDEEP SCANDAL


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W39 RAJDEEP SCANDAL

राजदीप प्रकरण

https://www.youtube.com/watch?v=54xGasucqAc 

चर्च से घोषणा की जाती है, “केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार हैजो ईसा का दास बने| (बाइबललूका १९:२७). स्वर्ग उन्हें ही मिलेगा, जो बपतिस्मा ले| एलिजाबेथ के साम्राज्य विस्तारवादी ईसा को अर्मगेद्दन द्वारा धरती पर केवल अपनी पूजा करानी है

मस्जिदों से प्रतिदिन ५ बार नियमित रूप से और नियमित समय पर लाउडस्पीकर पर अज़ान यानी ईशनिंदा का प्रसारण किया जाता है और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं| काफिरों को अज़ान और कलिमाद्वारा चेतावनी दी जाती है, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “केवल अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|” अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन - दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश हैं.

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके साम्राज्य विस्तारवादी खूनी इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा हैधरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद और असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार है| (भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहींइनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर,कलकत्ता१९८५प१०४).इतना ही नहीं इमामों को वेतन का (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) और हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/). क्या   उपरोक्त घोषणायें पंथनिरपेक्ष हैं? जब आप चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का १९४७ से आज तक विरोध न कर सके, तो राजदीप का विरोध करने का आप को अधिकार कहाँ है?

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने इंडिया में इस्लाम और ईसाइयत को मजहब के आधार पर देश का बंटवारा करने के बाद भी रखा और जिन्ना के सुझाव के बाद भी इंडिया से मुसलमानों को जाने नहीं दिया! तब हमने विरोध क्यों नहीं किया? फिर राजदीप का विरोध क्यों?

गांधी ने इनको मानवजाति के नरसंहार के लिए रखा है. जब कि इन संस्कृतियों को धरती पर रहने का अधिकार ही नहीं है| इमाम अज़ान, नमाज़ और खुत्बों द्वारा प्रतिदिन आप व विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी अविश्वासियों के हत्या कीनारियों के बलात्कार कीलूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैं और राष्ट्रपति ओबामा सहित धरती के प्रत्येक काफ़िर  ने भय वश नहींबल्कि मानवमात्र को दास बनाने के रणनीति के अंतर्गतअपना जीवनधननारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैंराजदीप देसाई मूल समस्या के एक मामूली हिस्से हैं. क्यों कि अब्रह्मी संस्कृतियों का कोई आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता. चाहे वह आसमा बिन्त मरवान होंया अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी होंया तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैंलिंकें देखें:-

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

अब्रह्मी संस्कृतियों की वीर्य हीनता का मजहब मानवमात्र को दास बनाने वाला अभिशाप है| मानवमात्र को वीर्य हीन बनाने वाली आतताई संस्कृतियों को हम धरतीपर क्यों रहने दे रहे हैं?

अब्रह्मी संस्कृतियाँ अपने अनुयायियों की ही शत्रु हैं. मनुष्य के ईश्वरीय शक्ति के मूल स्रोत वीर्य को नष्ट करना धूर्त पैगम्बरों ने मजहब का अपरिहार्य कर्म बना रखा है, वह भी विश्वास के आधार पर. बिना प्रमाण तो जज व क़ाज़ी भी निर्णय नहीं करता! फिरभी आप खूनीलुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को बिना प्रमाण ईश्वर मानने के लिए विवश कर दिए गए हैं?

येहोवा, ईसा और मुहम्मद मनुष्य को वीर्य हीन कर दास बनाने के लिए गढ़े गए हैं| जहाँ वैदिक सनातन संस्कृति के गुरुकुलों में निःशुल्क वीर्यरक्षा की शिक्षा दी जाती है, वहीं मैकाले के स्कूल महंगी यौनशिक्षा देते हैं और मकतब कत्ल करने और नारी बलात्कार की| हम विरोध क्यों नहीं करते? हमारी मुक्ति का मार्ग, हमारे गुरुकुलों का पुनर्जीवन है| मकतबों को सरकारी सहायता और उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति, गुरुकुलों को सहायता व संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति क्यों नहीं?

दासता से मुक्ति, चरित्र, दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहें तो निःशुल्क ब्रह्मचारी बनाने वाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित करें| क्यों कि गुरुकुल वीर्यवान ब्रह्मचारी बनाते हैं. एक ब्रह्मचारी इस्लाम से निपटने के लिए काफी है.

http://www.aryavrt.com/

भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है| दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करिये|

पहले साध्वी प्रज्ञा व उनके ८ अन्य सहयोगियों को जेल से मुक्त करने में हमें सहयोग दीजिए. आप ही नहीं, पाकिस्तान सहित ५२ अन्य देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं, हम मानवजाति को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए लड़ रहे हैं. क्या आप हमें सहयोग दे सकते हैं?

राजदीप जैसे लोगों को अब्रह्मी संस्कृतियों के षड्यंत्र से आप का ध्यान हटाने के लिए लगाया जाता है. नमो के पास समझ नहीं है, अब दुनियां आगे निकल चुकी है. नमो को निज हित में ईसाइयत और इस्लाम से मुक्ति लेनी चाहिए.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१ 

Your Registration Number is : DARPG/E/2014/06715 

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AyodhyaP Tripathi,
Oct 2, 2014, 11:30 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Oct 2, 2014, 11:29 AM
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