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मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 37DHy, Sep 12-18, 2014. This issue is Muj14W37DHy Art29IC


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



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विषय; प्राथमिकी ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला दिल्ली, रोहिणी के MM वि० श्री संदीप गुप्ता के न्यायालय में लम्बित.

संदर्भ: मौत का फंदा अनु० २९(१)

न्यायमूर्ति सुश्री जी० रोहिणी जी,

आप ही बताइए कि क्या आप को किसी शत्रु की आवश्यकता है?

प्रत्येक व्यक्ति को परब्रह्म द्वारा, उसके जन्म के साथ ही दिया गया वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। यहाँ विश्वामित्र और मेनका की कथा प्रासंगिक है| इंद्र ने वीर्यवान विश्वामित्र को पराजित करने के लिए मेनका का उपयोग किया| मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६) ने तो इंद्र की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं|. इतना ही नहीं, ईसा ने बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह की छूट दी है| अल्लाह ने मुहम्मद का निकाह उसकी पुत्रवधू जैनब (कुरान, ३३:३७-३८) से किया और ५२ वर्ष के आयु में ६ वर्ष की आयशा से भी मोहम्मद का निकाह किया| अब्रह्मी संस्कृतियां खतना, वैश्यावृति का सम्मान, कामुक सुख, समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कौटुम्बिक व्यभिचार, कुमारी माओं के महिमामंडन आदि द्वारा संप्रभु मनुष्य के इसी वीर्य को नष्ट कर उसे दास व रुग्ण बना चुकी हैं| संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५()]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”].

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. अतः जज हत्यारे हैं.

एक ओर ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति है और दूसरी ओर (अ)ब्रह्मिक संस्कृति| ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति वीर्यरक्षा यानी मानव के आरोग्य, ओज, तेज, स्मृति और परमानंद की प्राप्ति के लिये निःशुल्क गुरुकुल चलाती थी और (अ)ब्रह्मिक संस्कृति महँगी शिक्षा व्यवस्था लाद कर खतना और यौनशिक्षा द्वारा मानवमात्र को वीर्यहीन कर (किसान की भांति सांड़ से बैल बना कर) दास बना रही हैं| क्या आप मैकाले के शिक्षा पद्धति का बहिष्कार कर सकती हैं?

मानवजाति की समस्या ईसाई व मुसलमान नहीं अब्रह्मी संस्कृतियाँ हैं| अतएव अब्रह्मी संस्कृतियों को समाप्त करना ही मानवजाति के अस्तित्व को बचाने का एक मात्र मार्ग है| अब्रह्मी संस्कृतियों को धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है, जब कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को अपनी लूट, हत्या और बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भा०सं० का अनुच्छेद २९(१) भाग ३ मौलिक अधिकार|

राज्यपालों और प्रेसिडेंट को अब्रह्मी संस्कृतियों के संरक्षणपोषण व संवर्धन का क्रमशः अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत भार सौंपा गया है| लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनाई गई है| जो भी लूट व अज़ान का विरोध करे उसे उत्पीड़ित करने की भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत व्यवस्था की गई है| 

अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों द्वारा भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन किये जाने वाले अपराधों को संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल, पद, प्रभुता और पेट के लोभ में, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ लेने के लिए विवश हैंइन्हीं धाराओं के अधीन उपरोक्त धारा १९६ को लागू कर अब तक मेरे विरुद्ध ५० अभियोग चले| ५ आज भी लम्बित हैं|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान को, मानव जाति की रक्षा के लिए, नष्ट करना चाहते हैं, जबकि दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है| वर्तमान परिस्थितियों में एलिजाबेथ द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोक सेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (एलिजाबेथ के दासों) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए अब्रह्मी संस्कृतियाँ. उपनिवेश व भारतीय संविधान उत्तरदायी है| भारतीय संविधान ने प्रजातंत्र के चारो स्तंभ के लोगों के पद, प्रभुता और पेट को आत्मघात व वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है|

आप ने आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी धर्मान्तरण, लूट, हत्या और बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का अधिकार देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ को बनाये रखने की शपथ ली है. आप अपने ही जीवन, सम्मान और सम्पत्ति की रक्षा नहीं कर सकतीं, वादकारियों का भला कैसे करेंगी?

हम मानवजाति की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं और आप इतनी मूर्ख हैं कि अपने ही शत्रु लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों को बचाने के लिए हमें मिटा रही हैं. निज हित में हमारी सहायता करें.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : GNCTD/E/2014/05331

 

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AyodhyaP Tripathi,
Sep 15, 2014, 12:19 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 15, 2014, 12:17 AM
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