Muj14W36D CrPC 196



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 36D, Sep 05-11, 2014. This issue is Muj14W36D CrPC 196


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W36D CrPC 196

विषय; प्राथमिकी ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला दिल्ली, रोहिणी के MM वि० श्री संदीप गुप्ता के न्यायालय में लम्बित.

संदर्भ: मौत का फंदा धारा १९६

इस्लाम और ईसाइयत का विरोध करने के कारण, उप राज्यपाल दिल्ली की संस्तुति पर, हमारे विरुद्ध दो अभियोग प्राथमिकी ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला दिल्ली, रोहिणी के MM वि० श्री संदीप गुप्ता के न्यायालय में लम्बित हैं|

अब्रह्मी संस्कृतियाँ मानवमात्र को नपुंसक व दास बनाने की अपराधिनी हैं. पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. अब्रह्मी संस्कृतियाँ धरती के किसी भी व्यक्ति को जीने व धन रखने का अधिकार नहीं देती हैं.

हमारे पूर्वजों के साथ छल किया गया है. इंडियन उपनिवेश को समझौते में २०वीं सदी का मीरजाफर (गांधी) माउंटबेटन को सौंप गया है. हम आज भी एलिजाबेथ के दास हैं और मानवमात्र को स्वतंत्र करना चाहते हैं.

http://www.aryavrt.com/muj14w36a-isis-jihad-1

हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हमारे अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट के अभियुक्त हैं और २००८ से जेलों में बंद हैं| हमने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है| टाइम्स आफ इंडिया के अनुसार स्वराज्य का गठन अपराध है| मनुष्य के पुत्र का मांस खाने वाली और लहू पीने वाली एलिजाबेथ (बाइबल, यूहन्ना :५३) द्वारा हम उपरोक्त कारणों से सताए जा रहे हैं. पढ़िये नीचे की लिंक,

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

http://www.aryavrt.com/

जिस भवन से ईशनिंदा का प्रसारण होता हो और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती हो, उसे नष्ट करना अपराध कैसे है? धरती पर शासन अब्रह्मी संस्कृतियों का ही है. किसी शासक ने विश्वासियों के कत्ल, नारी बलात्कार, धर्मान्तरण, जिसके विरुद्ध इस्लाम और ईसाइयत में कत्ल का आदेश है, व लूट पर ऊँगली क्यों नहीं उठाई?

http://www.aryavrt.com/dharmantarana-dhokha-hai

निम्नलिखित लिंकों के अनुसार हमने जजों, संघ व राज्य सरकार को अनगिनत पत्र लिखे हैं, लेकिन न तो हमारे ९+ अधिकारियों को छोड़ा जा रहा है और न ही हमारे विरुद्ध झूठे अभियोग वापस लिए जा रहे हैं.

http://www.aryavrt.com/muj14w29-dpskdhara-196

http://www.aryavrt.com/crpc196-recall-14801

http://www.aryavrt.com/crpc196kii-vivashta-13o15

http://www.aryavrt.com/dhara-196-crpc

http://www.aryavrt.com/dhara-196-muj14w27a

http://www.aryavrt.com/dhara-196-muj14w28

http://www.aryavrt.com/muj13w02-enbw

http://www.aryavrt.com/muj13w08-enbwy

http://www.aryavrt.com/muj13w15-dhara-196

http://www.aryavrt.com/muj13w16-dhara-153_196

http://www.aryavrt.com/muj13w24-dhara196

http://www.aryavrt.com/muj13w45-dhara196-crpc

http://www.aryavrt.com/muj14w29c-dhara-196crpc

http://www.aryavrt.com/muj14w33ay-dhara-196crpc

NBW के बाद ३०-१-१४ को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ८२ के अधीन कार्यवाही भी हो गई|

बाइबल, लूका १९:२७ का आदेश है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|". उपनिवेश का प्रत्येक शासक एलिजाबेथ का दास है. एलिजाबेथ ने शासकों का मनोनयन जातिसंहार के लिए किया है| सनातनियों के संहार के बाद मुसलमानों और गैर कैथोलिक ईसाइयों का जातिसंहार होगा|

ईसाई व मुसलमान को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| सरकार के पुलिस के संरक्षण में मस्जिदों से ईमाम दिन में पांच समय अज़ान द्वारा स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि मात्र अल्लाह पूज्य है (यह ईशनिंदा है और इसके लिए इस्लाम में मृत्युदंड निर्धारित है) और मस्जिदों से ईमाम शुक्रवार को मुसलमानों को शिक्षा/खुतबे देते हैं कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुष्मन हैं| (कुरान ४:१०१). काफिरों को कत्ल कर दो| अज़ान और मस्जिद से दिए जाने वाले खुतबों के विरुद्ध काफ़िर शिकायत नहीं कर सकते और न जज सुनवाई कर सकता है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). पुलिस किसी ईमाम के विरुद्ध आज तक अभियोग न चला सकी| अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों को नारियों का बलात्कार करने का अधिकार ईसाइयत (बाइबल, यश्याह १३:१५), इस्लाम (कुरान २३:६) और लोकतन्त्रीय भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| इस असीमित मौलिक मजहबी अधिकार को संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए एलिजाबेथ के मनोनीत राष्ट्रपति व राज्यपाल, विवश हो कर, शपथ लेते हैं| (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९). इनको संरक्षणपोषण व संवर्धन देने का, राष्ट्रपति और राज्यपालों को, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत, उत्तरदायित्व दिया गया है| लोकसेवक या जज भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ और कुरान के आगे विवश हैं! यह लोग तभी तक नौकरी या शासन करेंगे, जब तक एलिजाबेथ का हित साधेंगे - यानी ईसा के राज्य का संरक्षणपोषण व संवर्धन करते रहेंगे|

मानवजाति को बचाने का उपाय मात्र इस्लाम और ईसाइयत का समूल नाश है. स्वतंत्रता की यह लड़ाई मात्र हमारी नहीं है, यह अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों की भी है. जितने संकट में वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी हैं, उससे अधिक आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी हैं. निर्णय लोकसेवकों के हाथों में.

लोकसेवक, राष्ट्रपति और राज्यपाल एलिजाबेथ के मातहत और उपकरण बन कर रह गए हैं. हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी हैं| हमारा कथन है कि भारतीय संविधान मानव जाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है| यदि आप अपनी, अपने देश व अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ अब्रह्मी संस्कृतियों को, निजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए| दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है| वर्तमान परिस्थितियों में एलिजाबेथ द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोक सेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (एलिजाबेथ के दासों) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए उपनिवेश व संविधान उत्तरदायी है| संविधान ने इनकी पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

११ सितम्बर. २०१४य

Registration Number is : GNCTD/E/2014/05241


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AyodhyaP Tripathi,
Sep 11, 2014, 7:09 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 11, 2014, 7:08 AM
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