Muj14W36C ABRAHMI SANSKRITIYAN



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 36C, Sep 05-11, 2014. This issue is Muj14W36C ABRAHMI SANSKRITIYAN


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W36C ABRAHMI SANSKRITIYAN

अब्रह्मी संस्कृतियाँ वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए.

अमेरिकी स्वतंत्रता के घोषणापत्र के लेखक जेफरसन का सिद्धांत है, “"हम इन सिद्धांतों को स्वयंसिद्ध मानते हैं कि सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं और उन्हें अपने स्रष्टा द्वारा कुछ अविच्छिन्न अधिकार मिले हैं। जीवन, स्वतंत्रता और सुख की खोज इन्हीं अधिकारों में है। इन अधिकारों की प्राप्ति के लिए समाज में सरकारों की स्थापना हुई जिन्होंने अपनी न्यायोचित सत्ता शासित की स्वीकृति से ग्रहण की। जब कभी कोई सरकार इन उद्देश्यों पर कुठाराघात करती है तो जनता को यह अधिकार है कि वह उसे बदल दे या उसे समाप्त कर नई सरकार स्थापित करे जो ऐसे सिद्धांतों पर आधारित हो और जिसकी शक्ति का संगठन इस प्रकार किया जाए कि जनता को विश्वास हो जाए कि उनकी सुरक्षा और सुख निश्चित हैं।"

ठीक इसके विपरीत वैदिक सनातन संस्कृति का सिद्धांत है, परब्रह्म से शिशु को जन्म के साथ ही प्राप्त अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता वीर्य सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। अब्रह्मी संस्कृतियों के जेहोवा और अल्लाह के आड़ में तथाकथित पैगम्बरों ने मनुष्य के ईश्वर रुपी इसी वीर्य को छीनने का घृणित अपराध किया है. लूट और यौन सुख के लोभ में मनुष्य स्वयं अपराध में लिप्त है. बाइबल में वीर्यहीन बनना मजहब का आवश्यक कृत्य है. प्रमाण देखिये,

और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.” (बाइबल, उत्पत्ति १७:११)

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

अनैतिक पुत्र ईसा को जन्म देने वाली मरियम पूजनीय है और ईसा यहोवा का घोषित एकलौता पुत्र है| स्वयं शूली पर चढ़ने से न बचा सका फिर भी सबका मुक्तिदाता है|

यद्यपि बाइबल में खतना करने की स्पष्ट आज्ञा है, तथापि इस्लाम में खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह (रिवाज) है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य विचार यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त नहीं है. फिर भी मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से खतना कराते हैं.

संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५()]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”].

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

किसी भी हरे भरे वृक्ष को नष्ट करने के लिए एक गिद्ध का निवास ही पर्याप्त है| इसी प्रकार किसी भी संस्कृति को मिटाने के लिए एक मुसलमान या ईसाई का निवास पर्याप्त है| अकेला कोलम्बस अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया| अकेला मैकाले संस्कृत भाषा और गुरुकुलों को निगल गया| अकेला मुहम्मद अपने आश्रय दाता यहूदियों के तीन प्रजातियों बनू कैनुका, बनू नजीर और बनू कुरेज़ा को निगल गया|

२३ जून, सन १७५७ में राबर्ट क्लाइव ने मीरजाफर, नवाब के तीन सेनानायक, उसके दरबारी, तथा राज्य के अमीर जगत सेठ आदि से दुरभिसंधि की और १५ अगस्त १९४७ को माउंटबेटन ने बैरिस्टरों पाकपिता - राष्ट्रहंता मोहनदास करमचन्द गांधी, जिन्ना, खान जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभभाई पटेल, अम्बेडकर आदि के साथ दुरभिसंधि की. जिसका, तब से आज तक, कोई न्यायविद विरोध नहीं करता.

“मैं बातों में विश्वास नहीं करता, प्रयत्न में विश्वास करता हूँ. मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है और मालेगांव का अभियुक्त भी हूँ. मात्र ४२ बार जेल जा चुका हूँ. मरने से नहीं डरता.

“यह संस्कृतियों का युद्ध है. मैं बहुत कुछ करना और लिखना चाहता हूँ. लेकिन, अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए, मेरी लगभग २ अरब की सम्पत्ति एलिजाबेथ उपनिवेश की सरकार ने लूट ली है और मुझे पेंशन भी नहीं मिलती. मेरे ९ सहयोगी मालेगांव व अन्य मस्जिदों के विष्फोट के मामले में बंद हैं.

आर्यावर्त सरकार आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों के विरुद्ध युद्ध लड़ रही है, जिन्हें जीवन, धन और सम्मान चाहिए, आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

१० सितम्बर. २०१४

Your Registration Number is : DARPG/E/2014/05875

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 

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AyodhyaP Tripathi,
Sep 10, 2014, 7:37 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 10, 2014, 7:35 AM
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