Muj14W36A ISIS JIHAD



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 36A, Sep 05-11, 2014. This issue is Muj14W36A ISIS JIHAD


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W36A ISIS JIHAD

मनुष्य अपना शत्रु स्वयं है.

परब्रह्म से शिशु को जन्म के साथ ही प्राप्त अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता वीर्य सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है, जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। अब्रह्मी संस्कृतियों के, जेहोवा और अल्लाह के आड़ में, तथाकथित पैगम्बरों ने मनुष्य के ईश्वर रुपी इसी वीर्य को छीनने का घृणित अपराध किया है. इन संस्कृतियों को रहने का अधिकार नहीं है. लूट और यौन सुख के लोभ में मनुष्य स्वयं अपराध में लिप्त है. बाइबल में वीर्यहीन बनना मजहब का आवश्यक कृत्य है.

और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.” (बाइबल, उत्पत्ति १७:११)

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

अनैतिक पुत्र ईसा को जन्म देने वाली मरियम पूजनीय है और ईसा यहोवा का घोषित एकलौता पुत्र है| स्वयं शूली पर चढ़ने से न बचा सका फिर भी सबका मुक्तिदाता है|

यद्यपि बाइबल में खतना करने की स्पष्ट आज्ञा है, तथापि इस्लाम में खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह (रिवाज) है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य विचार यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त नहीं है. फिर भी मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से खतना कराते हैं.

संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५()]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. इस प्रकार सभी लोग मनुष्य को वीर्यहीन करने का घृणित अपराध कर रहे हैं.

ऋषियों द्वारा स्थापित मानवमूल्यों के ठीक विपरीत अब्रह्मी संस्कृति व राज्य की कुटिलता देखिए. वीर्यवान शिशु ईश्वर तक बनने की क्षमता से युक्त है और बाइबल और कुरान दोनों का कथन है कि जब आदम ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया तो जेहोवा (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व अल्लाह (कुरान २:३५) ने आदम को स्वर्ग से निकाल दिया.

अपने असली शत्रु को जानिए.

खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक, कौटुम्बिक व्यभिचार, यौनशिक्षा, सहजीवन, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक सम्बन्ध को संरक्षण देना है| अब्रह्मी संस्कृतियों ने कुमारी माओं को महिमामंडित कर और वैश्यावृति को सम्मानित कर मानवमात्र को वीर्यहीन कर दिया है| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है|

http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

मनुष्य को दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, उसको वीर्यहीन करना| किसान को सांड़ को दास बना कर खेती के योग्य बैल बनाने के लिए सांड़ का बंध्याकरण करना पड़ता है| (अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं के प्रयोग द्वारा मनुष्य को वीर्यहीन कर दास बनाती हैं| लूट और कामुक सुख के लोभ में अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी यहूदी और मुसलमान मजहब की आड़ में स्वेच्छा से गाजे बाजे के साथ वीर्यहीन बनने के लिए खतना कराते हैं और अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैं| जीवन भर रोगी, अशक्त और दास बन कर जीते हैं|

वीर्य के महत्व को पश्चिम के प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात भी जानते थे. उन से एक जिज्ञासु ने पूछा - मनुष्य को स्त्री प्रसंग कितनी बार करना चाहिए? जवाब में सुकरात ने कहा जीवन में एक बार। जिज्ञासु व्यक्ति ने असंतोष व्यक्त करते हुए पूछा कि इतने से संतोष न हो तो? सुकरात ने कहा - वर्ष में एक बार। इससे भी उस व्यक्ति को सन्तुष्टि नहीं हुई तो कहा - माह में एक बार। इस पर भी असन्तोष जाहिर करने पर सुकरात ने कहा - ‘‘जाओ पहले सिर पर कफन बाँध लो और अपने लिए कब्र खुदवालो फिर चाहे जो भी करो।’’

यहूदीवाद, अब्रह्मी संस्कृतियों की मौलिक कमजोरी उनके चारित्रिक दोष में है| अब्रह्मी संस्कृतियाँ व्यक्ति के व्यक्तिगत विवेक का उन्मूलन कर उसे बिना सोचे समझे हठी मजहबी सिद्धांतों की अधीनता को स्वीकार करने के लिए विवश करती हैं| ईसा व मुहम्मद ने मानव की पीढ़ियों से संचित व हृदय से सेवित सच्चरित्रता, सम्पत्ति व उपासना की स्वतंत्रता और नारियों की गरिमा व कौमार्य को लूट व यौनाचार के लोभ में इनके अनुयायियों से छीन लिया है| कुरान व बाइबल हर विवेक, तर्क या प्राकृतिक सिद्धांतों के ऊपर हैं| वह बात भी और वह निंदनीय कार्य भी सही है, जिसे स्वाभाविक नैतिकता की कसौटी पर स्वयं इन पैगम्बरों के गढे ईश्वर भी सही नहीं मानते, क्यों कि पैगम्बरों ने ऐसा कहा व किया था| उदाहरण के लिए चोरी, लूट व नारी बलात्कार अब्रह्मी संस्कृतियों में निषिद्ध है| लेकिन अविश्वासी धर्मावलंबियों की लूट (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व नारी बलात्कार विश्वासियों के स्वर्ग प्राप्ति का एकमात्र उपाय है| अब्रह्मी संस्कृतियों के ईश्वरों ने विवेक व सहज अंतरात्मा के उद्गार को निषिद्ध कर दिया है| (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५) अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों के बाइबल व कुरान के आज्ञाओं व मुहम्मद व ईसा के कार्यकलापों पर कोई प्रश्न नहीं कर सकता| (कुरान ५:१०१ व १०२). (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). मानव अपनी तर्क-बुद्धि से कुछ भी कह या कर नहीं सकता| स्वाध्याय व आत्मचिंतन के लिए अब्रह्मी संस्कृतियों में कोई स्थान नहीं| अशांति, हत्या, लूट व बलात्कार के विरुद्ध भी, जिनका अब्रह्मी संस्कृतियाँ समर्थन करती हैं, अनंत काल से प्रतिपादित वेदों व स्मृतियों का प्रयोग सर्वथा वर्जित है|

इस्लाम और ईसाइयत सदा सदा के लिए अविश्वासियों के गले पर रखी हुई तलवार है| किसी का जीवन सुरक्षित नहीं है। (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) जिनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| अज़ान काफिरों के आराध्य देवों का अपमान और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर-जमानती अपराध है-जिसके बदले दण्डित करने के स्थान पर ईमामों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर १० अरब रुपयों वार्षिक से अधिक वेतन दिया जा रहा है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). आप मस्जिद, चर्च, अज़ान, खुत्बों, नमाज, ईमाम या कुरान को ईशनिंदा का दोषी नहीं ठहरा सकते|

भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत एलिजाबेथ के दासों राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है और मात्र हिंदुओं पर लागू है| अज़ान और खुत्बों का विरोध ईश-निंदा है. जिसके लिए अब्रह्मी संस्कृतियों में मृत्युदंड है और भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती अपराध है यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च  लोक लूट तंत्र के चारो स्तम्भों द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है|

वैदिक सनातन संस्कृति के शासन और समाज की सारी व्यवस्थाएं ब्रह्मचर्य को केन्द्र में रख कर स्थापित की गई हैं. मैं सरयूपारीण वर्ग का सनातनी ब्राह्मण हूँ. हमारे यहाँ जिस गांव में बेटी का व्याह करते हैं, उस गांव का भी पानी नहीं पीते हैं और जो ऐसा करता है, उसे हेय दृष्टि से देखा जाता है. विवाह के पूर्व साखोचार की प्रथा है, जिसके पीछे भावना यह है कि कहीं भूल से भी सगोत्र विवाह न हो जाये. हमारे यहाँ चाचा, ताऊ, मौसा, साले, बहनोई, मामा, नाना आदि सम्बन्ध मिलते हैं. जबकि सभी अंकल हैं.

सबको अपने अधीन करने के लिए तथाकथित पैगम्बरों द्वारा मनुष्य के अतुलित ईश्वरीय बल और पराज्ञान में मूल स्रोत वीर्य को नष्ट करने के कुटिल कृत्य का पिछले ३००० से अधिक वर्षों से जिस ने भी विरोध किया उसे प्रताड़ित किया या कत्ल किया गया. चाहे वह आसमा बिन्त मरवान होंया अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी होंया तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैंविशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

जिस भवन से ईशनिंदा का प्रसारण होता हो और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती हो, उसे नष्ट करना अपराध कैसे है? धरती पर शासन अब्रह्मी संस्कृतियों का ही है. किसी शासक ने विश्वासियों के कत्ल, नारियों के बलात्कार, धर्मान्तरण और लूट पर ऊँगली क्यों नहीं उठाई? मस्जिदों से अज़ान और खुत्बे ई० सन ६३२ से ही हो रहे हैं. विरोध क्यों नहीं होता? हम इस्लाम और ईसाइयत के विरोधी हैं. हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हमारे अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट के अभियुक्त हैं और २००८ से जेलों में बंद हैं| मनुष्य के पुत्र का मांस खाने वाली और लहू पीने वाली एलिजाबेथ (बाइबल, यूहन्ना :५३) द्वारा हम इसलिए सताए जा रहे हैं कि हम जानना चाहते हैं कि अपराध स्थल मस्जिद धरती पर क्यों रहें? मस्जिद बचाने वाले अपराधी हैं| स्वयं मैकाले के कथनानुसार १८३५ ई० तक उसे (मैकाले को) पूरे इंडिया में एक भी भिखारी या चोर नहीं मिला क्यों कि तब वैदिक सनातन धर्म आधारित राजतंत्र था| पढ़ें मेरी पुस्तकअज़ान| इतना ही नहीं हमने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है| टाइम्स आफ इंडिया के अनुसार अपनी धरती पर अपनी सरकार का गठन अपराध है| पढ़िये नीचे की लिंक,

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

http://www.aryavrt.com/

मनुष्य को वीर्य हीन किये जाने का कारण

चरित्र के नए मानदंड


हमारी मान्यता है कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया. स्वास्थ्य गया तो आधा गया, लेकिन यदि चरित्र गया तो सभी नष्ट हो गया. वस्तुतः हम वैदिक पंथियों ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है| (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५). हमारे लिए स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो गया है| भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है। सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०.६.१९७९ से लुप्त) व अनुच्छेद ३९ग]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)]. अब्रह्मी संस्कृतियों में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) कीजिए| दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| (कुरान ८:३९). किसी भी नारी का बलात्कार कीजिए| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं - बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कीजिए| अल्लाह तो ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह कर देता है| किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. वह भी भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल और न्यायपालिका के संरक्षण में! अज़ान और खुत्बों द्वारा जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/).

मानवताको मिटाने के लिए माउंटबेटन ने २०वीं सदी के मीरजाफर (गांधी) से १९४७ में गुप्त समझौता किया. संसार के इतिहास में कहीं भी और कभी भी बिना युद्ध ३५ लाख से अधिक लोग नहीं कत्ल किये गए, जितने कि मानवताको मिटाने के लिए माउंटबेटन ने २०वीं सदी के मीरजाफर (गांधी) से गुप्त समझौता कर बंटवारे के समय सन १९४७ में कत्ल कराए. आज जब कुछ ईसाई बच्चों सहित कत्ल हो रहे हैं, नारियां नीलाम की जा रही हैं, मीडिया कर्मियों के सर कलम हो रहे हैं, तो मीडिया को छाती पीटने का अधिकार कहाँ है?

अब क्यों नहीं कहते कि इस्लाम और ईसाइयत शांति के मजहब हैं? अब सरिया, मस्जिदों और बुर्कों पर प्रतिबन्ध क्यों लगाये जा रहे हैं?

वस्तुतः अब्रह्मी संस्कृतियां धरती पर रहीं तो मानवजाति ही नहीं बचेगी. अस्तित्व चाहिए तो निःशुल्क गुरुकुलों को पुनर्जीवित कर चरित्रवान समाज की स्थापना में आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिए. अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2014/05698

 


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AyodhyaP Tripathi,
Sep 6, 2014, 6:47 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 6, 2014, 6:48 AM
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