Muj14W36 Azaanka Virodh



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 36, Sep 05-11, 2014. This issue is Muj14W36 Azaanka Virodh


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W36 Azaanka Virodh

मुसलमानों को काफिरों के मजहबी उत्पीड़न का अधिकार कुरान ८:३९ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है.

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो, तुम पराजित नहीं हो सकते और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है| गुरुकुलों के नष्ट होते ही ब्रिटिश उपनिवेश का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित व दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| लोकसेवक अपनी ही सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए एलिजाबेथ के दासों द्वारा नियुक्त किये गए हैं| पराधीन लोकसेवक बेबस हैं| लूटें तो मरें और न लूटें तो मरें! अकेले एलिजाबेथ ने, निर्विरोध, पूरे मानव जाति को वीर्यहीन कर, सबके प्राणों को संकट में डाल कर, अपने अधीन कर रखा है| किसी के पास एलिजाबेथ के विरोध का साहस नहीं!

स्पष्टतः अंग्रेजों की कांग्रेस द्वारा संकलित भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की असाधारण कूटनीतिक योजना ने वैदिक सनातन संस्कृति के समूल नाश में अभूतपूर्व बड़ी सफलता प्राप्त की है| जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइत और इस्लाम के सभी मिशन और जिहाद को और वैदिक सनातन संस्कृति के विरुद्ध आक्रमण को, संरक्षणपोषण व संवर्धन देता है, वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षणपोषण व संवर्धन के शपथ लेने के बाद होती है| राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास कोई विकल्प नहीं है| पद, प्रभुता और पेट के लोभ में, राष्ट्रपति और राज्यपाल इस्लाम और ईसाइयत को संरक्षणपोषण व संवर्धन प्रदान करने के लिए विवश कर दिए गए हैं| या तो वे अपने ही सर्वनाश की शपथ लें, अन्यथा पद न लें| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास सुरक्षित है, वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ किये गये किसी भी विरोध को बड़ी चतुराई से निष्क्रिय कर देती है| इस प्रकार एलिजाबेथ राष्ट्रपति और राज्यपाल के कंधे पर रायफल रख कर अपने शत्रुओं को मार रही है और कोई एलिजाबेथ के विरुद्ध ऊँगली भी नहीं उठा सकता!

ईसाई और मुसलमान को तो उनके मजहब ही वीर्यहीन कर शासक के वश में कर चुके हैं, वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को शासक एन केन प्रकारेण वीर्यहीन कर वश में कर रहे हैं|

जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) सम्प्रभु मनुष्य को वीर्यहीन कर अधीन करने वाले इन संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों का परिरक्षण {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६}, संरक्षण {अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम निजी कानून व वक्फ} और प्रतिरक्षण {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षा, मदरसों, उर्दू शिक्षकों, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन और हज अनुदान} करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं| जज बाइबल और कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकते| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इंडिया के संत और कथावाचक वीर्यहीन करने वाली इन संस्कृतियों को ईश्वर तक पहुंचने के अलग अलग मार्ग बताते हैं| पादरी और ईमाम अपने चर्च और मस्जिदों से ईश्वर की निंदा करते हैं और वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के हत्या की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैं. जो विरोध करता है, उसे मिटा दिया जाता है. लेकिन किसी के पास विरोध का साहस नहीं| पद, प्रभुता और पेट के लिये हर लोकसेवक अपने ही सर्वनाश के लिये अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देने के लिये विवश है| लेकिन वैदिक सनातन धर्म अभी तक मिटा नहीं और जब तक वैदिक सनातन धर्म रहेगा, लोगों को दास बनाने में कठिनाई होगी|

जजों ने मानवता के हत्यारों जेहोवा व अल्लाह को ईश्वर घोषित कर रखा है. कुरान व बाइबल को धर्मपुस्तक घोषित कर रखा है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). ईमाम के लिए आप काफ़िर हैं. इस्लाम है तो काफ़िर नही. हम आप के लिए लड़ रहें हैं और प्रजातंत्र के चारो स्तम्भ अपने सर्वनाश की जड़ चर्चों, मस्जिदों और ईमामों को बचाने के लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं. 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

दिनांक; ०३ सितम्बर. २०१४

Your Registration Number is : DARPG/E/2014/05616

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० DARPG/E/2014/05616 द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|


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AyodhyaP Tripathi,
Sep 3, 2014, 5:42 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 3, 2014, 5:41 AM
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