Muj14W35E ASYLUM



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 35E, Aug 29- Sep 04, 2014. This issue is Muj14W35E ASYLUM


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W35E ASYLUM

महामहिम जी!

हम मानवता की रक्षा चाहते हैं और एलिजाबेथ मानवता का विनाश! किसके साथ हैं आप?

अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोधी जीवित नहीं छोड़ा जाता. हमारे आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी जेलों में बंद हैं| लेकिन किसी के पास एलिजाबेथ के उपनिवेश, सत्ता के हस्तांतरण, इस्लाम और ईसाइयत के विरोध का साहस नहीं है. अगर किसी ने विरोध कर दिया तो उसे मिटा दिया गया. मानवजाति की रक्षा के लिए हम आप से हर प्रकार का सहयोग चाहते हैं.

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यहूदी, ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो जेहोवा व अल्लाह को गढ़ने वाले मूसा और मोहम्मद हैं. दोनों ही स्वयं मर गए और अपनी विरासत शासकों को सौंप गए.

इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकते| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है| सन १९४७ से ही इंडिया बूचड़खाना, वेश्यालय और लुटेरों का अभयारण्य बना हुआ है. बाद में इसी हेतु भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कराया गया है| ईसाई दास हैं और मुसलमान सहित किसी को शासन करने का अधिकार नहीं देते. इंडिया और पाकिस्तान की भांति विश्व के ५३ ईसाई व मुसलमान देश आज भी एलिजाबेथ के दास हैं| इंडिया को समाप्त करने के बाद भी मूर्ख मुसलमान (कुरान २:३५) एलिजाबेथ के दास ही रहेंगे| वस्तुतः इंडिया को मिटा कर मुसलमान अपना ही अहित करेंगे| उनका हज अनुदान, मुअज्जिनों, इमामों व मौलवियों का वेतन बंद हो जायेगा| उनका अल्पसंख्यक आयोग और मुस्लिम निजी कानून भी बेमानी हो जायेगा| उनको फिरभी एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति नहीं मिलेगी| न अल्लाह मिलेगा और न विशाले सनम| जब मुसलमान मिट जायेंगे तब कथोलिक प्रोटेस्टेंट आदि के बीच युद्ध होगा.

२३ जून, सन १७५७ में राबर्ट क्लाइव ने मीरजाफर, नवाब के तीन सेनानायक, उसके दरबारी, तथा राज्य के अमीर सेठ जगत सेठ आदि से दुरभिसंधि की और १५ अगस्त १९४७ को माउंटबेटन ने पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी, बैरिस्टर जिन्ना, बैरिस्टर जवाहरलाल नेहरु, बैरिस्टर सरदार वल्लभभाई पटेल, बैरिस्टर अम्बेडकर आदि के साथ दुरभिसंधि की. जिसका, तब से बैरिस्टर वीर सावरकर से लगायत आज तक कोई न्यायविद विरोध नहीं कर रहा. सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमारे ही लोकसेवकों से हमारी वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है|

मानवमात्र को कोई स्वतंत्रता नहीं मिली| ईसाई व मुसलमान सहित किसी का जीवन सुरक्षित नहीं है! विवश लोकसेवकों के संरक्षण में ईसाई मुसलमान को कत्ल कर रहा है (बाइबल, लूका १९:२७) और मुसलमान ईसाई को (कुरआन ८:१७). दोनों हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को कत्ल कर रहे  और मातृभूमि से उजाड़ रहे हैं, वह भी संविधान [अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भाग ३ मौलिक अधिकार|] से प्राप्त असीमित मौलिक मजहबी अधिकार से. कोई नारी सुरक्षित नहीं. नारी का बलात्कार यहूदी, ईसाई (बाइबल, याशयाह १३:१६) या मुसलमान (कुरान २३:६) कर रहा है. कलिमापढ़ना, अज़ान और खुत्बों का प्रसारण भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती अपराध है| जो मुसलमानों पर लागू नहीं होता| क्यों कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत पद, प्रभुता और पेट के लोभ में राष्ट्रपति और राज्यपाल, भारतीय संविधान और कानूनों के अधीन ईसाई व मुसलमान को संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ द्वारा, विवश कर दिए गए हैं| सत्ता के हस्तांतरण की शर्तों के अंतर्गत कोई जज बाइबल और कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआरकलकत्ता१९८५प१०४).

संविधान के अनु० ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ व संविधान सभा के लोग न लूट पाए, उसे सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया (एआईआर, १९५१, एससी ४५८) और अब तो इस अनुच्छेद को २०-६-१९७९ से भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) नागरिक को धन व उत्पादन के साधन रखने का अधिकार नहीं देता| "३९(ग)-  आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण न हो;" सत्ता के हस्तांतरण के इस कुटिल समझौते से विवश आज एलिजाबेथ के लिए लोकसेवक मानवजाति को लूट रहे हैं. मूर्ख यहूदी, ईसाई (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व मुसलमान (कुरान २:३५) लुट रहे हैं. सभी आपस में एक दूसरे के जान के शत्रु बने हुए हैं.

परब्रह्म यहूदी, ईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. परब्रह्म से शिशु को जन्म के साथ ही प्राप्त अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता वीर्य सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। अब्रह्मी संस्कृतियाँ मनुष्य के इसी वीर्य को एन केन प्रकारेण नष्ट करने की अपराधिनी हैं. ये संस्कृतियाँ अपने अनुयायियों की ही शत्रु हैं. मनुष्य के इसी ईश्वरीय शक्ति के मूल स्रोत वीर्य को नष्ट करना धूर्त पैगम्बरों ने मजहब का अपरिहार्य कर्म बना रखा है, वह भी विश्वास के आधार पर. बिना प्रमाण तो जज व क़ाज़ी भी निर्णय नहीं करता! फिरभी आप खूनीलुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को बिना प्रमाण ईश्वर मानने के लिए विवश कर दिए गए हैं? क्योंकि आप ब्रिटिश उपनिवेश के दास नागरिक हैं. दास के पास अधिकार नहीं होते|

क्या आप जानते हैं कि पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| यानी राज्य की स्थापना का उद्देश्य, जान-माल की रक्षा ही लुप्त है.

मेरा सीधा सवाल है, उपनिवेश, ईशनिंदा, बलात्कार व हत्या के शिक्षा केन्द्र चर्च व मस्जिद, को नष्ट करना अपराध कैसे है? अब्रह्मी संस्कृतियों का संरक्षण लोकसेवकों के पद, प्रभुता और पेट के लोभ से जुड़ गया है. जब तक हम उपनिवेश के शर्तों से बंधे रहेंगे, हम यूं ही मिटते रहेंगे. क्या महामहिम निज हित में हमें सहयोग देंगे?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

य दिनांक; शनिवार, ३० अगस्त २०१४

Registration Number is : DARPG/E/2014/05444

http://pgportal.gov.in

 

 

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AyodhyaP Tripathi,
Aug 30, 2014, 8:58 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Aug 30, 2014, 8:57 AM
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