Muj14W34 NMO KAHIN



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 34, Aug 22-28, 2014. This issue is Muj14W34 NMO KAHIN


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W34 NMO KAHIN

स्वतंत्रता (उपनिवेश) दिवस पर दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का विरोध.

 आज़ादी का पर्व?


आर्यावर्त सरकार ने २ अगस्त, २०१४ को ‘मुजहना’ का अंक ‘दासता से मुक्ति हेतु युद्ध.’ सार्वजनिक किया था. ४ अगस्त, २०१४ को माननीय प्रधानमंत्री नमो के सरकार का उत्तर भी मिल गया था. इस अंक को कोई भी व्यक्ति हमारे वेबसाइट

http://www.aryavrt.com/muj14w32-15agst_ka-bahishkar_karen

पर पढ़ सकता है. इसके अतिरिक्त माननीय प्रधानमंत्री नमो सरकार का उत्तर भी DARPG/E/2014/04623 http://pgportal.gov.in सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

वस्तुतः १५ अगस्त खुशी का नहीं - शर्म का दिन है| इसका स्पष्टीकरण हमने अपने अंक ‘१५अगस्त_उपनिवेश_दिवस’ में किया है. इसका उत्तर भी हमें ४ अगस्त, २०१४ को DARPG/E/2014/04630 द्वारा प्राप्त हो चुका है. विवरण हमारे वेबसाइट http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas पर मिल जायेगा.

वस्तुतः माननीय प्रधानमंत्री नमो प्रधान सेवक नहीं एलिजाबेथ के प्रधान दास हैं. ५३ देशों सहित इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है. हमारे पूर्वजों के देश की आज़ादी का जंग अकारथ गया| गांधी ने अन्य बैरिस्टरों से मिल कर मीरजाफर की भूमिका निभाई. १५ अगस्त, १९४७ से आज तक हमने आज़ादी के जंग पर विराम लगा रखा था| इसका विवरण मैंने अपने अंक ‘१५अगस्त१९४७ का समझौता’ में दिया है. यह पाठक को हमारे वेबसाइट http://www.aryavrt.com/muj14w33-smjhauta पर मिल जायेगा. इस अंक में मैंने बताया है कि वस्तुतः १५ अगस्त, १९४७ को सत्ता गोरों के हाथ से फिसल कर कालों के पास आ गई| जिसकी मुख्य शर्त ही वैदिक सनातन संस्कृति का समूल नाश है|

अपने उपरोक्त अंकों में मैं स्पष्ट कर चुका हूँ कि अब्रह्मी संस्कृतियों का एक भी आलोचक या विरोधी जीवित नहीं छोड़ा जाता| आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी उपनिवेश का विरोध करने के कारण २००८ से जेलों में बंद हैं. क्या पाठक जी हमारा अपराध नहीं जानना चाहेंगे? हम अज़ान द्वारा प्रसारित की जाने वाली ईशनिंदा बंद कराना और मस्जिदों को, जहां से काफिरों के नरसंहार की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना चाहते हैं| मालेगांव बम कांड में, सरकार ने न्यायालय में हमारे विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया है. यह आरोप पत्र हमारे वेबसाइट http://www.aryavrt.com/Home/chargesheet-download पर मिलेगा. इसके अतिरिक्त हमारे विरुद्ध मीडिया ने भी बहुत विषवमन किया है, जो पाठक जी को हमारे वेबसाइट http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news पर मिल जायेगा.

१५ अगस्त, २०१४ को वस्तुतः माननीय प्रधानमंत्री नमो जी ने आज़ादी के सिपाहियों को शत-शत वन्दन नहीं, अपमानित किया है| जब तक इंडिया उपनिवेश रहेगा, हर लोकसेवक वैदिक सनातन संस्कृति के समूल नाश और मानवजाति के नरसंहार करने के लिए विवश है|

माननीय प्रधानमंत्री नमो यह जान लें कि सन १८३५ तक मैकाले को भारत में एक भी चोर या भिखारी नहीं मिला. हमारे यहाँ सोना गिना नहीं तौला जाता था. हम निर्यातक देश थे और कुछ भी आयात नहीं करते थे. हमारे अर्थव्यवस्था का आधार गुरुकुल और गौ धन था. हमारे यहाँ साक्षरता शत प्रतिशत थी. गरीब गरीब इसलिए हुआ कि उसने गौ सेवा बंद कर दी. निःशुल्क गुरुकुलों से मुंह मोड़ लिया. हमें दुष्चरित्र बना दिया गया|

शायद माननीय प्रधानमंत्री नमो को नहीं मालूम कि स्वयं अम्बेडकर ने संसद में ही संविधान को जलाने की बात कही थी और यही उनकी हत्या का कारण बना था| विवश प्रधानमंत्रियों ने नागरिकों को एलिजाबेथ को हिस्सा देने के लिए लूटा है|

नैतिकता एलिजाबेथ के उपनिवेश के दासों की?

जब बेटी और बहू से विवाह करना संविधान सम्मत है और नारी को बिना विवाह बच्चे जनने पर राज्य व समाज से संरक्षण| वह भी UNO के UDHR के अनुच्छेद २५(२) से! तो नैतिकता की माननीय प्रधानमंत्री नमो बात न करें. बलात्कार बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान से प्रायोजित है| जजों ने बलात्कार को सदा संरक्षण दिया है| कानून ने साध्वी प्रज्ञा के मामले में काम नहीं किया. एक अच्छी भली साध्वी के रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई. उनको जहर खिला कर कैंसर का मरीज बना दिया. कहाँ गया सर्वोच्च न्यायालय का चार्टर? माओवादी अनैतिक संतानें होती हैं. उनको हत्या करने की शिक्षा चर्चों से मिलती है. हिंसा के रास्ते से चर्चों ने आप को उपनिवेश बनाये रखने में सफलता पाई है. यदि माननीय प्रधानमंत्री नमो बेटी बचाना चाहते हैं तो लव जिहाद, इस्लाम और ईसाइयत पर प्रतिबंध लगायें.

हमारी खेती बैलों से होती थी. न यूरिया व फास्फेट की जरूरत थी, न पेस्टीसाइड की. डंकल के बीज नहीं थे. गौ हत्या के संयुक्त रूप से सरकार और किसान उत्तरदाई हैं. गौ हत्यारे तो मिटेंगे ही. साहूकार को दोष क्यों देते हैं? सरकार जनधन की जगह पशुधन को प्रोत्साहित करे. चरित्र और कार्य कौशल चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करे.

क्या मैं जान सकता हूँ कि एफडीआई लागू कर सरकार किसका भला कर रही है? क्या सरकार शौचालय के स्थान पर गुरुकुलों को पुनर्जीवित कर सकती है? महात्मा नहीं गांधी २०वीं सदी का मीरजाफर था. पहले सरकार उपनिवेश से मुक्ति ले. आक्रांता अब्रह्मी संस्कृतियों ने वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गीता को नष्ट कर दिया है| माननीय प्रधानमंत्री नमो ने गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का बीड़ा तो उठा लिया है, लेकिन गुरुकुल, गौ और गायत्री के संरक्षण पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. तभी उनको पता लगेगा कि वे कितने संकट में हैं|

यह संस्कृतियों का युद्ध है. ईसाइयत और इस्लाम संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| लोकसेवक यह न भूलें कि एलिजाबेथ मानवजाति को मिटाने में लिप्त है| अतएव हमारी मुक्ति का मार्ग इस्लाम और ईसाइयत का समूल नाश है| हमें उपनिवेश से मुक्ति लेनी ही पड़ेगी. माननीय प्रधानमंत्री नमो न तो अज़ान पर प्रतिबन्ध लगा सकते हैं और न इंडिया को उपनिवेश से मुक्ति दिला सकते हैं| वे मात्र हमारी गुप्त सहायता कर सकते हैं|

हम काफ़िर लोग संस्कृतियों के विरुद्ध युद्ध लड़ रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी हमें कत्ल करेंगे| आत्म रक्षा हमारा मानवाधिकार है| हम अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं| एलिजाबेथ के उपनिवेश के दासों को हमारा उत्पीड़न करने का कोई अधिकार नहीं है| हम मानवमात्र को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए धरती के प्रत्येक मनुष्य से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके – जिए तो शासकों का दास बनकर|

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. प्राकृतिक न्याय एवं भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन हमें प्राइवेट प्रतिरक्षा का कानूनी अधिकार है. क्या माननीय प्रधानमंत्री नमो हमारी गुप्त सहायता करेंगे?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Your Registration Number is : DARPG/E/2014/05034

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 

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AyodhyaP Tripathi,
Aug 18, 2014, 11:31 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Aug 18, 2014, 11:29 PM
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