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मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 33A, Aug 15-21, 2014. This issue is Muj14W33AY Dhara 196CrPC


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



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मौत का फंदा धारा १९६

विषय: अभियोग प्राथमिकी ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला दिल्ली, रोहिणी के MM वि० श्री संदीप गुप्ता के न्यायालय से वापसी हेतु याचिका.

उप राज्यपाल दिल्ली.

महामहिम जी!

मैंने सं० GNCTD/E/2014/03741 दिनांक जुलाई १७, २०१४. द्वारा LG को याचिका भेजी थी. जिसे एलिजाबेथ के दबाव में जानबूझ कर लोकसेवकों ने दिल्ली गृह सचिवालय के बजाय जन शिकायत आयोग को भेजा है.

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है, “ ... बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है| ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| लोकसेवक अपनी ही सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किये गए हैं| पराधीन लोकसेवक बेबस हैं| अकेले एलिजाबेथ ने पूरे मानव जाति को वीर्यहीन कर, निर्विरोध, सबके प्राण संकट में डाल कर, अपने अधीन कर रखा है| वह कैसे?

मनुष्य को दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, उसको वीर्यहीन करना| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक, कौटुम्बिक व्यभिचार, यौनशिक्षा, सहजीवन, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक सम्बन्ध को संरक्षण देना है| अब्रह्मी संस्कृतियों ने कुमारी माओं को महिमामंडित कर और वैश्यावृति को सम्मानित कर मानवमात्र को वीर्यहीन कर दिया है| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है|

http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

इंद्र ने वीर्यवान विश्वामित्र को पराजित करने के लिए मेनका का उपयोग किया| अब्रह्मी संस्कृतियों, (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६), ने तो, मानवमात्र को अधीन करने के लिए इंद्र की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं|. इतना ही नहीं ईसा ने बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह की छूट दी है| अल्लाह ने मुहम्मद का निकाह उसकी पुत्रवधू जैनब (कुरान, ३३:३७-३८) से किया और ५२ वर्ष के आयु में ६ वर्ष की आयशा से उसका निकाह किया| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. ईसाइयों के यहाँ कुमारी माएं प्रायः घर घर मिलती हैं| बेटी व पुत्रवधू से विवाह, सहजीवन व समलैंगिक मैथुन और सगोत्रीय विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है| बारमें दारू पीने वाली बालाओं का सम्मान हो रहा है! विवाह सम्बन्ध अब बेमानी हो चुके हैं| जजों ने लव जेहाद, सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता दे दी है| सोनिया के सत्ता में आने के बाद सन २००५ से तीन प्रदेशों केरल, गुजरात और राजस्थान में स्कूलों में यौन शिक्षा लागू हो गई है| शीघ्र ही अमेरिका की भांति इंडिया के विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियां बांटी जाएँगी| जजों की कृपा से आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| उज्ज्वला - नारायण दत्त तिवारी और आरुषि - हेमराज में जजों के फैसलों ने आने वाले समाज की दिशा निर्धारित कर दी है| हालात इतने गम्भीर हैं कि आप अपनी पत्नी, बहन या बेटी को व्यभिचार करने से रोक नहीं सकते| आप अपनी संतानों को ब्रह्मचारी बनाने की बात सोच नहीं सकते|

आप का समय निकल गया| वीर्य का फल ब्रह्मज्ञान आप को बाजार में नहीं मिलेगा| अपनी भावी पीढ़ी को निःशुल्क गुरुकुल में ब्रह्मचारी बनाने के लिए पढ़ाइये| मैकाले के यौनशिक्षा स्कूलों का बहिष्कार करिये| अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा|

हम स्पष्ट घोषणा करते हैं कि हम अब्रह्मी संस्कृतियों को धरती पर नहीं रहने देना चाहते. क्यों कि ये संस्कृतियां मानवजाति का नरसंहार करेंगी. प्राण रक्षा हमारा नैसर्गिक अधिकार है| भारतीय दंड संहिता की धारा १०२. बगलें मत झांकिये. बताइए हमारे अभियोग वापस क्यों नहीं लेंगे? सम्पादक. १४ अगस्त. २०१४.

 Your Registration Number is : GNCTD/E/2014/04431


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AyodhyaP Tripathi,
Aug 14, 2014, 6:42 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Aug 14, 2014, 6:40 AM
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