Muj14W33 SMJHAUTA



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE ISSUE 33, Aug 15-21, 2014. This issue is Muj14W33 SMJHAUTA


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W33 SMJHAUTA

१५अगस्त१९४७ का समझौता

आर्यावर्त सरकार उपनिवेश उन्मूलन में आप का सहयोग चाहती है| जिसे स्वतंत्रता चाहिए-मिले.

गांधी २०वीं सदी का मीरजाफर

प्लासी का युद्ध २३ जून १७५७ को मुर्शिदाबाद के दक्षिण में २२ मील दूर नदिया जिले में गंगा नदी के किनारे 'प्लासी' नामक स्थान में हुआ था। इस युद्ध में एक ओर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना थी और दूसरी ओर बंगाल के नवाब की सेना थी। कंपनी की सेना ने रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में नबाव सिराज़ुद्दौला को हरा दिया था। इस युद्ध की जानकारी लन्दन के इंडिया हाउस लाइब्रेरी में उपलब्ध है। वहाँ भारत की गुलामी के समय के २० हज़ार से अधिक अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध है।

वहाँ उपलब्ध दस्तावेज के हिसाब से अंग्रेजों के पास प्लासी के युद्ध के समय मात्र ३०० सिपाही थे और सिराजुदौला के पास १८ हजार सिपाही। अंग्रेजी सेना का सेनापति था राबर्ट क्लाइव और सिराजुदौला का सेनापति था मीरजाफर। राबर्ट क्लाइव ये जानता था कि आमने सामने का युद्ध हुआ तो एक घंटा भी नहीं लगेगा और हम (अँगरेज़) युद्ध हार जायेंगे और क्लाइव ने कई बार चिठ्ठी लिख के ब्रिटिश पार्लियामेंट को ये बताया भी था। इन दस्तावेजों में क्लाइव की दो चिठियाँ भी हैं। जिसमे उसने ये प्रार्थना की है कि अगर प्लासी का युद्ध जीतना है तो मुझे और सिपाही दिए जाएँ। उसके जवाब में ब्रिटिश पार्लियामेंट के तरफ से ये चिठ्ठी भेजी गयी थी कि हम अभी (१७५७ में) नेपोलियन बोनापार्ट के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं और प्लासी से ज्यादा महत्वपूर्ण हमारे लिए ये युद्ध है| इससे ज्यादा सिपाही हम तुम्हें नहीं दे सकते।

राबर्ट क्लाइव ने तब अपने दो जासूस लगाये और उनसे कहा की जाकर पता लगाओ कि सिराजुदौला के फ़ौज में कोई ऐसा आदमी है जिसे हम रिश्वत दें या लालच दें और वह रिश्वत के लालच में अपने देश से गद्दारी कर सके। उसके जासूसों ने ये पता लगा के बताया कि हाँ उसकी सेना में एक आदमी ऐसा है जो रिश्वत ले कर बंगाल को बेच सकता है और अगर आप उसे कुर्सी का लालच दें तो वो बंगाल के सात पुश्तों को भी बेच सकता है| वो आदमी था मीरजाफर. मीरजाफर ऐसा आदमी था जो दिन रात एक ही सपना देखता था कि वो कब बंगाल का नवाब बनेगा। ये बातें राबर्ट क्लाइव को पता चलीं तो उसने मीरजाफर को एक पत्र लिखा| युद्ध से पूर्व ही नवाब के तीन सेनानायक, उसके दरबारी, तथा राज्य के अमीर सेठ जगत सेठ आदि से क्लाइव ने षडंयत्र कर लिया था। जैसे ही युध्द शुरू हुआ तो नवाब की पूरी १८००० की सेना ने युद्ध मे ३०० सैनिकों के सामने आत्म समर्पण कर दिया। राबर्ट क्लाइव ने इग्लैण्ड को एक पत्र में लिखा है। वो १८००० सैनिको-को बन्दी बनाकर घोड़े पर बैठ कर आगे आगे चल रहा था. उसके पीछे १८००० सैनिक सिर झुकाये चल रहे थे। उनके पीछे कम्पनी के ३०० सैनिक चल रहे थे। देश की जनता सड़क के दोनो किनारे खड़े होकर तमाशा देख रही थी। अगर उस समय उन १८००० सैनिकों में से - या फिर देश की जनता - जो तमाशा देख रही थी - उनमें से किसी का स्वाभिमान जागा होता और किसी ने एक पत्थर राबर्ट क्लाईव को मार दिया होता तो भारत का इतिहास उसी दिन बदल गया होता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और हम तमाशा देखते रह गये और भारत गुलाम बन गया। युद्ध के फ़ौरन बाद मीर जाफर के पुत्र मीरन ने नवाब की हत्या कर दी थी। तब से भारत इंडिया बन गया और ईसाई व मुसलमान सहित प्रत्येक व्यक्ति आज भी एलिजाबेथ का दास है| एक भूल आज तक आपकी दासता का कारण है| तबसे लाखों ने बलिदान दिए फिर भी हमारी दासता, वैदिक सनातन संस्कृति और उसके अनुयायियों का सुनयोजित विनाश, और सम्पदा की लूट अनवरत जारी है।

सन १७५७ में राबर्ट क्लाइव, मीरजाफर, नवाब के तीन सेनानायक, उसके दरबारी, तथा राज्य के अमीर सेठ जगत सेठ आदि थे और १५ अगस्त १९४७ को पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी, बैरिस्टर जिन्ना, बैरिस्टर जवाहरलाल नेहरु, बैरिस्टर सरदार वल्लभभाई पटेल, बैरिस्टर अम्बेडकर और यहाँ तक कि विपक्ष के बैरिस्टर वीर सावरकर थे. तब से आज तक तमाम न्यायविद पैदा हुए और मर गए, लेकिन किसी ने भी भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम१९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग) आदि का विरोध नहीं किया| अधिक विवरण देखें, URL

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

जब मुझे बहुरूपिये ठग पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी के सच्चे स्वरूप का ज्ञान हुआ तब तक मैं बूढ़ा हो चुका था. मीरजाफर नवाबी चाहता था और गांधी राष्ट्रनायक महात्मा की उपाधि| मुझे २००१ में जेल में जहर दिया गया. तब से मैं बीमार हूँ. मुझसे जो भी जुड़ता है, वह जेल चला जाता है| मेरे ९ अधिकारी २००८ से आज तक मालेगांव कांड में जेल में हैं|

अब एलिजाबेथ मेरा दुरूपयोग दूसरी भांति करती है| अब मुझे जेल नहीं भेजा जाता. मैं नाम नहीं बताऊंगा, लेकिन नमो सरकार के कुछ सीबीआई और रा के अधिकारी मेरे मित्र बन कर व अन्य भांति मेरी गुप्तचरी करते हैं| जो भी मेरे सम्पर्क में आता है - जेल उसे भेजा जाता है| अतएव एलिजाबेथ के दास नमो जी! सावधान!

इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकते| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है| इसीलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कराया गया है| यह अनुच्छेद अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को अपनी नरसंहार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| इतना ही नहीं प्रजातंत्र के चारो स्तम्भ भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संरक्षणपोषण व संवर्धन करने के लिए विवश कर दिए गए हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती अपराध है| इन अपराधों का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन जिलाधीश, राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है|

उपरोक्त कानूनों के बल पर ईमाम/मुअज्जिन, बेबस राष्ट्रपति, राज्यपाल, पुलिस और न्यायपालिका के संरक्षण में, काफिरों के ईष्ट्देवों की बेरोकटोक निंदा करते हैं और मस्जिदों से काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे देते हैं| १९४७ से आज तक अज़ान और मस्जिद का, हमारे अतिरिक्त किसी ने विरोध नहीं किया|

गुरुकुल, गौ, गंगा और वेदमाता गायत्री वैदिक सनातन संस्कृति की चार आधार शिलाएं हैं| ब्रह्मचारी को गुरुकुलों में संस्कृत की शिक्षा निःशुल्क दी जाती है| क्या आप महंगे यौनशिक्षा और कत्ल करने की शिक्षा देने वाले मैकाले के स्कूल और मकतब का बहिष्कार करेंगे?

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बिना प्रमाण तो जज व क़ाज़ी भी निर्णय नहीं करता! फिर भी आप खूनी, लुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को बिना प्रमाण ईश्वर मानने के लिए विवश हैं. क्या आप जानते हैं कि पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है? ऐसी परिस्थिति में हमारे पास अज़ान और मस्जिद को नष्ट करने के अतिरिक्त विकल्प क्या है?

नमो ने जिस भारतीय संविधान के तीसरी अनुसूची के प्रारूप के अनुसार भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ ली है, उसके अनुच्छेद २९(१) ने वैदिक सनातन संस्कृति की रीढ़ तोड़ दी है| वीर्यरक्षा के केंद्र निःशुल्क गुरुकुलों में शिक्षा देने के बारे में कोई सोच ही नहीं सकता| गौ हत्या जारी है| गंगा गंदा नाला बन गई है| वेदमाता गायत्री तिरस्कृत है| उपनिवेश से मुक्ति के बारे में चर्चा करते ही आप आतंकित हो जाते हैं| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) किसी मनुष्य को जीने का अधिकार नहीं देता| यहाँ तक कि ईसाई मुसलमान की हत्या करने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार रखता है और मुसलमान ईसाई की| आत्मरक्षा हेतु क्या आप के पास हमारा सहयोग करने का साहस है? एक पत्थर नहीं फेंक सकते, तो पत्थर फेंकने वालों को सहयोग तो दीजिए. खुल कर नहीं तो गुप्त रूप से ही सही. अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी. (सू० स०) Aug. 11, 14y

Registration Number is : DARPG/E/2014/04822


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AyodhyaP Tripathi,
Aug 10, 2014, 12:24 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Aug 10, 2014, 12:23 PM
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