Muj14W32 15AGST_KA BAHISHKAR_KAREN



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 32, Aug 08-14, 2014. This issue is Muj14W32 15AGST_KA BAHISHKAR_KAREN


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W32 15AGST_KA BAHISHKAR_KAREN

दासता से मुक्ति हेतु युद्ध.

पाकपिता मोहनदास करमचन्द गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभ पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर में एक समानता थी| सभी बैरिस्टर थे| सभी को भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ का पूरा ज्ञान था| आक्रांता अंग्रेजों ने इस अधिनियम को हॉउस ऑफ कामन्स में सत्ता के हस्तांतरण के पूर्व १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित भारत का दो उपनिवेशों (भारत तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को भारत बंट गया। तब से लेकर आज तक किसी ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ का विरोध नहीं किया| गांधी माउंटबेटन से मिलकर मुसलमानों और हिंदुओं को लुट्वाता, कत्ल कराता और नारियों का बलात्कार कराता रहा| १५ अगस्त को प्रत्येक वर्ष मूर्ख हिंदू और मुसलमान उसी मानवता के संहार का जश्न मनाते हैं. दोनों को लज्जा भी नहीं आती.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

लेकिन १५ अगस्त १९४७ से आज तक हमारे अतिरिक्त किसी ने, यहाँ तक कि किसी मुजाहिद ने भी नहीं, भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश)अधिनियम १९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद,  अज़ान और खुत्बों का विरोध नहीं किया| किसी मौलवी ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध फतवा नहीं दिया और न कोई तालिबानी भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश)अधिनियम १९४७ के विरुद्ध लड़ा. सब ने अपने अनुयायियों के साथ विश्वासघात किया|

कोई विरोध कर भी नहीं सकता| क्यों कि अब्रह्मी संस्कृतियों का एक भी आलोचक या विरोधी जीवित नहीं छोड़ा जाता| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, या अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

२२ जून १९४८ को भारत के दूसरे गवर्नर के रूप में चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने निम्न शपथ लीl “मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यथाविधि यह शपथ लेता हूँ कि मैं सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी के प्रति कानून के मुताबिक विश्वास के साथ वफादारी निभाऊंगा, एवं मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यह शपथ लेता हूँ की मैं गवर्नर जनरल के पद पर होते हुए सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी (यानी एलिजाबेथ) की यथावत सेवा करूँगा l ” तब से आज तक नमो सहित सभी शासक दास निर्लज्जता से सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी की सेवा कर रहे हैं|

१५ अगस्त खुशी का नहीं - शर्म का दिन है| इस दिन अंग्रेजों ने भारत को उपनिवेश बनाया था | जो राज्य उनके अधीन नहीं थे वे भी इसके अंतर्गत अब उनके आधीन हो गए | हमें गोरे हमारी ही भूमि ९९वर्ष के लिए किराए पर दे गए| भारत का संविधान अभी भी ब्रिटेन के अधीन है| ब्रिटिश नैशनैलीटी अधिनियम १९४८ के अंतर्गत हर भारतीय, चाहे मुसलमान ही क्यों न हो,  बर्तानियो की प्रजा है| भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ३६६,३७१,३७२ व ३९५ मे परिवर्तन की क्षमता संसद में नहीं है | गोपनीय समझौते, जिसका खुलासा आज तक नहीं किया जाता, के तहत वार्षिक १० अरब रूपये पेंशन ३० हजार टन गौ मांस ब्रिटेन को दिया जाएगा| [यही गोपनीयता है, जिसकी प्रधान मंत्री व मंत्री शपथ लेते हैं] अनुच्छेद ३४८ के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय संसद की कार्यवाही आंग्ल में होगी| कहना छोड़िये कि हम स्वंतंत्र हैं| बिना रक्त बहाए किसी को स्वतंत्रता नहीं मिली | दूसरों को जगाइए व अंग्रेजी का प्रयोग बंद करिये | ओ३म्|

केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७). स्वर्ग उन्हें ही मिलेगा, जो बपतिस्मा ले| एलिजाबेथ के साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी ईसा को अर्मगेद्दन द्वारा धरती पर केवल अपनी पूजा करानी है| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा और ईसाइयत की बारी है|

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी खूनी इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है|

यही सब साम्प्रदायिक सद्भाव, सर्वधर्मसमभाव, अनेकता में एकता, गंगा यमुनी संस्कृति और ईसाई व मुसलमान की दया और सेवा है| हम इस धोखाधड़ी का अंत चाहते हैं|

किसी के पास जीने का अधिकार नहीं है| ईसाई मुसलमान को कत्ल करेगा और मुसलमान ईसाई को| शासन करने का अधिकार मात्र जारज और प्रेत ईसा के पास है| राष्ट्रहंता-पाकपिता गांधी ने देश को १९४७ में ही ब्रिटिश उपनिवेश बना दिया| उपरोक्त स्थिति को मोहम्मद अली जिन्ना, संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर और वीर सावरकर ने भी स्वीकार किया और ईसाई व मुसलमान सहित प्रजातंत्र के चारो स्तंभों के दास आज भी स्वीकार कर रहे हैं| हम आर्यावर्त सरकार के लोग इस षड्यंत्र को उजागर कर रहे हैं| इसीलिए हमारे ९ अधिकारी मालेगांव बम कांड में २००८ से जेलों में बंद हैं| शत्रु के साथ साम, दाम, दंड और भेद की नीति अपनानी पड़ती है| यह युद्ध नमो लड़ भी नहीं सकते मात्र आर्यावर्त सरकार के सैनिक लड़ सकते हैं| हम मानवजाति को एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति दिलाना चाहते हैं| हम काफ़िर लोग अब्रह्मी संस्कृतियों के विरुद्ध युद्ध लड़ रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी हमें कत्ल करेंगे| आत्म रक्षा हमारा भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन मानवाधिकार है| हम अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं| एलिजाबेथ के उपनिवेश के दासों को हमारा उत्पीड़न करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है| हम मानवमात्र को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए धरती के प्रत्येक मनुष्य से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके – जिए तो शासकों का दास बनकर| प्रमाण केलिए देखें,

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

आप को कोई स्वतंत्रता नहीं मिली| इंडिया का ईसाई व मुसलमान सहित हर नागरिक एलिजाबेथ का दास है| जो भी इसे दासता कहेगा, उसे भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधिकार से राष्ट्रपति/ राज्यपाल जेल भेज देंगे|

जातिसंहारकों का संरक्षणपोषण व संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का संकलन किया गया है| शासक और लोकसेवक तभी तक सत्ता और सेवा में रहेंगे, जब तक एलिजाबेथ का हित साधते यानी ईसा के राज्य का संरक्षणपोषण व संवर्धन करते रहेंगे| यानी अपना ही सर्वनाश सुनिश्चित करते रहेंगे|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी जातिसंहार, बलात्कार व लूट की संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है!

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

बाइबल, लूका १९:२७ का आदेश है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|". आप एलिजाबेथ के दास हैं. एलिजाबेथ ने ईसाई व मुसलमान को सनातनियों के जातिसंहार के लिए ‘अल्पसंख्यक’ घोषित किया है| जब सनातनियों का संहार हो जायेगा, तब मुसलमानों और गैर कैथोलिक ईसाइयों का जातिसंहार होगा|

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६

प्रभाव: इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश (डोमिनियन) है| {{भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अ० ६(ब)(||)} व कामनवेल्थ मेम्बर}. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ ने १५ अगस्त, १९४७ से स्वातन्त्रय युद्ध को अपराध बना दिया है.

ईमाम नमो के संरक्षण में काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा करता है. स्वयं दास है और मानवमात्र की स्वतंत्रता छीनता है. कोई आतंकित नहीं होता! जज लज्जित नहीं होते| ईमामों को दंडित न कर एलिजाबेथ ईमामों को जजों से वेतन दिलवा रही है. जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का न्यायपालिका ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया ब सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/) यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च  न्यायपालिका सहित प्रजातंत्र के चारो स्तम्भों द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है| इनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

मस्जिद और अज़ान का विरोध करने के कारण दिल्ली सरकार ने मुझ पर अब तक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति के बाद भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन ४९ अभियोग चलाए| अन्य तो निपट गए, लेकिन ४ आज भी लम्बित हैं| यह संस्कृतियों का युद्ध है, जिसे हम १९९१ से लड़ रहे हैं| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है." अतएव हमारी मुक्ति का मार्ग इस्लाम और ईसाइयत का समूल नाश है|

ईसाइयत और इस्लाम संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| लोकसेवक यह न भूलें कि एलिजाबेथ मानवजाति को मिटाने में लिप्त है| आज जीविका, पद और प्रभुता के लोभ में जो अपराध और पाप लोकसेवक कर रहे हैं, वह उनका ही काल बनेगा| इसका प्रमाण बाबरी प्रकरण और मुज़फ्फरनगर में लव जिहाद प्रकरण में हस्तक्षेप करने के कारण लोकसेवकों के सामने आया था| यह युद्ध लोकसेवक नहीं लड़ सकते| वे गुप्त रूप से हमारी सहायता ही कर सकते हैं|

युद्ध भूमि में भारत कभी नहीं हारा| लेकिन अपने ही जयचंदों से हारा है| समझौतों से हारा है| अपनी मूर्खता से हारा है| उन्हीं समझौतों में सत्ता के हस्तांतरण का समझौता भी है| पाकिस्तान गाँधी की लाश पर बन रहा था| लेकिन इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट १९४७ का न गाँधी ने विरोध किया और न जिन्ना ने| दोनों ने ब्रिटिश उपनिवेश यानी ब्रिटेन की दासता स्वीकार की| मुझे उन मुसलमानों पर तरस आता है, जो कश्मीर को उपनिवेश इंडिया से उपनिवेश पाकिस्तान में मिलाने के लिए रक्त बहाते हैं|

सेना आप की रक्षक हैभारत में सेना का मनोबल तोड़ने के लिए१९४७ से ही षड्यंत्र जारी है| १९४७ में इंडियन सेना पाकिस्तानियों को पराजित कर रही थी| सेना वापस बुला ली गई| सैनिक हथियार बनाने और परेड करने के स्थान पर जूते बनाने लगे| परिणाम १९६२ में चीन के हाथों पराजय के रूप में आया| १९६५ में जीती हुई धरती के साथ हम प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को गवां बैठे| १९७१ में पाकिस्तान के ९३ हजार युद्ध बंदी छोड़ दिए गए लेकिन भारत के लगभग ५४ सैनिक वापस नहीं लिये गए| एलिजाबेथ के लिए इतना कुछ करने के बाद इंदिरा और राजीव दोनों मारे गए| कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को वापस जाने दिया गया| अटल विरोध करते तो वे भी मारे जाते| एडमिरल विष्णु भागवत के बाद अब वीके सिंह का नम्बर लगा है| नमो या तो एलिजाबेथ की दासता करेंगे और वैदिक सनातन संस्कृति मिटायेंगे अथवा एलिजाबेथ नमो को कत्ल करवा देगी| आप लोग नमो की जान के पीछे क्यों पड़े हैं?

पाकपिता गाँधी को पहचानने में माननीय प्रधानमंत्री नमो सहित सारे इंडियन आज भी भूल कर रहे हैं| जेहोवा और अल्लाह को ईश्वर मानने की भूल कर रहे हैं| उपनिवेश को स्वतंत्रता मानने की भूल कर रहे हैं और भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा व्यक्त करने की भूल कर रहे हैं| जिसके बाप का पता नहीं है, उस प्रेत ईसा को जेहोवा का पुत्र मानने की भूल कर रहे हैं| और तो और चुनाव द्वारा नमो के चुने जाने को अपनी विजय मानने की भूल कर रहे हैं| अज़ान को पूजा का निमंत्रण और मस्जिद को पूजा स्थल मानने की भूल कर रहे हैं|

मानवजाति के अस्तित्व की रक्षा के लिए क्या माननीय प्रधानमंत्री नमो हमारी सहायता करेंगे?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2014/04623

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 Date Aug. 2, 2014.


ĉ
AyodhyaP Tripathi,
Aug 2, 2014, 7:07 AM
Ċ
AyodhyaP Tripathi,
Aug 2, 2014, 7:06 AM
Comments