Muj14W31A Sahaaranpur Danga



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 31A, Aug 01-07, 2014. This issue is Muj14W31A Sahaaranpur Danga


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W31A Sahaaranpur Danga

आर्यावर्त सरकार की विज्ञप्ति.

तकिय्या का सहारा न लें जत्थेदार

मुख्य जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने दंगे की निंदा करते हुए कहा कि सिख समाज सर्वधर्म(?) का सम्मान करता है। धार्मिकस्थल पर किसी भी धर्म का अच्छा व्यक्ति, कभी हमला नहीं करता। ऐसा सिर्फ आपराधिक प्रवृति और गुंडा तत्व ही करता है।

मैं ज्ञानी जी की टिप्पणी का विरोध करता हूँ| ज्ञानी जी बताएं कि अज़ान, जो मस्जिदों से चिल्लाई जाती है, और खुत्बों में सर्वधर्मसमभाव के लिए कौन सा शब्द है? अब्रह्मी संस्कृतियों को मान्यता देते ही अविश्वासी अपने सभी अधिकार खो देते हैं| इस्लाम और ईसाइयत गुरुद्वारा के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करते| [(बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. पूरी अज़ान के ज्ञान के लिए नीचे की लिंक पर क्लिक करें,

http://www.aryavrt.com/azaan-masjid-church-aur-snvidhan

एलिजाबेथ हमको तिल तिल कर मिटा रही है और सत्ता के लोभ में १९४७ से ही हमारे नेता, चाहे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के, हमें ही नहीं, ईसाई व मुसलमान को भी धोखा दे रहे हैं|

पाकपिता मोहनदास करमचन्द गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभ पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर में एक समानता थी| सभी बैरिस्टर थे| सभी को भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम१९४७का पूरा ज्ञान था| आक्रांता अंग्रेजों ने इस अधिनियम को हॉउस ऑफ कामन्स में सत्ता के हस्तांतरण के पूर्व १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित भारत का दो उपनिवेशों (भारत तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को भारत बंट गया। इस उपनिवेश बनाने वाले अधिनियम को धूर्तता पूर्वक आज तक स्वतंत्रता कहा जा है| तब से लेकर आज तक किसी ने इस अधिनियम का विरोध नहीं किया|

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

इसके बाद सन १९४८ में बने बर्तानिया कानून के अंतर्गत हर भारत या पाकिस्तान वासी बर्तानिया की प्रजा है और यह कानून भारत या पाकिस्तान के तथाकथित सार्वभौम गणराज्य प्राप्त कर लेने के पश्चात भी लागू हैl

उपरोक्त लिंक के अध्ययन से आप को स्पष्ट हो जायेगा कि इमाम प्रतिदिन आप व विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी अविश्वासियों के हत्या की, नारियों के बलात्कार की, लूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैं| राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी लोगों ने भय वश नहीं, बल्कि मानवमात्र को दास बनाने के रणनीति के अंतर्गत, अपना जीवन, माल, नारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैंई०स० ६३२ से आज तक इस्लाम और मस्जिद का एक भी विरोधी सुरक्षित अथवा जीवित नहीं है| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, या अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

१५ अगस्त १९४७ से आज तक मात्र आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों ने उपनिवेश का विरोध किया है, जिसके कारण आर्यावर्त सरकार ने ९ अधिकारी सन २००८ से जेलों में बंद हैं|

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

हाफिज सईद ने इंडिया के विरुद्ध अंतिम युद्ध की घोषणा की है| यह कठोर सच्चाई है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त असीमित मौलिक मजहबी अधिकार से सईद इंडिया को मिटाने में सफल हो जाएंगे, लेकिन फिर भी इंडिया और पाकिस्तान की भांति विश्व के ५३ ईसाई व मुसलमान देश आज भी एलिजाबेथ के दास हैं| इंडिया को समाप्त करने के बाद भी हाफिज सईद सहित पाकिस्तान व अन्य उपनिवेशो के मुसलमान एलिजाबेथ के दास ही रहेंगे| वस्तुतः इंडिया को मिटा कर मुसलमान अपना ही अहित करेंगे| उनका हज अनुदान, मुअज्जिनों, इमामों व मौलवियों का वेतन बंद हो जायेगा| उनका अल्पसंख्यक आयोग और मुस्लिम निजी कानून भी बेमानी हो जायेगा| उनको फिरभी एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति नहीं मिलेगी| न अल्लाह मिलेगा और न विशाले सनम|

माउन्टबेटन ने मानवमात्र से उन की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया| मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७). माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर, मानवमात्र को कत्ल होने के लिए, सदा सदा के लिए मानवमात्र की धरती छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया|

मुसलमान इतिहासकार सगर्व लिखते हैं कि मुहम्मद ने कितने शांतिप्रिय नागरिकों को कत्ल किया. कितने मंदिर तोड़े. कितनी अबला नारियों के गहने लूटे, उनके सगे-सम्बन्धियों को कत्ल किया और उसी रात उनका बलात्कार किया. लेकिन जब सर्बो ने मुसलमान नारियों का बलात्कार किया और जब लेबनान के नागरिक ठिकानों पर इजराएल ने बमबारी की तो मुसलमानों को मानवाधिकार याद आ गया. अफगानिस्तान और इराक पर अमेरिकी आधिपत्य से मुसलमान आतंकित हैं. लेकिन मुसलमान भूल गए हैं कि जहां अल्लाह ने मुसलमानों को सृष्टि सौँप रखी है (कुरान २:२५५) वहीँ ईसा ने ईसाइयों को हर उस व्यक्ति को कत्ल करने का अधिकार दे रखा है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता. भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व (बाइबल, लूका १९:२७). मुसलमानों को भय वैदिक सनातन संस्कृति से नहीं है| पाकिस्तान एलिजाबेथ का उपनिवेश है और मुसलमान एलिजाबेथ के दास| मुसलमान विचार करें कि तब क्या होगा, जब ईसाई मुसलमानों को कत्ल कर विश्व के सभी इस्लामी राज्यों पर आधिपत्य जमा लेंगे? अकेले इजराएल से तो मुसलमान निपट नहीं पाए, सभी ईसाई राज्यों से मुसलमान कैसे निपटेंगे?

पाकिस्तान व इंडिया सहित ५३ ईसाई व मुसलमान देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं| {भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. मुसलमानों का ईसाई शोषण कर रहे हैं| सभी मात्र इसलिए बचे हुए हैं कि वैदिक सनातन संस्कृति मिटी नहीं है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी, तुर्की के खलीफा, ईराक के सद्दाम और अफगानिस्तान के भांति इस्लाम मिट जायेगा और अल्लाह कुछ नहीं कर पायेगा| लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होगी| तब मानवजाति को मिटाने के लिए कथोलिक और प्रोटेस्टेन्ट आदि के बीच युद्ध होगा|

अतएव ज्ञानी जी और मुसलमानों को चाहिए कि वे पहले उपनिवेश से मुक्ति लें| हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी सिक्खों और मुसलमानों से कंधा से कंधा मिला कर लड़ेंगे| आप लोग ईसाइयों' से लड़ कर यह फैसला कर लें कि इंडिया पर अधिकार मुसलमानों या खालिस्तान का रहेगा अथवा ईसाइयों' का| तब तक हम विकल्पहीन वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी विजेता को विवश होकर अपनी बहन बेटियों को जयमाला देकर प्रतीक्षा कर रहे हैं और साथ में अपना सर्वस्व दहेज में दे देंगे|

सिक्ख और मुसलमान बताएं कि क्या उन्हें आर्यावर्त सरकार का प्रस्ताव स्वीकार है?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2014/04557

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jul 31, 2014, 2:25 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Jul 31, 2014, 2:24 AM
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