Muj14W31 SWATNTRYA YUDDH



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 31, Aug 01-07, 2014. This issue is Muj14W31 SWATNTRYA YUDDH


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W31 SWATNTRYA YUDDH

दासता से मुक्ति हेतु युद्ध.

पाकपिता मोहनदास करमचन्द गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभ पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर में एक समानता थी| सभी बैरिस्टर थे| सभी को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७का पूरा ज्ञान था| आक्रांता अंग्रेजों ने इस अधिनियम को हॉउस ऑफ कामन्स में सत्ता के हस्तांतरण के पूर्व १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित भारत का दो उपनिवेशों (भारत तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को भारत बंट गया। तब से लेकर आज तक किसी ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७ का विरोध नहीं किया|

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

इसके बाद सन १९४८ में बने बर्तानिया कानून के अंतर्गत हर भारत या पाकिस्तान वासी बर्तानिया की प्रजा है और यह कानून भारत या पाकिस्तान के तथाकथित सार्वभौम गणराज्य प्राप्त कर लेने के पश्चात भी लागू हैl

२२ जून १९४८ को भारत के दूसरे गवर्नर के रूप में चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने निम्न शपथ ली l “मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यथाविधि यह शपथ लेता हूँ कि मैं सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी के प्रति कानून के मुताबिक विश्वास के साथ वफादारी निभाऊंगा, एवं मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यह शपथ लेता हूँ की मैं गवर्नर जनरल के पद पर होते हुए सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी (यानी एलिजाबेथ) की यथावत सेवा करूँगा l ”

यानी आप को कोई स्वतंत्रता नहीं मिली| इंडिया का ईसाई व मुसलमान सहित हर नागरिक एलिजाबेथ का दास है| लेकिन जो भी इसे दासता कहेगा, उसे भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधिकार से राष्ट्रपति/ राज्यपाल जेल भेज देंगे|

केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७). स्वर्ग उन्हें ही मिलेगा, जो बपतिस्मा ले| एलिजाबेथ के साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी ईसा को अर्मगेद्दन द्वारा धरती पर केवल अपनी पूजा करानी है| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा और ईसाइयत की बारी है|

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी खूनी इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है|

यही सब साम्प्रदायिक सद्भाव, सर्वधर्मसमभाव, अनेकता में एकता, गंगा यमुनी संस्कृति और ईसाई व मुसलमान की दया और सेवा है|

किसी के पास जीने का अधिकार नहीं है| ईसाई मुसलमान को कत्ल करेगा और मुसलमान ईसाई को| शासन करने का अधिकार मात्र जारज और प्रेत ईसा के पास है| इस स्थिति को पाकपिता गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर और वीर सावरकर ने भी स्वीकार किया और ईसाई व मुसलमान सहित सभी दास आज भी स्वीकार कर रहे हैं| हम आर्यावर्त सरकार के लोग इस षड्यंत्र को उजागर कर रहे हैं| इसीलिए हमारे ९ अधिकारी सन २००८ से जेलों में बंद हैं|

जातिसंहारकों का संरक्षणपोषण व संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का संकलन किया गया है| शासक और लोकसेवक तभी तक सत्ता और सेवा में रहेंगे, जब तक एलिजाबेथ का हित साधते यानी ईसा के राज्य का संरक्षणपोषण व संवर्धन करते रहेंगे| यानी अपना ही सर्वनाश सुनिश्चित करते रहेंगे|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी उपरोक्त संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है!

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

बाइबल, लूका १९:२७ का आदेश है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|". आप एलिजाबेथ के दास हैं. एलिजाबेथ ने ईसाई व मुसलमान को ‘अल्पसंख्यक’ सनातनियों के जातिसंहार के लिए घोषित किया है| जब सनातनियों का संहार हो जायेगा, तब मुसलमानों और गैर कैथोलिक ईसाइयों का जातिसंहार होगा|

चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| इनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६

प्रभाव: इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश (डोमिनियन) है| {{भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अ० ६(ब)(||)} व कामनवेल्थ मेम्बर}. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ ने १५ अगस्त, १९४७ से स्वातन्त्रय युद्ध को अपराध बना दिया है.

ईमाम काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा करता है. स्वयं दास है और मानवमात्र की स्वतंत्रता छीनता है. ईमामों को दंडित करने के स्थान पर एलिजाबेथ ईमामों को वेतन दिलवा रही है. जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का न्यायपालिका ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५प१०४) ने भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण भी दिया है| हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/) यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च  प्रजातंत्र के चारो स्तम्भों द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है|

लेकिन १५ अगस्त १९४७ से आज तक किसी ने, यहाँ तक कि किसी मुजाहिद ने भी नहीं, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद,  अज़ान और खुत्बों का विरोध नहीं किया| किसी मौलवी ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ के विरुद्ध फतवा नहीं दिया और न कोई तालिबानी भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ के विरुद्ध लड़ा. सब ने अपने अनुयायियों के साथ विश्वासघात किया और पाठक भी पीछे नहीं हैं| आप विरोध कर भी नहीं सकते| मात्र हमारी गुप्त सहायता कर सकते हैं|

मस्जिद और अज़ान का विरोध करने के कारण दिल्ली सरकार ने मुझ पर अब तक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति के बाद भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन ४९ अभियोग चलाए| अन्य तो निपट गए, लेकिन ४ आज भी लम्बित हैं| यह संस्कृतियों का युद्ध है, जिसे हम १९९१ से लड़ रहे हैं| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है." अतएव हमारी मुक्ति का मार्ग इस्लाम और ईसाइयत का समूल नाश है|

हम काफ़िर लोग संस्कृतियों के विरुद्ध युद्ध लड़ रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी हमें कत्ल करेंगे| आत्म रक्षा हमारा मानवाधिकार है| हम अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं| एलिजाबेथ के उपनिवेश के दासों को हमारा उत्पीड़न करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है| हम मानवमात्र को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए धरती के प्रत्येक मनुष्य से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके – जिए तो शासकों का दास बनकर|

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

ईसाइयत और इस्लाम संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| लोकसेवक यह न भूलें कि एलिजाबेथ मानवजाति को मिटाने में लिप्त है| आज जीविका, पद और प्रभुता के लोभ में जो अपराध और पाप लोकसेवक कर रहे हैं, वह उनका ही काल बन जायेगा| इसका प्रमाण बाबरी प्रकरण और मुज़फ्फरनगर में लव जिहाद प्रकरण में हस्तक्षेप करने के कारण लोकसेवकों के सामने आया है| यह युद्ध लोकसेवक नहीं लड़ सकते| वे गुप्त रूप से हमारी सहायता ही कर सकते हैं|

युद्ध भूमि में भारत कभी नहीं हारा| लेकिन अपने ही जयचंदों से हारा है| समझौतों से हारा है| अपनी मूर्खता से हारा है| उन्हीं समझौतों में सत्ता के हस्तांतरण का समझौता भी है| पाकिस्तान गाँधी की लाश पर बन रहा था| लेकिन इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट १९४७ का न गाँधी ने विरोध किया और न जिन्ना ने| दोनों ने ब्रिटिश उपनिवेश यानी ब्रिटेन की दासता स्वीकार की| मुझे तरस आता है, जब मुसलमान कश्मीर को उपनिवेश इंडिया से उपनिवेश पाकिस्तान में मिलाने के लिए रक्त बहाते हैं|

जिस पाकपिता ने देश को १९४७ में ही   ब्रिटिश उपनिवेश बना दिया – उसके नर्क खाने में माननीय प्रधानमंत्री नमो को जाने में तनिक भी लज्जा नहीं आई| क्यों कि माननीय प्रधानमंत्री नमो के पास समझ नहीं है| अन्यथा एलिजाबेथ का इंडियन गुलाम पाकिस्तानी गुलाम नवाज़ को इंडिया न बुलाता| अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है माननीय प्रधानमंत्री नमो से हमें बड़ी आशाएं हैं| शत्रु के साथ साम, दाम, दंड और भेद की नीति अपनानी पड़ती है| यह युद्ध माननीय प्रधानमंत्री नमो लड़ भी नहीं सकते मात्र आर्यावर्त सरकार के सैनिक लड़ सकते हैं| हमारे ९ अधिकारी मालेगांव बम कांड में २००८ से जेलों में बंद हैं| हम मानवजाति को एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति दिलाना चाहते हैं|

सेना आप की रक्षक हैभारत में सेना का मनोबल तोड़ने के लिए१९४७ से ही षड्यंत्र जारी है| १९४७ में इंडियन सेना पाकिस्तानियों को पराजित कर रही थी| सेना वापस बुला ली गई| सैनिक हथियार बनाने और परेड करने के स्थान पर जूते बनाने लगे| परिणाम १९६२ में चीन के हाथों पराजय के रूप में आया| १९६५ में जीती हुई धरती के साथ हम प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को गवां बैठे| १९७१ में पाकिस्तान के ९३ हजार युद्ध बंदी छोड़ दिए गए लेकिन भारत के लगभग ५४ सैनिक वापस नहीं लिये गए| एलिजाबेथ के लिए इतना कुछ करने के बाद इंदिरा और राजीव दोनों मारे गए| कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को वापस जाने दिया गया| अटल विरोध करते तो वे भी मारे जाते| एडमिरल विष्णु भागवत के बाद अब वीके सिंह का नम्बर लगा है| नमो या तो एलिजाबेथ की दासता करेंगे और वैदिक सनातन संस्कृति मिटायेंगे अथवा एलिजाबेथ नमो को कत्ल करवा देगी| आप लोग नमो की जान के पीछे क्यों पड़े हैं?

पाकपिता गाँधी को पहचानने में माननीय प्रधानमंत्री नमो सहित आप आज भी भूल कर रहे हैं| जेहोवा और अल्लाह को ईश्वर मानने की भूल कर रहे हैं| उपनिवेश को स्वतंत्रता मानने की भूल कर रहे हैं और भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा व्यक्त करने की भूल कर रहे हैं| जिसके बाप का पता नहीं है, उस प्रेत ईसा को जेहोवा का पुत्र मानने की भूल कर रहे हैं| और तो और चुनाव द्वारा नमो के चुने जाने को अपनी विजय मानने की भूल कर रहे हैं| अज़ान को पूजा का निमंत्रण और मस्जिद को पूजा स्थल मानने की भूल कर रहे हैं|

बीती को भूल जाइये| चंद दिनों पूर्व मलयेशियन एयरलाइन्स धोखे से धराशायी हो गया. निशाना माननीय प्रधानमंत्री नमो पर था| ईश्वर ने माननीय प्रधानमंत्री नमो को बचा लिया. लेकिन बकरे की माँ कब तक खैर मना पायेगी? माननीय प्रधानमंत्री नमो से हमारा आग्रह है कि जजों को कानून का पालन करने के लिए विवश करें| हमारे ९ अधिकारी स्वतः छूट जायेंगे| हमारी गुप्त सहायता करें| मानवता की सहायता करने का पुण्य अर्जित करें|

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ और १९४९ के भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के एक भी विरोधी का किसी को ज्ञान नहीं है! जानते हैं क्यों? क्यों कि अब्रह्मी संस्कृतियों का एक भी आलोचक या विरोधी जीवित नहीं छोड़ा जाता| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, या अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

मानवजाति के अस्तित्व की रक्षा के लिए क्या माननीय प्रधानमंत्री नमो हमारी गुप्त सहायता करेंगे?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

 

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