Muj14W30AY Pragyaki AbhiyogVapsi



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE , 2014. This issue is Muj14W30AY Pragyaki AbhiyogVapsi


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W30AY Pragyaki AbhiyogVapsi

प्राइवेट प्रतिरक्षा का हनन.

विषय; प्रज्ञा व उनके सहयोगियों के अभियोग वापसी हेतु आंदोलन.

महामहिम प्रणब दा, राष्ट्पति, दिल्ली-११०००४.

ईसाई व मुसलमान देश, पाकिस्तान व इंडिया सहित एलिजाबेथ के ५३ उपनिवेश हैं| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. महामहिम एलिजाबेथ के भाड़े के आतंकवादी और प्रथम दास हैं| महामहिम ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और कानूनों के संरक्षणपोषण व संवर्धन की शपथ ली है| एलिजाबेथ ने मानवजाति को मिटाने के लिए महामहिम को मौत के फंदे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन खूनी इस्लाम और ईसाइयत को संरक्षण देने के लिए विवश कर दिया है|

  मेरा मानना है कि हम आज भी भटक रहे हैं| इस भटकाव से हट कर हमने अपनी लड़ाई को उस मूल बिंदु पर ला कर खड़ा कर दिया है, जहां से हम भटके थे. हम ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया हैजिसे १५ अगस्त१९४७ से छल से रोका गया है|

लेकिन हमारा शत्रु हमसे अधिक चतुर है| उसने हमारे ९ अधिकारियों को, उस अपराध का आरोप लगा कर सन २००८ से, जेलों में बंद कर रखा है, जो अपराध है ही नहीं!

न्यायविद ही हमारी पीड़ा को भली भांति समझ सकते हैं| क्यों कि न्यायविद भलीभांति जानते हैं कि भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ प्रत्येक नागरिक को आत्म रक्षा का कानूनी अधिकार देती है और आत्मरक्षा के लिए किया गया कोई प्रयत्न या कार्य भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अंतर्गत अपराध नहीं है| इसीलिए हमने बाबरी ढांचा गिराया है और हम जानना चाहते हैं कि मस्जिदों में विष्फोट करना अपराध कैसे है?

इस्लाम अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपाता| मस्जिदों से प्रतिदिन ५ बार नियमित रूप से और नियमित समय पर लाउडस्पीकर पर अज़ान यानी ईशनिंदा का प्रसारण किया जाता है और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं| काफिरों को अज़ान और ‘कलिमा’ द्वारा चेतावनी दी जाती है, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “केवल अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|” अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा, सर्वधर्म समभाव और उपासना की स्वतंत्रता न माने, तो उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश हैं.

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा हैधरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार हैजो काफ़िर इस कठोर सच्चाई का विरोध करेगा, उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी जायेगी. उसका नार्को टेस्ट किया जायेगा. उसके मुंह में गोमांस ठूसा जायेगा. उसे जेल में जहर दिया जायेगा, ताकि वह घुट घुट कर मरे. हमारी साध्वी प्रज्ञा एवं कुलपति स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ के साथ यही किया गया है. सभी जज जानते हैं. क्या कोई जज न्याय कर सकता है?

खुत्बे, ‘कलिमा’ पढ़ना और अज़ान का प्रसारण भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती अपराध है| फिर भी मुसलमानों पर लागू नहीं होता| लेकिन इनका विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| क्यों कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत ईसाई व मुसलमान को पद, प्रभुता और पेट के लोभ में राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षणपोषण व संवर्धन के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|  अज़ान और खुत्बों के विरुद्ध जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआरकलकत्ता१९८५प१०४)

ईशनिंदा करने और कत्ल करने की शिक्षा देने वाले मुअज्ज़िन, ईमाम और मौलवी, जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का सर्वोच्च न्यायलय ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/).

यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च  लोक लूट तंत्र के चारो स्तम्भों द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है| इसलिए हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव मस्जिद व अन्य विष्फोट के अभियुक्त हैं|

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

सीधा सा मतलब है कि काफ़िर के लिए प्राण रक्षा अपराध बना दिया गया है और मोमिन के लिए प्राण लेना असीमित मौलिक मजहबी अधिकार|

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

सरकार जान – माल की रक्षा के लिए है| हम हत्यारी, लुटेरी और बलात्कारी संस्कृतियों और उपनिवेश को मिटाने के लिए लड़ रहे हैं| यह लड़ाई माननीय प्रधानमंत्री नमो नहीं लड़ सकते, मात्र गुप्त सहयोग दे सकते हैं|

सभी उपनिवेश ईसाई या इस्लामी राष्ट्र हैं| यह समझ से परे है कि स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने वाले ये लोग एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति के लिए क्यों नहीं लड़ते? सभी मात्र इसलिए बचे हुए हैं कि वैदिक सनातन संस्कृति मिटी नहीं है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी, तुर्की के खलीफा, ईराक के सद्दाम, ओसामा और अफगानिस्तान के भांति इस्लाम मिट जायेगा और अल्लाह कुछ नहीं कर पायेगा| लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होगी| तब मानवजाति को मिटाने के लिए कथोलिक और प्रोटेस्टेन्ट आदि के बीच युद्ध होगा| इस मानव संहार से बचना हो तो आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

१४ जुलाई, २०१४य.

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jul 14, 2014, 11:34 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Jul 14, 2014, 11:33 AM
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