Muj14W30 196CrPC Upnivesh



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 30, Jul 25-31, 2014. This issue is Muj14W30 196CrPC Upnivesh


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W30 196CrPC Upnivesh

विषय; अभियोग रोहिणी के MM वि० श्री संदीप गुप्ता के न्यायालय का है| एलिजाबेथ के दबाव के कारण बारम्बार अनुरोध के बाद भी दिल्ली सरकार हम पर थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ के अधीन चले अभियोग वापस न ले सकी| NBW के बाद ३०-१-१४ को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ८२ के अधीन कार्यवाही भी हो गई|

महामहिम उप राज्यपाल, दिल्ली-११००५४.

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६

प्रभाव: इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश (डोमिनियन) है| {{भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अ० ६(ब)(||)} व कामनवेल्थ मेम्बर}. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ ने १५ अगस्त, १९४७ से स्वातन्त्रय युद्ध को अपराध बना दिया है.

पाकपिता मोहनदास करमचन्द गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभ पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर में एक समानता थी| सभी बैरिस्टर थे| सभी को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७का पूरा ज्ञान था| सबने छल किया| आक्रांता अंग्रेजों ने इस अधिनियम को हॉउस ऑफ कामन्स में सत्ता के हस्तांतरण के पूर्व १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित भारत १५ अगस्त १९४७ को दो उपनिवेशों (भारत तथा पाकिस्तान) में बंट गया।

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

इसके बाद तथाकथित सार्वभौम गणराज्य बनने के बाद भी सन १९४८ में बने बर्तानिया कानून के अंतर्गत हर भारत या पाकिस्तान वासी बर्तानिया की प्रजा है.

२२ जून १९४८ को भारत के दूसरे गवर्नर के रूप में चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने निम्न शपथ ली l “मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यथाविधि यह शपथ लेता हूँ कि मैं सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी के प्रति कानून के मुताबिक विश्वास के साथ वफादारी निभाऊंगा, एवं मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यह शपथ लेता हूँ की मैं गवर्नर जनरल के पद पर होते हुए सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी की यथावत सेवा करूँगाl ”

ईसाई व मुसलमान जातिसंहारकों का संरक्षणपोषण व संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत पद, प्रभुता और पेट के लोभ में राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षणपोषण व संवर्धन के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| महामहिम तभी तक सत्ता में रहेंगे, जब तक एलिजाबेथ का हित साधते यानी ईसा के राज्य का संरक्षणपोषण व संवर्धन करते रहेंगे|

ईमाम काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करता है. स्वयं दास है और आप की स्वतंत्रता छीनता है. ईमामों को दंडित करने के स्थान पर एलिजाबेथ ईमामों को वेतन दिलवा रही है. जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का न्यायपालिका ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५प१०४) ने भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण भी दिया है| हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/) यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च  न्यायपालिका द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है|

लेकिन १५ अगस्त १९४७ से आज तक किसी ने, यहाँ तक कि किसी मुजाहिद ने भी नहीं, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ का विरोध नहीं किया| किसी मौलवी ने फतवा नहीं दिया और न कोई तालिबानी भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ के विरुद्ध लड़ा. सब ने अपने अनुयायियों के साथ विश्वासघात किया. आप विरोध कर भी नहीं सकते| मात्र हमारी गुप्त सहायता कर सकते हैं|

महामहिम जी! हम आप को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए लड़ रहे हैं और एलिजाबेथ की सरकार ने आप के सर्वनाश के लिए मुझ पर अब तक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति के बाद भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन ४९ अभियोग चलाए| ४ आज भी लम्बित हैं| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है." हम आप का अहित नहीं करेंगे| लेकिन एलिजाबेथ आप को मिटाने के लिए आप का ही आज भी उपयोग कर रही है| आत्मघात न करें. आप से आग्रह है कि मेरे अभियोग वापस लें और विश्व के ५३ उपनिवेशों को एलिज़ाबेथ के चंगुल से मुक्त कराकर पुण्य अर्जित करने में हमारा सहयोग करें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2014/04256

 

Comments