Muj14W11 Upniveshke viruddhYuddh



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 11, Mar 07-13, 2014. This issue is Muj14W11 Upniveshke viruddhYuddh


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W11 Upniveshke viruddhYuddh

उपनिवेश की जंजीरों से मुक्ति हेतु अंतरराष्ट्रीय संगठन|

International Organisation for freedom from Dominion

उपनिवेश किसे कहते हैं?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं जहाँ उस राज्य की जनता निवास करती है। यानी महामहिम ईसा के दास हैं|

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

सत्ता के हस्तांतरण के संधि के पूर्व ही आक्रांता अंग्रेजों ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७ को हॉउस ऑफ कामन्स में १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित इंडिया का दो उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को इंडिया बंट गया। गांधी और माउंटबेटन मिलकर नरसंहार और नारियों का बलात्कार कराते रहे.

लेकिन १५ अगस्त १९४७ से आज तक किसी हिंदू या मुसलमान ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का विरोध नहीं किया| किसी मौलवी ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध फतवा नहीं दिया और न कोई तालिबानी भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध लड़ा. सब ने अपने आश्रय दाता वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के साथ विश्वासघात किया| किसी हिंदू या मुसलमान के पास एलिजाबेथ का विरोध करने का साहस नहीं है|

कोई कर भी नहीं सकता. क्योंकि उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. इस कानून के संरक्षणपोषण व संवर्धन करने के लिए, पद, प्रभुता व पेट के लोभमें, राष्ट्रपति व राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| यानी कि उपनिवेश का विरोध किया नहीं कि राष्ट्रपति और राज्यपाल विरोधी को फांसी दिलवाने के लिए विवश हैं. यही आज़ादी है, जिसका जश्न इंडियन लोग १५ अगस्त को १९४७ से ही मना रहे हैं.

इंडिया और पाकिस्तान सहित ५३ देश आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं. उपनिवेशवासी डायन जेसुइट एलिजाबेथ के दास हैं. दास के पास अधिकार नहीं होते. २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द (गांधी) और माउंटबेटन के बीच समझौते के अधीन इंडिया के मुसलमान व ईसाई सहित सभी उपनिवेशवासियों का सब कुछ एलिजाबेथ का ही है. उपनिवेशवासियों की स्थिति किसान के पशु की भांति है, जिसका कुछ भी नहीं होता! यदि इंडिया आगे भी एलिजाबेथ का उपनिवेश बना रहा तो एलिजाबेथ उपनिवेशवासियों को कत्ल करेगी (बाइबल, लूका १९:२७) उनका मांस खायेगी और रक्त पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). उपनिवेशवासियों के नारियों का उनके पुरुषों के आँखों के सामने बलात्कार कराएगी (बाइबल, याशयाह १३:१६). वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से. उपनिवेशवासी कुछ न कर पायेंगे! अधिक विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:- 

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

कौन है एलिजाबेथ?


एलिजाबेथ ईशु की उपासक है, जिसने कहा, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७). 

सबको अपने अधीन कराने वाला, (बाइबल, लूका १९:२७), मनुष्य के पुत्र का मांस खाने लहू पीने की शिक्षा देने वाला (बाइबल, यूहन्ना :५३), बपतिस्मा न लेने वालों को नर्क भेजने वाला, तलवार चलवाने वाला (बाइबल, मत्ती १०:३४), धरती पर आग लगवाने वाला (बाइबल, लूका १२:४९), परिवार में शत्रुता पैदा कराने वाला {(बाइबल, मत्ती १०:३५-३६) (बाइबल, लूका १२:५१-५३)}, बेटी से विवाह कराने वाला (बाइबल, , कोरिन्थिंस :३६) मनुष्य को भेंड़ बनाने वाला सा, जिस डायन का पूज्य है, आप उस के उपनिवेश में जीवित कैसे बच सकते है?

अमेरिका आज भी है, लेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई| बेबीलोन, अफ्रीका और आष्ट्रेलिया आदि आज भी हैं लेकिन वहाँ के आदिवासी और उनकी संस्कृति मिट गई| इंडिया उपनिवेश है और इंडिया का हर उपनिवेशवासी एलिजाबेथ की प्रजा! एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगी, जजों और लोकसेवकों सहित आप लोगों का मांस खाएगी और लहू पियेगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). इंडिया तो रहेगा| लेकिन द्रविणों सहित वैदिक सनातन संस्कृति और भारत के मूल निवासी न रहेंगे| यदि रहेंगे भी तो दास बन कर|

संविधान ने हमे उपासना की स्वतंत्रता दी है| हम मनुष्य के पुत्र का मांस खाने और लहू पीने (बाइबल, यूहन्ना :५३वाली एलिजाबेथ को सत्ता में क्यों रहने दें?

५३ उपनिवेश देशों की मल्लिका जेसुइट एलिजाबेथ ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

“… मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै उनकी आयु का विचार करूंगी, लिंग का, परिस्थिति का| मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|”

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

अतः एलिजाबेथ हर गैर कैथोलिक की हत्या कराएगी|

दास बनाने की विधि

मनुष्य को बिनायुद्ध दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, उसको वीर्यहीन करना| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक विधि कौटुम्बिक व्यभिचार, सगोत्रीय यौन सम्बन्ध, यौनशिक्षा, सहजीवन, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक सम्बन्ध को राजकीय संरक्षण देकर मनुष्य को वीर्यहीन करना है

http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

येहोवा और अल्लाह मूसा और मुहम्मद की छलरचनायें हैं| इनका अस्तित्व नहीं है. येहोवा और अल्लाह कीं रचना मनुष्य को खतना अथवा यौनाचार की छूट द्वारा वीर्यहीन कर दास बनाने के लिए की गई है. जहाँ वैदिक सनातन संस्कृति के गुरुकुलों में निःशुल्क वीर्यरक्षा की शिक्षा दी जाती है, वहीं मैकाले के स्कूल महंगी यौनशिक्षा देते हैं और मकतब कत्ल करने और नारी बलात्कार की| जीवन, धन और सुख की मृग मरीचिका में मनुष्य विरोध नहीं करते. मनुष्य की मुक्ति का मार्ग, गुरुकुलों का पुनर्जीवन है|

मूसा (बाइबलउत्पत्ति १७:११) और मुहम्मद ने वीर्य हीनता को मानवजाति के सर्वनाश के स्तर तक महिमामंडित कर दिया है. अनैतिक पुत्र ईसा को जन्म देने वाली मरियम पूजनीय है और ईसा यहोवा का घोषित एकलौता पुत्र हैमानवमात्र को पापी घोषित कर रखा है. स्वयं शूली पर चढ़ने से न बचा सका फिर भी सबका मुक्तिदाता है|

जिसके आराध्यदेव ईसा के बाप का ही पता नहीं है, जिसके मजहब के घर-घर में कुमारी माताएं मिलती हैं और जो स्वयं जार्ज यानी जारज (जिसके बाप का पता नहीं होता, उसे जारज कहते है) है वह आप के संतों को रोज यौन शोषण में प्रताड़ित करा रही है| आइये आतताई मजहबों अब्रह्मी संस्कृतियों के संरक्षक भारतीय संविधान को मिटायें|

मूसा ने वीर्यक्ष्ररण को बाइबल में महिमामंडित किया, और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.बाइबल, उत्पत्ति १७:११. अनैतिक पुत्र को जन्म देने वाली मरियम पूजनीय है और (GOD) ईसा यहोवा का एकलौता पुत्र है|

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह रिवाज है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य बात यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त भी नहीं है. अतः मुसलमानों को मेरी नेक सलाह है कि वे अपनी भावी पीढ़ी का खतना न करें| भावी पीढ़ी के अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति के जनक वीर्य को नष्ट न होने दें| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है| वीर्यवान बन कर ही मुसलमान अपनी रक्षा कर पाएंगे|

जहां मोमिन मस्जिदों से काफिरों के इष्टदेवों की प्रतिदिन, निश्चित ५ समय पर निंदा करता है और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देता है, वहीं प्रेत जारज(जार्ज) ईसा हर उस व्यक्ति को कत्ल कराता है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता| तथाकथित पैगम्बर मूसा, ईसा और मुहम्मद तो रहे नहीं, अपनी वरासत सुल्तानों, राजाओं और शासकों को दे गए हैं, जो पुरोहितों, ईमामों व मीडिया कर्मियों का शोषण कर रहे हैं, जिसके कारण सत्य पर पर्दा पड़ा है| दूसरे की सम्पत्ति की चोरी और नारियों के यौन शोषण के लोभ ने मानव जाति को तबाह कर रखा है|

ईराक के सद्दाम रहे हों या ओसामा अथवा उनका इस्लाम, ईसावाद उनका दोहन कर रहा है| दोनों भष्मासुर ईसाइयों ने ही तैयार किये| काम लेकर ठिकाने लगा दिया| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो जैसे इस्लाम के खलीफा मिटे, वैसे ही ईसाई इस्लाम को भी मिटा देंगे| मुसलमान और उनका इस्लाम इस लिए जीवित हैं कि वैदिक सनातन संस्कृति मिटी नहीं है|


ब्रह्मचर्य और वीर्य की महिमा

प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| उसको जन्म के साथ ही प्राप्त वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। मानव यानी प्रत्येक व्यक्ति स्वयं संप्रभु है। उसका व्यक्तित्व अत्यन्त महिमावान है - इसलिए हे मानवों! आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्ति को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा।

आप को कौन सी सरकार चाहिए? वैदिक राजतन्त्र - जिस में १८३५ तक मैकाले को पूरे भारत में एक भी चोर या भिखारी नहीं मिला या लोकतंत्र जिसमे सभी चोर और भिखारी हैं| वीर्यवान बनाने वाले निःशुल्क शिक्षा केन्द्र गुरुकुल चाहिए या मैकाले के महंगे यौनशिक्षा केन्द्र?

एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिस व्यवस्था में महाराज अश्वपतिने कहा था

न  मे  स्तेनो  जनपदे   न   कदर्यो  न  मद्यपः।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

दूसरी ओर राजतन्त्र जिसमें मैकाले को एक भी चोर या भिखारी नहीं मिला. ब्रिटिश इंडियन उपनिवेश में कुमारी माँ मरियम वन्दनीय है और मरियम की अवैध सन्तान ईसा, जिसका खून ही मदिरा है, जिसको पिए बिना मनुष्य मे जीवन ही नहीं!, (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) ईश्वर का एकमात्र वह पुत्र, जो स्वयं को शूली पर चढ़ने से न बचा सका, सबका मुक्तिदाता है| अब्रह्मी संस्कृतियों ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६).एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिसके राम चरित मानस की पंक्तियाँ उद्धृत कर रहा हूँ,

अनुज बधू भगिनी सुत नारी| सुनु सठ कन्या सम ए चारी|

इन्हहिं कुदृष्टि बिलोकइ जोई| ताहि बधें कछु पाप न होई||

राम चरित मानस, किष्किन्धाकाण्ड; ८;४

अर्थ: [श्री रामजी ने कहा] हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्रवधू और कन्या – ए चारों समान हैं| इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता और दूसरी ओर अब्रह्मी संस्कृतियां जिनमें बेटी व पुत्रवधू से विवाह की छूट है| कुमारी माएं प्रायः ईसाइयों के हर घर मिलती हैं| यहाँ तक कि मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा के अनुच्छेद २५(२) का कथन है,विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”.

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar 

क्या उपनिवेश महंगे यौनशिक्षा प्रणाली को बदल कर भावी पीढ़ी को सम्प्रभु बनाने वाले ब्रह्मचर्य के निःशुल्क शिक्षाकेंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में रूचि लेंगे? निर्णय आप स्वयं करें| आप अपने देश की आजादी का युद्ध लड़ेंगे या एलिज़ाबेथ के उपनिवेश में अपने नागरिकों को सम्पत्ति और जीवन के अधिकार से वंचित रखेंगे? यदि महामहिम स्वयं सहित मानवमात्र की रक्षा चाहें तो उपनिवेश से मुक्ति के इस युद्ध में हमें सहयोग दें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

मार्च १९, २०१४ १९/०३/१४

  

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AyodhyaP Tripathi,
Mar 19, 2014, 9:13 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Mar 19, 2014, 9:18 AM
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