Muj14W07 PM NMO



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 06A, 07, Feb 07-13, 2014. This issue is Muj14W07 PM NMO


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W07 PM NMO

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग मान लेते हैं कि नमो प्रधानमंत्री बन गए| कर क्या लेंगे?

इंडिया आज भी राष्ट्रकुल का सदस्य व ब्रिटिश उपनिवेश है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७ व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६ (ब)(।।)}. चुनाव धोखा हैइंडिया के प्रधानमंत्रीराष्ट्रपति और राज्यपाल भी एलिज़ाबेथ के दास हैंक्या मोदी हमें स्वतंत्रता दिला देंगे?

उपरोक्त सच्चाई लिखने या कहने वाला जीवित नहीं छोड़ा जातानमो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग)कुरान और बाइबल के हठधर्म कैसे बदलेंगेभारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) इंडिया व वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने और आप की हत्या का ईसाइयत व हर ईसाई (बाइबललूका १९:२७) और इस्लाम व हर मुसलमान को (कुरान २:१९१) असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता हैआप के पास भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार हैक्या नमो आप को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अस्तित्व के रहते अब्रह्मी संस्कृतियों को मिटाने देंगे?

क्या नमो अपनी ही रक्षा कर पाएंगे?

भारतीय संविधान मानव जाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया हैयदि आप अपनीअपने देश व अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ ईसाइयत और इस्लाम कोनिजहित मेंमिटाने में हमारा सहयोग कीजिएदया के पात्र मीडिया कर्मियोंविधायकोंसांसदोंजजोंराज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा हैवर्तमान परिस्थितियों में एलिज़ाबेथ द्वारा सबका भयादोहन हो रहा हैलोक सेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँया तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करेंअपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँशासकों (एलिज़ाबेथ) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें या नौकरी न करेंइनके अपराध परिस्थितिजन्य हैंजिनके लिए संविधान उत्तरदायी हैभारतीय संविधान ने इनकी पदप्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है|

अधीन रखने के लिए अधिनियम

इस्लाम द्वारा अपमानित होकर भी कोई विरोध न कर सके और मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की और विश्व में सरियत लागू करने यानी वैदिक सनातन संस्कृति को निर्मूल करने की शिक्षा मिलती रहे – यह सुनिश्चित करने के लिए इंडिया में ई०स० १८६० में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को लागू किया गया थागहन अध्ययन से पता चलता है कि इन धाराओं का संकलन बलबा रोकने के लिए या किसी की धार्मिक भावना को आहत होने से रोकने के लिए नहींजैसा कि बनावटी तौर पर धाराओं में बताया गया हैबल्कि वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को लगातार अपमानित करानेनारियों का बलात्कार करानेदास बनवाने अन्यथा नरसंहार कराने के लिए किया गया हैनागरिक की भावनाओं से इन धाराओं का कोई सरोकार नहीं हैक्यों कि इन धाराओं के अंतर्गत किये गये अपराध राज्य के विरुद्ध अपराध हैं और इन धाराओं के अपराध में अभियोग चलाने का अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैंराज्यपाल और जिलाधीश में से किसी एक को दिया गया हैनागरिक क्या राष्ट्रपतिराज्यपालपुलिस और जज भी असहाय हैंमस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी कहा जाता हैवह सब कुछ उपरोक्त धाराओं के अंतर्गत अपराध ही हैजो मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं किया गयाउपरोक्त धाराओं का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी नागरिक का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठेजैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ और जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया हैतो उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों' का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जायेयही कारण है कि किसी वाइसरायराष्ट्रपतिराज्यपाल नेई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया – जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैंराज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा हैसन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई हैभारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर ईसाई व मुसलमान को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता हैईमाम मुसलमानों को आप के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता हैबदले में सर्वोच्च न्यायालय मुसलमानों को आप के कर के पैसे से हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/) और ईमामों को वेतन दिलवाने के लिए विवश है| (एआईआरएससी१९९३प० २०८६). जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) सम्प्रभु मनुष्य को वीर्यहीन कर अधीन करने वाले इन संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता हैवहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा ईसाइयत और इस्लाम का परिरक्षण {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६}, संरक्षण {अल्पसंख्यक आयोगमुस्लिम निजी कानून व वक्फऔर प्रतिरक्षण {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षामदरसोंउर्दू शिक्षकोंमस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन और हज अनुदानकरने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैंजज बाइबल और कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकते| (एआईआरकलकत्ता१९८५प१०४). इंडिया के संत और कथावाचक वीर्यहीन करने वाली इन संस्कृतियों को ईश्वर तक पहुंचने के अलग अलग मार्ग बताते हैंपादरी और ईमाम अपने चर्च और मस्जिदों से ईश्वर की निंदा करते हैं और वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के हत्या की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैंलेकिन किसी के पास विरोध का साहस नहींपदप्रभुता और पेट के लिये हर लोकसेवक अपने ही सर्वनाश के लिये ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने के लिये विवश हैलेकिन वैदिक सनातन धर्म अभी तक मिटा नहीं और जब तक वैदिक सनातन धर्म रहेगालोगों को दास बनाने में एलिजाबेथ को कठिनाई होगीउपाय साम्प्रदायिक और लक्षित हिंसा अधिनियम२०११ है|

क्या नमो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ को बदल पाएंगे?

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांतिमहँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया२६ जनवरी१९५० सेमाउन्टबेटन नेइंद्र के मेनका की भांतिअपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप करब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर मानवमात्र को अशक्त और पराजित कर रखा हैमानवमात्र से उन की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लियामजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७). माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुईउसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा करमानवमात्र को कत्ल होने के लिएसदा सदा के लिए मानवमात्र की धरती छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दियाइतना ही नहीं मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जातीलेकिन आत्मरक्षार्थ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है|

क्या नमो गुरुकुलों की निःशुल्क ब्रह्मचर्य की शिक्षा व्यवस्था को लागू करा पाएंगे?

 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

०६ फरवरी. २०१४य

Registration Number is : DARPG/E/2014/00802

 

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AyodhyaP Tripathi,
Feb 5, 2014, 7:15 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Feb 5, 2014, 7:16 PM
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