Muj14W06 NL14 Virodh



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 06, Jan 31 – Feb 06, 2014. This issue is Muj14W06 NL14 Virodh


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



जज नागरिकों को बताएं?

http://hindi.yahoo.com/without-compensation-land-acquisition-canceled-162954156.html

बिना अधिग्रहण अभिलेखों में जालसाजी कर भूमि लूटने वाले लोकसेवकों के विरुद्ध जज क्या कर लेंगे?

https://docs.google.com/viewer?a=v&pid=sites&srcid=YXJ5YXZydC5jb218bWFsZWdhb24tdHJpYWx8Z3g6N2ZlNjFmMDU5ODM1MThiNg

इलाहाबाद उच्च न्यायालय

CMWP 9672 of 1988 Writ ‘C’

जिला गोरखपुर

शिवाश्रेय तिवारी वगैरह बनाम उ०प्र० सरकार वगैरह

प्राचीन कालमें महाराज अश्वपतिने कहा था

  मे  स्तेनो  जनपदे      कदर्यो    मद्यपः ।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर आप से लूट लिया (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८).

ईस्ट इंडिया कम्पनी के जमाने में केवल संतानहीनों की सम्पत्ति राजवाह (escheat} होती थी| गाँधी के रोम राज्य में किसी के पास सम्पत्ति का अधिकार ही नहीं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) की शर्त है,

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व| अनुच्छेद ३९(ग)

आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२). विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]

१९९० से आज तक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन न हो सका|

http://www.aryavrt.com/lutera-snvidhan

उपरोक्त याचिका में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दिनांक जुलाई २८, १९८९, ९ अगस्त, १९८९ और १० अगस्त, १९८९ को तीन आदेश पारित किये हैं जिनके विरुद्ध प्रतिवादी गण ने आजतक कहीं किसी न्यायालय में प्रतिवाद नहीं किया है और वे आदेश आज भी प्रभावी हैं| उपरोक्त भूमि के बदले में भूमि देने के लिये १९९२ में नपवा ली गई थी| लेकिन इसलिए नहीं दी गई कि मैं ईसाइयत और इस्लाम का विरोधी हूँ| मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है और

http://www.aryavrt.com/fatwa

उपरोक्त लिंक के अध्ययन से आप को स्पष्ट हो जायेगा कि इमाम प्रतिदिन आप व विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी काफिरों के हत्या की, नारियों के बलात्कार की, लूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैं| राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी लोगों ने भय वश नहीं, बल्कि मानवमात्र को दास बनाने के रणनीति के अंतर्गत, अपना जीवन, माल, नारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैं| ई०स० ६३२ से आज तक इस्लाम और मस्जिद का एक भी विरोधी सुरक्षित अथवा जीवित नहीं है| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, या अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ का प्रयोग करते हुए जब से मैने बाबरी ढांचा गिरवाया है और मस्जिदों में विस्फोट भी कराए हैं, मैं तभी से प्रताड़ित हो रहा हूँ| मुझे २००१ में जेल में जहर भी दिया गया| लेकिन मैं मरा नहीं| मैं मालेगांव बम कांड का अभियुक्त भी हूँ| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

६ मार्च से ११ मार्च, २०१३ के बीच, गोरखपुर में, मेरे बेटों ने मुझे अगवा कर - मेरे उसी घर में बंद कर रखा था, जिसे मैंने अपने हाथों से बनवाया था| मैं लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति का स्वामी हूँ, लेकिन ऋषिकेश में भिक्षा के अन्न पर जीवित हूँ|

आतताई मजहब ईसाइयत के प्रसार हेतु माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप दिया| क्या आप गुरुकुलों को पुनर्जीवित कर, अपने वैदिक सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए, मुझे मेरी अपनी ही भूमि दिला सकते हैं?

अब्रह्मी संस्कृतियाँ भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के सहयोग से वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का अनवरत युद्ध लड़ रही हैं| वैदिक सनातन संस्कृति का पतन गुरुकुलों के मिटने के बाद से प्रगति पर है| जीवित रहना हो तो ब्रह्मचारी बनाने वाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में मेरी सहायता कीजिए|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

२८ जनवरी २०१४

Registration Number is : DEPOJ/E/2014/00099

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jan 28, 2014, 4:30 AM
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