Muj14W04 GanguliKeBad Swatantr



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 04, Jan. 17-23, 2014. This issue is Muj14W04 GanguliKeBad Swatantr


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W04 GanguliKeBad Swatantr

बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाय?

यह कहावत आज जजों के मामले में अक्षरशः सत्य है| अगला नम्बर आप का है| जेल जाने के लिए तैयार रहें|

यह आतंकवादी जज ही हैं, जिन्होंने अज़ान को पंथनिरपेक्ष पूजा का बुलावा, चर्च व मस्जिद को पूजा स्थल, बाइबल व कुरान को धर्म पुस्तक और ईसाइयत और इस्लाम को पंथनिरपेक्ष उपासना पद्धति माना है| जिनके विरुद्ध जज सुनवाई ही नहीं कर सकते! (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी सन २००८ से आज तक जेल में इसलिए बंद हैं कि वे अज़ान को ईशनिंदा और मस्जिद को अपराध स्थल मानते हैं और उनको नष्ट कर रहे हैं|

कृपया मेरे पिछले अंक http://www.aryavrt.com/muj13w51a-yaun-shoshan जिसकी प्रति संघ सरकार को भी  DEPOJ/E/2013/00987 दिनांक ९ दिसम्बर, २०१३ को ईमेल द्वारा भेजी गई है, का अवलोकन करें|

इसके अतिरिक्त http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar का भी अवलोकन करें|

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँ, “हमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है| हमारा विनाश, यदि आएगा, तो वह दूसरे प्रकार से आएगा| वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही| ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है|” जजों पर विश्वास करके जनता यही कर रही है|

इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्ध को प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. आज तक किसी जज ने उंगली नहीं उठाई| हमने विरोध किया और उत्पीड़ित हो रहे हैं|

संविधान के अनु० ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न लूट पाए, उसे सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है| इसे जो कोई भ्रष्टाचार कहता है, उसे जज जेल भेजने के लिया विवश हैं! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८).

देश की सत्ता के शिखर पर कैथोलिक ईसाई सोनिया भी है और मुसलमान हामिद भी! दोनों के भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो अर्मगेद्दन के लिए ईसा इस्लाम को भी मिटा देगा| जज इस अनुच्छेद को बनाये रखने के लिए विवश हैं| इस प्रकार जज न्याय करने का अधिकार उसी क्षण खो देते हैं, जिस क्षण वे भारतीय संविधान व विधियों की मर्यादा बनाये रखने की शपथ लेते हैं| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८}| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन जज, जनसेवक और जनता राज्यपालों के आज्ञाकारी नौकर हैं| जजों को डूब मरना चाहिए|

आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है| धरती की सभी नारी ईसाई या मुसलमान की हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं – ईसाई बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व मुसलमान पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने के लिये अधिकृत है| अल्लाह तो ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह कर देता है| किसी का भी उपासना स्थल सुरक्षित नहीं| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. ईसाई व मुसलमान जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटें| [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)]. किसी का जीवन सुरक्षित है। जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए| न बने तो कत्ल कर दीजिए| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)} वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण में| इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वारा, जजों से, उत्पीड़ित कराया जा रहा है| लेकिन जेहोवा, उसका एकलौता पुत्र ईसा और अल्लाह अपराधी नहीं हैं – केवल गांगुली और स्वतंत्र अपराधी हैं!

ईमाम मुसलमानों को आप के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| बदले में सर्वोच्च न्यायालय मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) और ईमामों को आप के कर के पैसे से वेतन दिलवा रहा है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६).

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है| दया के पात्र विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| हम भारतीय संविधान का उन्मूलन करेंगे||

चूंकि ईसाइयत और इस्लाम दोनों को ही वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, अतएव हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५/१९९३ प्रस्तुत की थी, जो जजों द्वरा निरस्त कर दी गई| मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था| जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया| बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ| अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं| मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी| उस अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, दिल्ली से मैं ०६-०२-२०१३ को आरोप मुक्त हो चुका हूँ| इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है| मैं अज़ान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ| ईश्वर उपासना की दासता नहीं थोपता| (गीता ७:२१) और न लूट के माल का स्वामी है| (मनुस्मृति ८:३०८). हम् वीर्यवान बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुल पुनर्स्थापित करना चाहते हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को निरस्त करना चाहते हैं|

जज और लोकसेवक अब भी होश में आयें| ईसाइयत और इस्लाम आसुरी संस्कृतियां हैं – इन्हें मिटाने में हमारी हर सम्भव सहायता करें| याद रखें, यह युद्ध केवल हम लड़ सकते हैं| हमारे ९ अधिकारीयों को ससम्मान छुड़ाने और उनकी क्षतिपूर्ति में हमारी सहायता कर मानवजाति को बचाएं|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी: फोन ९१५२५७९०४१

 

Ċ
AyodhyaP Tripathi,
Jul 25, 2014, 9:39 AM
Comments