Muj14W02C NMO SWATANTRTAYAH



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 02C, Jan. 10- Jan. 16, 2014. This issue is Muj14W02C NMO SWATANTRTAYAH


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W02C NMO SWATANTRTAYAH

भारत की ही भांति अमेरिका भी ब्रिटेन का दास था| अमेरिका तो ब्रिटेन से मुक्ति पा गया, लेकिन आप आज भी ब्रिटेन के दास हैं| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६ (ब)(।।)} और इंडिया राष्ट्रकुल का सदस्य है}. मैं अमेरिकी लोगों द्वारा स्वीकृत घोषणापत्र के अनुवाद को अक्षरशः उद्धृत करता हूँ|

"हम इन सिद्धांतों को स्वयंसिद्ध मानते हैं कि सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं और उन्हें अपने स्रष्टा द्वारा कुछ अविच्छिन्न अधिकार मिले हैं। जीवन, स्वतंत्रता और सुख की खोज इन्हीं अधिकारों में है। इन अधिकारों की प्राप्ति के लिए समाज में सरकारों की स्थापना हुई जिन्होंने अपनी न्यायोचित सत्ता शासित की स्वीकृति से ग्रहण की। जब कभी कोई सरकार इन उद्देश्यों पर कुठाराघात करती है तो जनता को यह अधिकार है कि वह उसे बदल दे या उसे समाप्त कर नई सरकार स्थापित करे जो ऐसे सिद्धांतों पर आधारित हो और जिसकी शक्ति का संगठन इस प्रकार किया जाए कि जनता को विश्वास हो जाए कि उनकी सुरक्षा और सुख निश्चित हैं।"

भारत के नागरिकों ने १९४७ से स्वतंत्रता के लिये युद्ध लड़ना समाप्त कर दिया है| धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद और साध्वी प्रज्ञा के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया| उनके आशीर्वाद से हम ने स्वतंत्रता के रुके हुए युद्ध का श्रीगणेश किया है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के भगवा आतंकवादी लोग स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने के कारण सोनिया के दमनकारी नीति से पीड़ित हैं|

यदि आप वैदिक सनातन धर्म का निरादर करेंगे और रक्षा नहीं करेंगे तो आप मारे जायेंगे| आप का वैदिक सनातन धर्म पूरे विश्व में था| आज हम इस लिए प्रताड़ित हो रहे हैं, कि हम जेहोवाः और अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| अज़ान नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| चर्च व मस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है, को नष्ट कर रहे हैं| लेकिन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल अभियोग वापस लेते हैं उन मुसलमानों के जो भारतीय संविधान जलाते हैं| अज़ान नमाज़ द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ २९५ के अंतर्गत हमारे ईश्वर का अपमान करते हैं| साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाते हैं| वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का मार्ग निष्कंटक करते हैं| जिन्हें देशवैदिक सनातन धर्म और सम्मान चाहिए-हमारी सहायता करें| यह संस्कृतियों का युद्ध है| ईसाइयत और इस्लाम आतताई संस्कृतियाँ हैं| मात्र वैदिक सनातन धर्म धोखे से हमले का विरोधी है| आत्मघाती मजहबों को मिटाना आप का वैदिक सनातन धर्म है| आइये ईसाइयत और इस्लाम मिटायें|

स्वतंत्र कौन है?

ईसाइयत और इस्लाम का अविष्कार बिना युद्ध मानवमात्र को पुंसत्वहीन कर दास बनाने के लिये किया गया है| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर महोदय यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक वेश्यावृत्ति को संरक्षण देना है| मूसा से लेकर मनमोहन तक सब वही कर रहे हैं| स्वतंत्र कोई नहीं!

विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

http://www.aryavrt.com/veerya-1

(अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं के प्रयोग द्वारा वीर्यहीन कर दास बनाती हैं| यहाँ विश्वामित्र और मेनका का प्रसंग प्रासंगिक है| इंद्र ने वीर्यवान विश्वामित्र को पराजित करने के लिए मेनका का उपयोग किया| मूसा और मुहम्मद ने तो इंद्र की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं ईसा ने बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह की छूट दी है| अल्लाह ने मुहम्मद का निकाह उसकी पुत्रवधू जैनब (कुरान, ३३:३७-३८) और ५२ वर्ष के आयु में ६ वर्ष की आयशा से उसका निकाह किया|

मल ही बल है और वीर्य ही जीवन| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| वीर्यहीन व्यक्ति अपनी इन्द्रियों व शासकों का दास ही बन सकता है, स्वतन्त्र नहीं रह सकता| भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने, लूटने और कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है| स्वतंत्रता, दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहें तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करें|

वैदिक सनातन धर्म वीर्य को साक्षात ईश्वर का पर्याय मानता है| इसके किसी भी तरह के क्षरण को घृणित पाप मानता है| ईश्वर ने मनुष्य को वीर्य के रुप में अपनी सारी शक्ति दी है। विद्या मात्र ब्रह्मविद्या है और ज्ञान मात्र ब्रह्मज्ञान| वीर्यरक्षा के बिना ब्रह्मज्ञान सम्भव नहीं| वीर्यरक्षा की शिक्षा गुरुकुलों में निःशुल्क दी जाती थी, जिसे मानवमात्र को भेंड़ बनाने के लिए मैकाले ने मिटा दिया| जेहोवा और अल्लाह मूसा और मुहम्मद के बिचौलिये और मनुष्य को दास बना कर लूटने के लिए मुखौटे हैं| इनका अस्तित्व ही नहीं है| मनुष्य के वीर्य की शक्ति को मिटाने का प्रथम प्रयास मूसा ने किया| मुहम्मद ने मूसा का नकल किया| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने खतना को मजहब से जोड़ दिया है|

निर्णय आप के हाथों में है| वैदिक सनातन धर्म का साम्राज्य पूरे विश्व पर तभी तक रहा जब तक गुरुकुल रहे| आज विश्व में दासों का शासन है| वीर्यवान अकेला शेर कई गुने भारी वीर्यहीन हाथियों के समूह को परास्त कर देता है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर, मानवमात्र को कत्ल होने के लिए, सदा सदा के लिए मानवमात्र की धरती छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया गया है| ईसाई व मुसलमान सहित हर नागरिक ईसा का (भेंड)दास है| किसी नागरिक को जीवित रहने (भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)) या सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार नहीं है| (भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)). चर्च से, जो बपतिस्मा न ले अथवा जो ईशा को राजा न माने, उसको कत्ल करने की पादरी स्पष्ट घोषणा करता है| मस्जिदों से ईमाम प्रतिदिन पांच समय अज़ान द्वारा ईशनिंदा करता है| ईमाम मुसलमानों को काफिरों की हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| ईशनिंदा के अपराध में व अराजकता के लिये दंडित  करके के स्थान पर सर्वोच्च न्यायालय मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/) और ईमामों को आप के कर के पैसे से वेतन दिलवा रहा है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). ईसाई गैर-ईसाइयों को (बाइबल, लूका १९:२७) और मुसलमान गैर-मुसलमान को कत्ल करने से जन्नत पायेगा| (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी इन्हीं संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है व राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षणपोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है| जजों ने भी भारतीय संविधान के अनुसूची ३ के प्रारूप ४ व ८ के अधीन ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी इन लुटेरी, बलात्कारी और खूनी संस्कृतियों को बनाये रखने के असीमित मौलिक अधिकार देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को बनाये रखने की शपथ ली है| यानी वैदिक सनातन धर्म का उन्मूलन संविधान से प्रायोजित है| इतना ही नहीं मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जाती| लेकिन आत्मरक्षार्थ भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| भारतीय संविधान ने राष्ट्रपति, राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है| माउन्टबेटन ने इनको वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेने के लिये विवश कर दिया है| अब असम्भव नारा उछला है, “नमो लाओ देश बचाओ”? कैसे? जानने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/chunav-dhokha-hai

हम आप से अनुरोध करते हैं कि चुनाव का बहिष्कार कीजिए और ब्रह्मचारी व चरित्रवान युवकों के निर्माण के लिए गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने के लिए आर्यावर्त सरकार को सहयोग कीजिए| अन्यथा मिटने के लिए तैयार रहिये|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Your Registration Number is : DARPG/E/2014/00088

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jan 6, 2014, 5:57 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Jan 6, 2014, 5:58 PM
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