Muj14W02 NMO SWATANTRTA



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 02, Jan. 10- Jan. 16, 2014. This issue is Muj14W02 NMO SWATANTRTA


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W02 NMO SWATANTRTA

स्वतंत्र कौन है?

ईसाइयत और इस्लाम का अविष्कार बिना युद्ध मानवमात्र को पुंसत्वहीन कर दास बनाने के लिये किया गया है| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर महोदय यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक वेश्यावृत्ति को संरक्षण देना है| मूसा से लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन तक सब वही कर रहे हैं| स्वतंत्र कोई नहीं!

विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

http://www.aryavrt.com/veerya-1

(अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं के प्रयोग द्वारा वीर्यहीन कर दास बनाती हैं| यहाँ विश्वामित्र और मेनका का प्रसंग प्रासंगिक है| इंद्र ने वीर्यवान विश्वामित्र को पराजित करने के लिए मेनका का उपयोग किया| मूसा और मुहम्मद ने तो इंद्र की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं ईसा ने बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह की छूट दी है| अल्लाह ने मुहम्मद का निकाह उसकी पुत्रवधू जैनब (कुरान, ३३:३७-३८) और ५२ वर्ष के आयु में ६ वर्ष की आयशा से उसका निकाह किया|

मल ही बल है और वीर्य ही जीवन| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| वीर्यहीन व्यक्ति अपनी इन्द्रियों व शासकों का दास ही बन सकता है, स्वतन्त्र नहीं रह सकता| भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने, लूटने और कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है| स्वतंत्रता, दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहें तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करें|

वैदिक सनातन धर्म वीर्य को साक्षात ईश्वर का पर्याय मानता है| इसके किसी भी तरह के क्षरण को घृणित पाप मानता है| ईश्वर ने मनुष्य को वीर्य के रुप में अपनी सारी शक्ति दी है। विद्या मात्र ब्रह्मविद्या है और ज्ञान मात्र ब्रह्मज्ञान| वीर्यरक्षा के बिना ब्रह्मज्ञान सम्भव नहीं| वीर्यरक्षा की शिक्षा गुरुकुलों में निःशुल्क दी जाती थी, जिसे मानवमात्र को भेंड़ बनाने के लिए मैकाले ने मिटा दिया| जेहोवा और अल्लाह मूसा और मुहम्मद के बिचौलिये और मनुष्य को दास बना कर लूटने के लिए मुखौटे हैं| इनका अस्तित्व ही नहीं है| मनुष्य के वीर्य की शक्ति को मिटाने का प्रथम प्रयास मूसा ने किया| मुहम्मद ने मूसा का नकल किया| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने खतना को मजहब से जोड़ दिया है|

निर्णय आप के हाथों में है| नमो भारतीय संविधान के अस्तित्व में रहते वैदिक सनातन धर्म, आप का जीवन और नारियों का सम्मान नहीं बचा सकते| वैदिक सनातन धर्म का साम्राज्य पूरे विश्व पर तभी तक रहा जब तक गुरुकुल रहे| आज विश्व में दासों का शासन है| वीर्यवान अकेला शेर कई गुने भारी वीर्यहीन हाथियों के समूह को परास्त कर देता है|

क्या नमो स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने के लिए वीर्यवान बनाने वाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में हमे सहयोग दे सकते है?|

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को पुंसत्वहीन तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| २६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६ (ब)(।।)} और इंडिया राष्ट्रकुल का सदस्य है} पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर मानवमात्र को पुंसत्वहीन और पराजित कर रखा है| पुंसत्वहीन मानवमात्र से उन की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया| मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर, मानवमात्र को कत्ल होने के लिए, सदा सदा के लिए मानवमात्र की धरती छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| ईसाई व मुसलमान सहित हर नागरिक ईसा का (भेंड)दास है| किसी नागरिक को जीवित रहने (भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)) या सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार नहीं है| (भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)). चर्च से, जो बपतिस्मा न ले अथवा जो ईशा को राजा न माने, उसको कत्ल करने की पादरी स्पष्ट घोषणा करता है| मस्जिदों से ईमाम प्रतिदिन पांच समय अज़ान द्वारा ईशनिंदा करता है| ईमाम मुसलमानों को काफिरों की हत्या और के नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| ईशनिंदा के अपराध में व अराजकता के लिये दंडित  करके के स्थान पर सर्वोच्च न्यायालय मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/) और ईमामों को आप के कर के पैसे से वेतन दिलवा रहा है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). ईसाई गैर-ईसाइयों को (बाइबल, लूका १९:२७) और मुसलमान गैर-मुसलमान को कत्ल करने से जन्नत पायेगा| (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९). भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी इन्हीं संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है व राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षणपोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है| जजों ने भी भारतीय संविधान के अनुसूची ३ के प्रारूप ४ व ८ के अधीन ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी इन लुटेरी, बलात्कारी और खूनी संस्कृतियों को बनाये रखने के असीमित मौलिक अधिकार देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को बनाये रखने की शपथ ली है| यानी वैदिक सनातन धर्म का उन्मूलन संविधान से प्रायोजित है| इतना ही नहीं मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जाती| लेकिन आत्मरक्षार्थ भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| भारतीय संविधान ने राष्ट्रपति, राज्यपालों, जजों लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है| माउन्टबेटन ने इनको वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेने के लिये विवश कर दिया है| अब असम्भव नारा उछला है, “नमो लाओ देश बचाओ”? कैसे? नीचे लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/chunav-dhokha-hai

१९४७ से नागरिकों ने स्वतंत्रता के लिये युद्ध लड़ना समाप्त कर दिया है| धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद और साध्वी प्रज्ञा के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया| उनके आशीर्वाद से हम ने स्वतंत्रता के रुके हुए युद्ध का श्रीगणेश किया है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के भगवा आतंकवादी लोग स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने के कारण सोनिया से पीड़ित हैं|

क्या नमो अपनी संस्कृति, सम्पत्ति, जीवन और संतति की रक्षा हेतु इस युद्ध में हमे सहयोग दे सकते हैं?

क्या नमो अपनी भी रक्षा कर पाएंगे?

मानवमात्र से निवेदन:

इंडिया पंथनिरपेक्ष देश है? अज़ान पंथनिरपेक्ष उपासना नमाज़ के लिए बुलावा और मस्जिद पंथनिरपेक्ष पूजा स्थल?

“धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

“तस्माद्धर्मो हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत|

अर्थ: रक्षा किया हुआ धर्म ही रक्षा करता है, और अरक्षित धर्म मार डालता है, अतएव अरक्षित धर्म कहीं हमे मार डाले, इसलिए बल पूर्वक धर्म की रक्षा करनी चाहिए| (मनु स्मृति :१५).

इसके अतिरिक्त हमारे यहाँ लोकोक्ति है,

लक्ष्मी के हैं चार सुत, धर्म, अग्नि, नृप, चोर|

जेठे का निरादर करो, शेष करें भंड़ फोड़|


लक्ष्मी के चार बेटे धर्म, अग्नि, राजा और चोर हैं| या यूं कह लीजिए कि धन की चार गति है| चंचला है| कहीं टिकती नहीं है| लक्ष्मी को धर्म पर व्यय करेंगे तो आप का यश बढ़ेगा| आप की हर तरह ईश्वर, संत समाज और दुखी दीन जन से सहायता करेंगे और आप की कीर्ति बढायेंगे| अन्यथा आप की सम्पत्ति या तो अग्नि में स्वाहा होगी, या सोनिया ले लेगी अथवा चोर चुरा लेंगे| आप एफआईआर भी न कर पाएंगे| हो सकता है कि आप की स्थिति पोंटि चड्ढा की भांति न हो जाये|

हमने बाबरी ढांचा गिराया है| काबा हमारी है| अज़ान ईशनिंदा है| कुरान सारी दुनियां में फुंक रही है| हम मालेगांव व अन्य मस्जिदों के विष्फोट के अभियुक्त हैं| क्या नमो अज़ान बंद करेंगे और मस्जिदों को अपराध स्थल घोषित करेंगे?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Your Registration Number is : DARPG/E/2014/00085

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jan 6, 2014, 6:18 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Jan 6, 2014, 6:35 AM
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