Muj14W01B NMO GURUKUL



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 01B, Jan. 03- Jan. 09, 2014. This issue is Muj14W01B NMO GURUKUL


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Muj14W01B NMO GURUKUL

बाबू सुशीलन जी|

यद्यपि मैं विकास की मुंहताज, लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से दूषित अंग्रेजी, जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ| क्योंकि मानवमात्र की लिपि, भाषा व ज्ञान-विज्ञान उसके चक्रों व ब्रह्मकमल में परब्रह्म जन्म के साथ ही दे देता है| विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है| संस्कृत उसी लिपि में लिखी जाती है और विश्व का प्राचीनतम और एकमात्र ज्ञान-विज्ञान का कोष देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा का ऋग्वेद है|

क्या आप बतायेंगे कि नमो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग), कुरान और बाइबल के हठधर्म कैसे बदलेंगे? भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) इंडिया व वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का ईसाइयत और इस्लाम को असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| अपनी खैर मनाइए| हर ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) व मुसलमान (कुरान २:१९१) को भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) आप की हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| आप के पास भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ से प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| ईसाइयत और इस्लाम को क्यों नहीं मिटाते?

वैदिक सनातन संस्कृति किसी भी अन्य मजहब के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"|

ठीक इसके विपरीत ईसाइयत और इस्लाम संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति व निवासियों को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| इन संस्कृतियों के इंडिया में रहते नमो वैदिक सनातन धर्म व उनके अनुयायियों को जीवित नहीं बचा सकते|

आप आज भी ईसाइयत के दास हैं| ईसाइयत और इस्लाम दोनों ही दास बनाने वाली संस्कृतियां हैं| ईश्वर उपासना की दासता नहीं थोपता| (गीता ७:२१) और न लूट के माल का स्वामी है| (मनुस्मृति ८:३०८). अतः हम् भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को निरस्त करना चाहते हैं|'

वीर्यवान अकेला शेर कई गुने भारी वीर्यहीन हाथियों के समूह को परास्त कर देता है| अतः वीर्यवान बनाने वाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित करें|

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| २६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर मानवमात्र को अशक्त और पराजित कर रखा है| मानवमात्र से उन की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया| मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर, मानवमात्र को कत्ल होने के लिए, सदा सदा के लिए मानवमात्र की धरती छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| इतना ही नहीं मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जाती| लेकिन आत्मरक्षार्थ भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| राष्ट्रपति और राज्यपालों को वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेने के लिये विवश कर दिया|

ईश्वर ने मनुष्य को वीर्य के रुप में अपनी सारी शक्ति दी है। विद्या मात्र ब्रह्मविद्या है और ज्ञान मात्र ब्रह्मज्ञान| वीर्यरक्षा के बिना ब्रह्मज्ञान सम्भव नहीं| वीर्यरक्षा की शिक्षा गुरुकुलों में निःशुल्क दी जाती थी, जिसे मानवमात्र को भेंड़ बनाने के लिए मैकाले ने मिटा दिया| जेहोवा और अल्लाह मूसा और मुहम्मद के बिचौलिये और मनुष्य को दास बना कर लूटने के लिए मुखौटे हैं| इनका अस्तित्व ही नहीं है| मनुष्य के वीर्य की शक्ति को मिटाने का प्रथम प्रयास मूसा ने किया| मुहम्मद ने मूसा का नकल किया| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने खतना को मजहब से जोड़ दिया है| किसान को सांड़ को दास बना कर खेती के योग्य बैल बनाने के लिए सांड़ का बंध्याकरण करना पड़ता है, लेकिन लूट और यौनाचार के लोभ में यहूदी और मुसलमान मजहब की आड़ में स्वेच्छा से गाजे बाजे के साथ वीर्यहीन बन, ब्रह्मतेज को गवांने के लिए, खतना कराते हैं| किसान सांड़ को वीर्यहीन कर दास बना लेता है और (अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं का प्रयोग कर दास बनाती हैं|

इंडिया में मुसलमानों को इसलिए रोका गया है कि इन्होंने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली हैईसाई वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए मुसलमानों का दोहन कर रहे हैं| ईसाइयों को खतरा वैदिक सनातन संस्कृति से है – मुसलमान तो उनकी मुट्ठी में हैं| जब तक वैदिक सनातन संस्कृति जीवित है – तभी तक इस्लाम जीवित है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति समाप्त हो जाएगी, उसके दूसरे दिन इस्लाम मिट जायेगा|

वैदिक सनातन धर्म वीर्य को साक्षात ईश्वर का पर्याय मानता है| इसके किसी भी तरह के क्षरण को घृणित पाप मानता है| वैदिक सनातन धर्म की मान्यता है कि विद्या मात्र ब्रह्मविद्या है और ज्ञान मात्र ब्रह्मज्ञान| वीर्यरक्षा के बिना ब्रह्मज्ञान सम्भव नहीं| वीर्यरक्षा की शिक्षा गुरुकुलों में निःशुल्क दी जाती थी, जिसे मानवमात्र को भेंड़ बनाने के लिए मैकाले ने मिटा दिया| ईश्वर ने मनुष्य को वीर्य के रुप में अपनी सारी शक्ति दी है। जेहोवा और अल्लाह मूसा और मुहम्मद के बिचौलिये और मनुष्य को दास बना कर लूटने के लिए मुखौटे हैं| इनका अस्तित्व ही नहीं है| मनुष्य के वीर्य की शक्ति को मिटाने का प्रथम प्रयास मूसा ने किया| मुहम्मद ने मूसा का नकल किया| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने खतना को मजहब से जोड़ दिया है| किसान को सांड़ को दास बना कर खेती के योग्य बैल बनाने के लिए सांड़ का बंध्याकरण करना पड़ता है, लेकिन लूट और यौनाचार के लोभ में यहूदी और मुसलमान मजहब की आड़ में स्वेच्छा से गाजे बाजे के साथ वीर्यहीन बनने के लिए खतना कराते हैं और स्वेच्छा से अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैं|

मल ही बल है और वीर्य ही जीवन| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| वीर्यहीन व्यक्ति अपनी इन्द्रियों और शक्तिवान का दास ही बन सकता है, स्वतन्त्र नहीं रह सकता| वीर्यहीन व्यक्ति का मानवाधिकार नहीं होता| वीर्य हीन मनुष्य रोगग्रसित चलता फिरता मुर्दा और दास है| भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है| दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करिये|

चुनाव द्वारा कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| देवनागरी और ब्रह्मज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए गुरुकुलों को पुनर्स्थापित करने में आर्यावर्त सरकार की सहायता कीजिए| विश्वास करिये भारत सर्वशक्तिमान हो जायेगा|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Registration Number is : MINHA/E/2014/00011

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jan 1, 2014, 10:45 PM
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