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मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 52PS, Dec. 27, 2013 - Jan. 02, 2014. This issue is Muj13W52 CrPC196Rem

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 






Muj13W51 CrPC196 Kyon

मस्जिद होने का मतलब


पुनर्स्मरण:संलग्न पत्रिका मुजहना Muj13W51 CrPC196 Kyon


विषय: अभियोग वापसी हेतु|


सन्दर्भ: प्राथमिकी संख्याएं ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला| (विचाराधीन) MM वि० संदीप गुप्ता रोहिणी|


जज साहब! आप या तो मात्र अल्लाह की उपासना नहीं करते अथवा ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते अतएव आप को जीवित रहने का अधिकार तक नहीं है| आप मुसलमान (बाइबल, लूका १९:२७) हैं तो ईसाई आप की हत्या करेगा और यदि ईसाई हैं (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९) तो मुसलमान| क्या जज साहब, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अस्तित्व में रहते, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईमाम के ईशनिंदा और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा के विरुद्ध कुछ कर सकते हैं? क्या जज महोदय को नहीं लगता कि पद, प्रभुता और पेट हेतु आत्मघात करना आपकी की विवशता है? क्या जज साहब को सोनिया की भेड़ बनने में लज्जा नहीं आती?


जज साहब! वैदिक सनातन धर्म भयानक चक्रव्यूह में फंस चुका है| जिसके कारण, डायनासोर की भांति, मानव जाति का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा|


खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर महोदय यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक वेश्यावृत्ति को संरक्षण देना है| मूसा से लेकर सोनिया तक सब वही कर रहे हैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-


http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino


http://www.aryavrt.com/veerya-1


आप स्वतंत्र कभी नहीं हुए| १५ अगस्त, १९४७ को ब्रिटेन ने सत्ता का हस्तान्तरण किया था| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान}. ईसाई व मुसलमान सहित इंडिया का हर नागरिक ईसा का भेंड है|


भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी इन लुटेरी, बलात्कारी और खूनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है व राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षणपोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है|


जजों ने भी भारतीय संविधान के अनुसूची ३ के प्रारूप ४ व ८ के अधीन ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी इन लुटेरी, बलात्कारी और खूनी संस्कृतियों को बनाये रखने के असीमित मौलिक अधिकार देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को बनाये रखने की शपथ ली है|


इसके अतिरिक्त मुसलमानों की इन लुटेरी, बलात्कारी और खूनी संस्कृतियों को संरक्षित करने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन उत्तरदायित्व भी सौंपा गया है|


इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकते| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है| इसीलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कराया गया है, जिसका विरोध करने के कारण आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी जेलों में बंद हैं|


पद, प्रभुता और पेट हेतु जज, लोकसेवक, राष्ट्रपति और राज्यपाल – सबको इसी मौत के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेनी पड़ती है| वोट देकर भी यथा स्थिति नहीं बदल सकती| क्या जज साहब को नहीं लगता कि वे मूर्ख बन रहे हैं?


मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँहमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है| हमारा विनाश, यदि आएगा, तो वह दूसरे प्रकार से आएगा| वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही| ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है|


महाराज अश्वपतिने कहा था


  मे  स्तेनो  जनपदे      कदर्यो    मद्यपः ।


नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥


(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)


मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अग्निहोत्र न करनेवाला है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’


वैदिक सनातन संस्कृति की मान्यता है कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया| यदि आप का स्वास्थ्य गया, तो आधा चला गया| लेकिन यदि आप का चरित्र गया तो सब कुछ चला गया| अतएव सोनिया आपको चरित्रहीन कर वैदिक सनातन संस्कृति को मिटा रही है|


इसके विपरीत भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है।


मुझे भूल जाइये जज साहब| अपने दुधमुंहे बच्चों, धर्म और नारियों पर तरस खाइए|


अज्ञान वश काफ़िरों ने घातक धारणा बना रखी है कि उनके अपने धर्म की भांति इस्लाम भी एक धर्म है| मै अपने प्रतिवाद में चार सच्चाईयाँ उद्धृत कर रहा हूँ:-


| काफिरों को धोखा देने के लिए मुसलमान तकिय्या (कुरान :२८ १६:१०६) का प्रयोग कर यह विश्वास दिलाते हैं कि कुछ दिग्भ्रमित मुसलमानों ने उनके खतना कर वीर्यहीन करने वाले मजहब का अपहरण कर लिया है और इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं| लेकिन इस्लाम का अपहरण नहीं होता है| यद्यपि काफ़िर ऐसा ही मानते हैं क्यों कि उनकी गलत धारणा है कि वीर्यहीन होकर ओज, तेज, स्मृति और परमानंद गवां कर शासकों का दास बन जाना धर्म हैं| काफ़िरों की यह त्रुटिपूर्ण धारणा इसलिए है कि वे समझते हैं कि कोई धर्म शांतिप्रिय नागरिकों की हत्या और लूटमार को बढ़ावा कैसे दे सकता है? अतः कुछ सिरफिरे मुसलमानों ने इस्लाम का अपहरण कर रखा है| यदि एक बार काफिरों को इस्लाम की असलियत समझ में जाये तो वे इस्लाम से बचने का सही मार्ग ढूँढना प्रारम्भ कर देंगे|


| इस्लाम की उन्नति के लिए अल्लाह मुसलमानों को धोखा देने की अनुमति देता है| इसे अल्लाह तकिय्या कहता है| लेकिन काफिरों को तकिय्या के इस्लामी सिद्धांत का ज्ञान नहीं है| तकिय्या के सिद्धांत का ज्ञान काफिरों को अल्लाह की धोखाधड़ी से बचायेगा| वे मौलवियों ईमामों की हर बात पर विश्वास करना बंद कर देंगे|


| धरती पर शरिया कानून लगाने के लिए प्रयत्नशील रहना हर मुसलमान का मजहबी दायित्व है| इसे जिहाद कहा जाता है| हर व्यक्ति को मुसलमान बनाना और धरती को शरिया आधारित इस्लामी राज्य बना लेना ही जिहाद है| यदि काफ़िर इस सच्चाई को जान लें तो वे इस्लाम को धरती पर टिकने नहीं देंगे|


| चूंकि मूर्ख मुसलमानों ने (कुरान :३५) स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| अतः शासक निज हित में इस्लाम को संरक्षा, सुरक्षा और बढ़ावा दे रहे हैं और सच्चाई को छिपाने के हर प्रयास कर रहे हैं|


जज साहब! अज़ान आप के इष्ट देवों का अपमान और आप के उपासना की स्वतंत्रता का अपहरण है और मस्जिदों से मुसलमानों को आप के हत्या की शिक्षा दी जाती है| जो भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ में आप के पास प्राइवेट प्रतिरक्षा का हनन है| लेकिन आप यह लड़ाई नहीं लड़ सकते| हमारी गुप्त सहायता कर सकते हैं|


अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Registration Number is : MINHA/E/2013/02558
12/26/2013 4:01:48 PMy

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|





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AyodhyaP Tripathi,
Dec 26, 2013, 2:51 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Dec 26, 2013, 2:54 AM
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