Muj13W51 CrPC196 Kyon


मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE ISSUE 51, Dec. 13- Dec. 19, 2013. This issue is Muj13W51 CrPC196 Kyon

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


Muj13W51 CrPC196 Kyon

मस्जिद होने का मतलब


विषय: अभियोग वापसी हेतु|

सन्दर्भ: प्राथमिकी संख्याएं ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला| विचाराधीन MM वि० संदीप गुप्ता रोहिणी|

सेवा में,

सुश्री अर्चना अरोरा, प्रमुख सचिव, गृह, दिल्ली सरकार|

महोदया,

मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईमाम ५ समय, नियमित रूप से, पूरे विश्व में, प्रतिदिन निर्विरोध अन्धाधुन्ध इस्लामी आक्रमण करते हैं। ईमाम क्या प्रचारित करते हैं, को जानने के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

उपरोक्त लिंक के अध्ययन से आप को स्पष्ट हो जायेगा कि इमाम प्रतिदिन आप व विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी काफिरों के हत्या की, नारियों के बलात्कार की, लूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैं| राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी लोगों ने भय वश नहीं, बल्कि एक रणनीति के अंतर्गत, अपना जीवन, माल, नारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैंई०स० ६३२ से आज तक इस्लाम और मस्जिद का एक भी विरोधी सुरक्षित अथवा जीवित नहीं है| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

अधीन रखने के लिए अधिनियम

इस्लाम द्वारा अपमानित होकर भी कोई विरोध न कर सके और मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की और विश्व में सरियत लागू करने यानी वैदिक सनातन संस्कृति को निर्मूल करने की शिक्षा मिलती रहे – यह सुनिश्चित करने के लिए इंडिया में ई०स० १८६० में भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को लागू किया गया था| गहन अध्ययन से पता चलता है कि इन धाराओं का संकलन बलबा रोकने के लिए या किसी की धार्मिक भावना को आहत होने से रोकने के लिए नहीं, जैसा कि बनावटी तौर पर धाराओं में बताया गया है, बल्कि वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को लगातार अपमानित कराने के लिए किया गया है| नागरिक की भावनाओं से इन धाराओं का कोई सरोकार नहीं है| क्यों कि इन धाराओं के अंतर्गत किये अपराध राज्य के विरुद्ध अपराध हैं| क्यों कि इन धाराओं के अपराध में अभियोग चलाने का अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश में से किसी एक को दिया गया है| नागरिक क्या पुलिस और जज भी असहाय हैं| मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ उपरोक्त धाराओं के अंतर्गत अपराध ही है, जो मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं किया गया| उपरोक्त धाराओं का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी नागरिक का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, तो उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई इस्लाम का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को समाप्त कर दिया जाये| यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति, राज्यपाल ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया – जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के मस्जिद विध्वंसक लोग हैं| हम लोग अलग मिटटी के बने हैं| वस्तुतः हम ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है| (कुरान :३५). हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है| हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने और मानव जाति को दास बनाने के लिए संकलित किया गया है| हम अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| अज़ान नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| हम अज़ान का विरोध कर रहेमस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट कर रहे हैं| आइये इस धर्म युद्ध में हमारा साथ दीजिए| अपने पर नहीं तो अपने दुधमुहों और अपनी नारियों पर तरस खाइए| (कुरान २३:६). हम जो भी कर रहे हैं, भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा में कर रहे हैं| जो भी हमारे विरोधी हैं, मानवता के शत्रु हैं|

इंडिया में मुसलमानों को इसलिए रोका गया है कि इन्होंने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| ईसाई वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए मुसलमानों का दोहन कर रहे हैं| ईसाइयों को खतरा वैदिक सनातन संस्कृति से है – मुसलमान तो उनकी मुट्ठी में हैं| जब तक वैदिक सनातन संस्कृति जीवित है – तभी तक इस्लाम जीवित है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति समाप्त हो जाएगी, उसके दूसरे दिन इस्लाम मिट जायेगा|

मुसलमानों ने सउदी अरब, इराक और अफगानिस्तान से कोई सबक नहीं सीखा| सोनिया ईसा के आदेश (बाइबल, लूका १९:२७) से अभी हिंदुओं को मरवा रही है| जब हिंदू मिट जायेंगे तो मुसलमानों की बारी आएगी| अपने असली शत्रु को पहचानें मुसलमान!

मुसलमान इतिहासकार सगर्व लिखते हैं कि मुहम्मद ने कितने शांतिप्रिय नागरिकों को कत्ल किया| कितने मंदिर तोड़े| कितनी अबला नारियों के गहने लूटे, उनके सगे-सम्बन्धियों को कत्ल किया और उसी रात उनका बलात्कार किया| लेकिन जब सर्बो ने मुसलमान नारियों का बलात्कार किया और जब लेबनान के नागरिक ठिकानों पर इजराएल ने बमबारी की तो मुसलमानों को मानवाधिकार याद गया|

अफगानिस्तान और ईराक पर अमेरिकी आधिपत्य से मुसलमान आतंकित हैं| लेकिन मुसलमान भूल गए हैं कि जहाँ अल्लाह ने मुसलमानों को सृष्टि सौँप रखी है (कुरान :२५५), वहीं ईसा ने ईसाइयों को हर उस व्यक्ति को कत्ल करने का अधिकार दे रखा है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता| (बाइबल, लूका १९:२७). मुसलमान विचार करें कि तब क्या होगा, जब ईसाई मुसलमानों को कत्ल कर विश्व के सभी इस्लामी राज्यों पर आधिपत्य जमा लेंगे? अकेले इजराएल से तो मुसलमान निपट नहीं पाए, सभी ईसाई राज्यों से मुसलमान कैसे निपटेंगे?

वैदिक सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

ठीक इसके विपरीत इस्लाम ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, इस्लाम आज तक विफल नहीं हुआ| इस्लाम जिहाद की हठधर्मिता के बल पर संस्कृतियों को मिटा रहा है| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, :३९).

ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया में मैंने इस्लाम का विरोध कर अपना जीवन बर्बाद कर लिया है| मैं सेवा निवृत लोकसेवक हूँ| मुझे जज के आदेश के बाद भी पेंसन नहीं मिलती| इसके अतिरिक्त लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति का स्वामी हूँ जिसे जजों सहित लोकसेवकों ने लूट लिया है| मैं ऋषिकेश में भिक्षा के अन्न पर जीवित हूँ| यह संस्कृतियों का युद्ध है| पिछले ३२६० से अधिक वर्षों से यह युद्ध कोई नहीं लड़ सका और मेरे अतिरिक्त यह युद्ध कोई लड़ भी नहीं सकता| यदि आप ससम्मान जीवित रहना चाहती हों तो मेरी गुप्त सहायता कीजिये| ईश्वर आप पर कृपा करे|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

http://pgportal.gov.in

Registration Number is : GNCTD/E/2013/03271


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AyodhyaP Tripathi,
Dec 5, 2013, 2:15 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Dec 5, 2013, 2:16 AM
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