Muj13W50TB Adv Jha


मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 50TB, Dec. 06-12, 2013. This issue is Muj13W50TB Adv Jha

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


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मेरे मित्र विद्वान अधिवक्ता श्री सुभाष झा ने लिखा,

“A bench headed by the Chief Justice Sathashivam dismissed the PIL at the threshhold by warning the petitioner's lawyer that the attempt is to tarnish the image of Robert Vadra through PIL and if next time such PILs are filed cost of Rs.10 lacs would be imposed!”

उपरोक्त बात अगर झा जी वैदिक देवनागरी लिपि में बताते - तो अधिक लोग समझते| वैदिक सनातन संस्कृति का महिमामंडन होता और अंग्रेजी मिटती|

सथाशिवम या सदाशिवम ने अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४). नागरिक भेंड़ सोनिया के भेंड़ हैं| यह अनुच्छेद सोनिया के अतिरिक्त किसी नागरिक को सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार नहीं देता| वड्रा सोनिया का दामाद है| फिर सथाशिवम ने वकील को धमकाया तो क्या गलत किया?

झा जी से मेरा अनुरोध है कि वे जड़ को पुनर्जीवित करें| वैदिक सनातन संस्कृति की जड़ मानवमात्र को वीर्यवान बनाने वाली निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा है|

जहाँ तक गुजरात की एक कन्या के निजता में हस्तक्षेप का प्रश्न है - सोनिया सचमुच परेशान है| वैदिक सनातन संस्कृति से वीर्यहीनता के प्रसार और मानवमात्र को भेंड़ बनाने में सोनिया को कठिनाई हो रही है| जब कि दास बनानेहेतु पैगम्बरोंने बलात्कार, खतना व कुमारी मरियम को मजहबसे जोड़दिया| सोनिया को परेशानी यह है कि हम वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह नहीं करते| कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारा ईश्वर जारज(जार्ज) और प्रेत नहीं है| जब कि ईसाइयों का ईसा स्वयं जारज(जार्ज) है और उस ने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना दिया है| कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| जारज(जार्ज) हमारे लिए अपमानजनक सम्बोधन हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों का शासक परिवार सम्मानित जारज(जार्ज) है| इतना ही नहीं ईसाइयों का मुक्तिदाता ईसा ही जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत है| हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जाती| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. जजों ने सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता दे दी है| जजों की कृपा से आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| उज्ज्वला - नारायण दत्त तिवारी और आरुषि - हेमराज मामलों में जजों के फैसलों ने आने वाले समाज की दिशा निर्धारित कर दी है| आप वैश्यावृत्ति से अपनी नारियों को बचा न पाएंगे| शीघ्र ही आप के घरों में कुमारी माएं उपलब्ध होंगी| सोनिया के सत्ता में आने के बाद सन २००५ से तीन प्रदेशों केरल, गुजरात और राजस्थान में स्कूलों में यौन शिक्षा लागू हो गई है| शीघ्र ही अमेरिका की भांति इंडिया के स्कूलों में गर्भ निरोधक गोलियां बांटी जाएँगी| सोनिया अम्बानी आदि को लूटने के लिए एफडीआई लागू कर चुकी है|

वीर्य महिमा के समर्थन में मुझे वर्तमान में एक ही प्रमाण देना है| शेर से कई गुने भारी हाथी सदैव झुण्ड में चलते हैं| फिर भी अकेले शेर से परास्त होते हैं| क्योंकि हाथी कामी होता है और शेर जीवन में एक बार सम्भोग करता है| अतः वीर्यवान|

किसान ने सांड़ का खतना कर सांड़ को बैल यानी अपना दास बना लिया| मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर, किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| २६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर आप को अशक्त और पराजित कर रखा है| आप से आप की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया और आप जानते तक नहीं! मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). (पहले आजादी तो लीजिये|) माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर सदा सदा के लिए आप की धरती को छीन कर संयुक्त रूप से हत्यारे, लुटेरे और बलात्कारी दास मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा ईसाइयत और इस्लाम का परिरक्षण {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६}, संरक्षण {अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम निजी कानून व वक्फ} और प्रतिरक्षण {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षा, मदरसों, उर्दू शिक्षकों, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन और हज अनुदान} करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं|

जो उपलब्धि इस्लाम ई० स० ७१२ से ई० स० १८३५ तक अर्जित न कर सका, गुरुकुल मिटा कर उससे अधिक ईसाइयत ने मात्र ई० स० १८३५ से ई० स० १९०५ के बीच अर्जित कर लिया| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान} इंडिया ब्रिटेन के राष्ट्रकुल का सदस्य है| अतएव पहले आजादी तो लीजिये|

मानव जाति को वीर्यहीन कर पराजित व दास बनाने का षड्यंत्र तो मूसा ने खतना द्वारा लगभग ३२०० वर्षों पूर्व ही प्रारम्भ कर दिया था| मैकाले ने गुरुकुलों को मिटा कर उसे आगे बढ़ाया| यह संस्कृतियों का युद्ध है और इसे ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देकर नहीं लड़ा जा सकता| या तो ईसाइयत या इस्लाम रहेगा अथवा वैदिक सनातन संस्कृति| अतएव पहले भारतीय संविधान मिटायें|

उपरोक्त तथ्यों का उद्घाटन भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन सोनिया के रोमराज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| मैं उपरोक्त तथ्य प्रकाशित करने के कारण ४२ बार बंदी बना हूँ| ईश्वर की कृपा से आज तक मुझे सजा नहीं दी गई| ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया में मैंने ईसाइयत और इस्लाम का विरोध कर अपना जीवन बर्बाद कर लिया है| आप इस ८० वर्ष के बुड्ढे से कुछ सीखें| मैं सेवा निवृत लोकसेवक हूँ| मुझे जज के आदेश के बाद भी पेंसन नहीं मिलती| इसके अतिरिक्त लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति का स्वामी हूँ – लेकिन ऋषिकेश में भिक्षा के अन्न पर जीवित हूँ| आज मेरे पास खोने के लिए जीवन के अतिरिक्त कुछ नहीं है| उसे भी समाप्त करने के लिए मेरे अपने बेटे ही जुटे हुए हैं| मेंरे अतिरिक्त यह युद्ध कोई नहीं लड़ सकता|

अमेरिका आज भी है, लेकिन अमेरिकी लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई| इंडिया तो रहेगा लेकिन झा जी व उनकी वैदिक सनातन संस्कृति न रहेगी| इसका प्रबंध तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) बना कर कर दिया गया है| फिर भी आप लज्जित नहीं और न कुछ कर सकते हैं| फिर भी १९४७ से भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के एक भी विरोधी का किसी को आज तक ज्ञान नहीं है! जानते हैं क्यों? क्यों कि ईसाइयत और इस्लाम का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान या संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर अथवा साध्वी प्रज्ञा - सबके विरोध को दबा दिया गया| मैं मालेगांव का अभियुक्त भी हूँ|

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

यदि झा जी अपना व मानवजाति का अस्तित्व चाहते हों तो वैदिक सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार की सहायता करें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Grievance Regn No is: MINHA/E/2013/02423

 

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AyodhyaP Tripathi,
Dec 3, 2013, 4:08 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Dec 3, 2013, 4:09 PM
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