Muj13W50SB Azaan IslamiHmla


मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 50SB, Dec. 06- Dec. 12, 2013. This issue is Muj13W50SB Azaan IslamiHmla

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


Muj13W50SB Azaan IslamiHmla

बाबरी विध्वंस की वर्षी पर|

मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईमाम ५ समय, नियमित रूप से, पूरे विश्व में, प्रतिदिन निर्विरोध अन्धाधुन्ध इस्लामी आक्रमण करते हैं। ईमाम क्या प्रचारित करते हैं, को जानने के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

उपरोक्त लिंक के अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि इमाम प्रतिदिन विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी काफिरों के हत्या की, नारियों के बलात्कार की, लूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैं| राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी लोगों ने भय वश अपना जीवन, माल, नारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैं| आश्चर्य है कि ई०स० ६३२ से आज तक इस्लाम और मस्जिद का एक भी विरोधी सुरक्षित अथवा जीवित नहीं है| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या साध्वी प्रज्ञा अथवा मैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

इंडिया में ई०स० १८६० में भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३अ व २९५अ को लागू किया गया था| इन धाराओं के  अपराध में अभियोग चलाने का अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल को दिया गया है| फिर भी किसी राष्ट्रपति या राज्यपाल ने, कभी भी किसी ईमाम पर अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया|

हम लोग अलग मिटटी के बने हैं| इस लिए प्रताड़ित हो रहे हैं, कि हम अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| अज़ान नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| हम अज़ान का विरोध कर रहेमस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है, को नष्ट कर रहे हैं| आइये इस धर्म युद्ध में हमारा साथ दीजिए| अपने पर नहीं तो अपने दुधमुहों और अपनी नारियों पर तरस खाइए| (कुरान २३:६). हम जो भी कर रहे हैं, भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा में कर रहे हैं| जो भी हमारे विरोधी हैं, मानवता के शत्रु हैं|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के मस्जिद विध्वंसक लोग हैं| वस्तुतः हम ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है| (कुरान :३५). हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है| हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने और मानव जाति को दास बनाने के लिए संकलित किया गया है| इंडिया में मुसलमानों को इसलिए रोका गया है कि इन्होंने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| हमारा कथन है कि यदि आप अपनी, अपने देश अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ इस्लाम के पोषक भारतीय संविधान कोनिजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए|

वैदिक सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

ठीक इसके विपरीत इस्लाम ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, इस्लाम आज तक विफल नहीं हुआ| इस्लाम जिहाद की हठधर्मिता के बल पर संस्कृतियों को मिटा रहा है| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, :३९).

प्राचीन कालमें महाराज अश्वपतिने कहा था

न  मे  स्तेनो  जनपदे   न   कदर्यो  न  मद्यपः ।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

वैदिक सनातन संस्कृति की मान्यता है कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया| यदि आप का स्वास्थ्य गया तो आधा चला गया| लेकिन यदि आप का चरित्र गया तो सब कुछ चला गया| इसके विपरीत भारतीय संविधान से पोषित इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। इस्लाम, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है।

जी हाँ हम मस्जिद नहीं रहने देना चाहते क्यों कि यहाँ काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा की जाती है और मानव मात्र को ईश्वर से अलग कर दास बना दिया जाता है| काफ़िर को कत्ल करने अथवा वीर्यहीन हो कर दास बनने के लिए विवश करने के लिए शिक्षित किया जाता है|

लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ इंडिया के प्रत्येक नागरिक को प्राइवेट प्रतिरक्षा का कानूनी अधिकार देती है और प्राइवेट प्रतिरक्षा में किया गया कोई कार्य भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अनुसार अपराध नहीं है| फिर भी दंड का अधिकार राज्य के पास होता है| आर्यावर्त सरकार की स्थापना नागरिक के जान-माल के रक्षा के लिए की गई है| सोनिया का रोम राज्य न तो नागरिक को जीने का अधिकार देता है {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} और न सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)}. यदि नागरिक दासता की बेड़ियों से मुक्ति चाहें तो भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६ (ब)(।।) को निरस्त करने में आर्यावर्त सरकार की सहायता करें| नमो यह कार्य नहीं कर सकते|

अपने उपरोक्त कानूनों भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ का प्रयोग करते हुए हमने बाबरी ढांचा भी गिराया है और मस्जिदों में विस्फोट भी कराए हैं| हमने तो बाबरी ढांचा गिराने के स्वीकारोक्ति में न्यायालयों में ६ शपथपत्र दिए हैं| ऐसा करना देश के नागरिकों के हित में आवश्यक है| मैं मालेगांव मस्जिद बम कांड का अभियुक्त हूँ| मेरा पासपोर्ट जब्त है| सोनिया सरकार ने मेरी सारी सम्पत्ति लूट ली है और किसी भी क्षण मेरी हत्या हो सकती है|

मेरे ९ साथी २००८ से मस्जिद और इस्लाम विरोध के कारण जेलों में बंद हैं| मेरी मांग है की मेरे सहयोगियों को ससम्मान छोड़ने के लिए विश्व समुदाय व संयुक्त राष्ट्रसंघ सोनिया पर दबाव डाले| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

https://docs.google.com/viewer?a=v&pid=sites&srcid=YXJ5YXZydC5jb218bWFsZWdhb24tdHJpYWx8Z3g6NGNhMDAxMWRjNzZjNmQ3Zg

http://timesofindia.indiatimes.com/india/malegaon-accused-pandey-congratulated-pragya-singh/articleshow/4023514.cms

ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया में मैंने इस्लाम का विरोध कर अपना जीवन बर्बाद कर लिया है| मैं सेवा निवृत लोकसेवक हूँ| मुझे जज के आदेश के बाद भी पेंसन नहीं मिलती| इसके अतिरिक्त लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति का स्वामी हूँ – लेकिन ऋषिकेश में भिक्षा के अन्न पर जीवित हूँ| यह संस्कृतियों का युद्ध है| पिछले ३२६० से अधिक वर्षों से यह युद्ध कोई नहीं लड़ सका और मेरे अतिरिक्त यह युद्ध कोई लड़ भी नहीं सकता| यदि आप ससम्मान जीवित रहना चाहते हों तो स०रा०स० के सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा के अनुच्छेद १४ के अधीन मुझे राजनैतिक शरण दीजिये. मुझे इस्लाम मिटाना है|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Registration Number is : MINHA/E/2013/02435

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 

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AyodhyaP Tripathi,
Dec 4, 2013, 5:35 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Dec 4, 2013, 5:36 AM
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