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मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 49SB, Nov. 29- Dec. 05, 2013. This issue is Muj13W49SB savdhan mtdataonY

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


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देशके मतदाताओंसे

ईवीएम से निकला विजेता जनता का प्रतिनिधि नहीं होता| वैसे भी चुनाव से आप जान-माल की रक्षा का अधिकार नहीं पा सकते| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें,

http://www.aryavrt.com/Home/chunav-dhokha-hai

क्या आप लोग जानते हैं की इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है और आप लोग ईसा की भेंड़े? {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान}. सोनिया आप लोगों का मांस खाएगी और लहू पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). सोनिया अर्मागेद्दन लाने के लिए संस्कृतियों का युद्ध लड़ रही है|

http://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

ईस्ट इंडिया कम्पनी के जमाने में केवल संतानहीनों की सम्पत्ति राजवाह (escheat} होती थी| गाँधी के राम(रोम) राज्य में किसी के पास सम्पत्ति और उत्पादन के साधन यानी भूमि, कारखाने, खानें आदि रखने का संवैधानिक अधिकार नहीं है| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)}. अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर आप से लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही २०-६-१९७९ से मिटा दिया गया है| (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८) आप या तो मात्र अल्लाह की उपासना नहीं करते अथवा ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते अतएव आप को जीवित रहने का अधिकार तक नहीं है| आप मुसलमान (बाइबल, लूका १९:२७) हैं तो ईसाई आप की हत्या करेगा और यदि ईसाई हैं (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९) तो मुसलमान| नमो हों या हर्षवर्धन – सबको इसी मौत के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेनी ही पड़ेगी| शपथ लिए बिना कोई पद, प्रभुता और पेट का प्रबंध नहीं कर सकता| वोट देकर उपरोक्त संवैधानिक स्थितियों को कोई नहीं बदल सकता| यानी हर हाल में आपको मिटना है|

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर, किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| २६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर आप को अशक्त और पराजित कर रखा है| आप से आप की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया और आप जानते तक नहीं! मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर सदा सदा के लिए आप की धरती को छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा ईसाइयत और इस्लाम का परिरक्षण {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६}, संरक्षण {अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम निजी कानून व वक्फ} और प्रतिरक्षण {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षा, मदरसों, उर्दू शिक्षकों, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन और हज अनुदान} करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं|

अपने पद, प्रभुता और पेट के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान और कानूनों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेनी ही पड़ेगी| यानी राष्ट्रपति और राज्यपाल हर ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) व मुसलमान (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९) को अपनी ही हत्या का अधिकार देने व अपनी वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए विवश हैं| ईमाम, जिन मस्जिदों से आप के हत्या की शिक्षा देते हैं, वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की, काफिरों के नरसंहार की और काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं, उनको सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) पर राष्ट्रपति और राज्यपाल, वेतन दिलाते हैं| पुलिस संरक्षण देते हैं| काफिरों के कर के पैसे से मस्जिदों और हज भवनों का निर्माण कराते हैं| जो भी काफ़िर हत्या और ईशनिंदा के केंद्र मस्जिदों या ईमामों का विरोध करे – उसकी हत्या का निर्देश कुरान में (कुरआन ८:१७) है – जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वारा, जजों से, उत्पीडित कराया जा रहा है|

खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर महोदय यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक वेश्यावृत्ति को संरक्षण देना है|

सैतानों मूसा और मुहम्मद ने, किसान के सांड़ की भांति, यहूदियों व मुसलमानों को दास बनाने के लिए खतना को मजहब से जोड़ दिया है| यहूदी और मुसलमान गाजे बाजे के साथ खतना कराकर स्वेच्छा से अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैं और जीवन भर रोगी, अशक्त और दास बन कर जीते हैं| मरियम के अवैध बेटे ईशा को जेहोवा का एकलौता पुत्र मानने का कारण ही वैश्यावृति को संरक्षण देना है, ताकि सबको वीर्यहीन कर दास बनाया जा सके और जो ईसा का दास न बने उसे कत्ल किया जा सके|

एक ओर आप के वैदिक सनातन संस्कृति की वीर्यवान ब्रह्मचारी बना कर आप के ओज, तेज, स्मृति, परमानंद और आरोग्य प्रदान करने वाली वैदिक सनातन संस्कृति है और दूसरी ओर आप को अपराधी और दास बनाने वाली संस्कृति; आप किसे पसंद करेंगे?

यहूदी या मुसलमान किसको पसंद करेंगे?

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान :३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकता? ईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, सिद्धि, निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास बनाते हैं? ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उन के उपासना की स्वतंत्रता छीनते हैं?

एक ओर आर्यावर्त सरकार का राजतन्त्र है, जिसके राज्य में

न  मे  स्तेनो  जनपदे   न   कदर्यो  न  मद्यपः ।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

और दूसरी ओर सोनिया का समलैंगिक और सहजीवन के अधिकार देने वाला भ्रष्ट राज्य| निर्णय आप करें| किसे चुनेंगे आप? एक ओर ईवीएम द्वारा आप को दास बनाने हेतु सोनियातंत्र है और दूसरी ओर आर्यावर्त सरकार का आप को जान-माल और सम्मान देने वाला राजतंत्र| किसे पसंद करेंगे आप?

 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

 

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AyodhyaP Tripathi,
Nov 30, 2013, 7:02 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Nov 30, 2013, 7:03 PM
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