Muj13W47 nyayik aatank


मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE ISSUE 47, Nov 15-21, 2013. This issue is Muj13W47 nyayik aatank

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


Muj13W47 nyayik aatank

जज द्वारा यौन शोषण

सन्दर्भ: श्री मनीराम शर्मा जी द्वारा प्रेषित इमेल|

शर्मा जी को सादर प्रणाम!

ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया ने मेरा जीवन बर्बाद कर दिया| इस ८० वर्ष के बुड्ढे से कुछ सीखें| मैं लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति का स्वामी हूँ लेकिन परभक्षी संविधान के अनु० ३९(ग) ने मुझे भिखारी बना दिया है|

सोनिया को परेशानी यह है कि हम वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारा ईश्वर जारज(जार्ज) और प्रेत नहीं है| ईसाइयों का ईसा स्वयं जारज(जार्ज) है और उस ने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना दिया है| कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| सोनिया दास बनाने के लिए व्यभिचार को राज्यपालों जजों द्वारा संरक्षण दिला रही है| जारज(जार्ज) हमारे लिए अपमानजनक सम्बोधन हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों का शासक परिवार सम्मानित जारज(जार्ज) है| इतना ही नहीं ईसाइयों का मुक्तिदाता ईसा ही जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत है| हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जाती| इससे वीर्यहीनता के प्रसार और भेंड़ बनाने में सोनिया को कठिनाई हो रही है|

जज द्वारा एक कन्या के यौन शोषण से आप परेशान हैं| लेकिन मूसा और मुहम्मद ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं ईसा ने बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह की छूट दी है| अल्लाह ने मुहम्मद का निकाह मुहम्मद की पुत्रवधू जैनब (कुरान, ३३:३७-३८) से किया| अल्लाह ने ६ वर्ष की आयशा का निकाह ५२ वर्षीय मुहम्मद से कर दिया| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मुसलमानों और ईसाइयों को इस नारी बलात्कार और कौटुम्बिक व्यभिचार का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| धरती की किसी भी नारी का बलात्कार या तो ईसाई करेगा अथवा मुसलमान| जजों ने सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता दे दी है| जजों की कृपा से आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५()]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”] क्या आप विरोध कर सकते हैं? लव जिहाद के संरक्षक जज अपनी नारियां कैसे बचायेंगे?

विवरण नीचे की लिंक पर,

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar

न्यायपालिका के विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें,

http://www.aryavrt.com/Home/aatankvadi-bhrasta-judge

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| २६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर आप को अशक्त और पराजित कर रखा है| आप से आप की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया| मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर सदा सदा के लिए आप की धरती छीन कर संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं|

अपने पद, प्रभुता और पेट के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान और कानूनों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेनी ही पड़ेगी| यानी राष्ट्रपति और राज्यपाल हर ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) व मुसलमान (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९) को अपनी ही हत्या का अधिकार देने व अपनी वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए विवश हैं| ईमाम, जिन मस्जिदों से आप के हत्या की शिक्षा देते हैं, वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की, काफिरों के नरसंहार की और काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं, उनको सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) पर राष्ट्रपति और राज्यपाल, वेतन दिलाते हैं| पुलिस संरक्षण देते हैं| काफिरों के कर के पैसे से मस्जिदों और हज भवनों का निर्माण कराते हैं| जो भी काफ़िर हत्या और ईशनिंदा के केंद्र या ईमामों का विरोध करे उसकी हत्या का निर्देश कुरान में (कुरआन ८:१७) है जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

फिर भी आप लज्जित नहीं और न कुछ कर सकते हैं| फिर भी भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ अथवा भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का, १९४७ से आज तक, एक भी विरोधी का किसी को ज्ञान नहीं है! जानते हैं क्यों? क्यों कि ईसाइयत और इस्लाम का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान या संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर अथवा साध्वी प्रज्ञा - सबके विरोध दबगए|

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

तबके न्यायिक जांच और अल्लाह के (इल्हाम) संदेश ने आज ईशनिंदा और राज्य के विरुद्ध अपराध ने ले लिया है| १९५० से ही मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जाती| लेकिन आत्मरक्षार्थ भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति देकर, जजों से, उत्पीडित कराया जा रहा है| क्यों कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हत्यारी व लुटेरी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को अपनी - अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार दिया है| ईसाई और मुसलमान ईशनिंदा के अपराध में विरोध करने वालों को कत्ल कर रहे हैं और राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अपराध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देकर ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण दे रहे हैं| राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अनुमति देकर भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलवाए हैं| ५ आज भी लम्बित हैं|

जिस प्रकार इस्लाम की विरोधी आसमा बिन्त मरवान को वीभत्स विधि से मुहम्मद के अनुयायियों ने उसके ५ अबोध बच्चो सहित कत्ल किया था, उसी प्रकार कैंसरग्रस्त साध्वी प्रज्ञा को सोनिया के मातहतों ने जीवित ही मार डाला है| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है और कर्नल पुरोहित का पैर तोड़ डाला गया है| हमारे जगतगुरु के मुहं में गोमांस ठूसा गया| शिकायत करने के बाद भी बंधुआ जज कुछ न कर पाए| हमारे ९ अन्य ईसाइयत और इस्लाम विरोधियों को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम से बचाना चाहते हैं| साध्वी प्रज्ञा ईसाइयत और इस्लाम के विरोध के कारण ही जेल में हैं|

आज भी साध्वी प्रज्ञा की ललकार है, “सोनिया सत्ता में क्यों? काबा मूर्तिपूजकों की है। कुरआन लूट संहिता है। अज़ान ईशनिंदा है। अतएव शर्मा जी! अपनी खैर मनाइए| प्राकृतिक व मानवीय न्याय के लिए निज हित में साध्वी के सपनों को साकार करने, हमारे अभियोग वापस लेने में, अज़ान बंद कराने, मस्जिद पर प्रतिबंध लगाने, चर्च, मस्जिद, अज़ान और संविधान मिटाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता कीजिए|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Grievance Regn No is:PRSEC/E/2013/19237


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AyodhyaP Tripathi,
Nov 25, 2013, 7:03 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Nov 25, 2013, 7:04 AM
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