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मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 45, Nov 01-Nov 07, 2013. This issue is Muj13W45 Dhara196 CrPC

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


                       Muj13W45 Dhara196 CrPC

आप लोगों को मैं यह पत्र इस क्षमायाचना के साथ लिख रहा हूँ कि यद्यपि मैं विकास की मुंहताज, लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से दूषित अंग्रेजी, जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ| क्योंकि मानवमात्र की लिपि, भाषा व ज्ञान-विज्ञान उसके चक्रों व ब्रह्मकमल में परब्रह्म जन्म के साथ ही दे देता है| विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है| संस्कृत उसी लिपि में लिखी जाती है और गुरुकुलों में सिखाए जाने वाले विश्व के प्राचीनतम और एकमात्र ज्ञान-विज्ञान का कोष देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा का ऋग्वेद है|

मानवजाति को मिटाने के लिये निःशुल्क वीर्यरक्षा की शिक्षा देने वाले गुरुकुलों को मिटा कर महँगी वीर्यहीन कर दासबनाने व यौनशिक्षा देने वाली मैकाले की प्रणाली लागू की गई है| ताकि मानवमात्र को दास बनाये रखा जाये|

शेर से कई गुने भारी हाथी सदैव झुण्ड में चलते हैं| फिर भी अकेले शेर से परास्त होते हैं| क्योंकि हाथी कामी होता है और शेर जीवन में एक बार सम्भोग करता है| अतः वीर्यवान| परशुराम की कोई सेना नहीं थी| परशुराम ने २१ बार क्षत्रियों का संहार किया था| वीर्यवान हनुमान ने अकेले परम प्रतापी रावण के लंका को जला दिया था| वीर्यवान बनने के लिये गुरुकुलों को पुनर्जीवित करें|

मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जाति हिंसक शिक्षायें, जो भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है – यदि मुसलमान ईसाई करे तो अपराध नहीं मानी जातीं| लेकिन आत्मरक्षा में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १०२ १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करने वाले व्यक्ति पर अभियोग चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देने के लिए इंडियन उपनिवेश के राष्ट्रपति (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६०) और राज्यपाल (भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९) दोनों ही, शपथ लेने के कारण, विवश हैं| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति, राज्यपाल और जिलाधीश के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज पुलिस भी नहीं-मस्जिद से अज़ान का प्रसारण करने वाले और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले किसी इमाम या मस्जिद का विरोध नहीं कर सकता न ईमाम के विरुद्ध अभियोग ही चला या चलवा सकता|

क्यों कि मुसलमान, ईसाई, राष्ट्रपति और राज्यपाल सहित, प्रत्येक नागरिक ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया का दास है {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान} और किसान के पशु की भांति दास के पास नागरिक अधिकार नहीं होते|

दया के पात्र निर्लज्ज शासकों सहित लोकसेवकों ने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ ३९(). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान :१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:). इसके बदले में सोनिया का ईसा लोकसेवकों को बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस :३६) से विवाह का व अल्लाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार दे चुका है| जहां भारतीय संविधान ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीँ लोकसेवकों को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है| जिन मस्जिदों से लोकसेवकों के इष्टदेवों की ईशनिंदा की जाती व उन को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, उनका पिछले १४३५ वर्षों से एक भी विरोधी नहीं जीवित न बचा? विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

लोकसेवकों के पास कोई विकल्प भी नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें और जब आवश्यकता हो सोनिया के इच्छानुसार जेल जाएँ| लोकसेवकों के अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही लोकसेवक ही नहीं, सारी मानव जाति ईसा की भेंड़ हैं||

यह कैसा लोकतंत्र चुनाव है, जिसमे बार बाला सोनिया द्वारा मनोनीत राज्यपाल प्रदेश की जनता द्वारा चुने हुए सरकार को मिनटों में हटा देने के लिए विवश  है? चुनाव द्वारा मतदाता भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() ३९() में कोई परिवर्तन नहीं कर सकते| ज्ञातव्य है कि अनुच्छेद २९() किसी को जीने का अधिकार नहीं देता और ३९() किसी नागरिक को सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार नहीं देता| लेकिन जो भी भारतीय संविधान, मस्जिद, चर्च, कुरान और बाइबल का विरोध करेगा – सोनिया द्वारा मिटा दिया जायेगा|

सोनिया ने अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारियों को २००८ से जेल में बंद कर रखा है| क्यों कि हम रोम राज्य, चर्च, अज़ान, नमाज, मस्जिद, ईसाइयत  और  इस्लाम को मिटाना चाहते हैं| कांची कामकोटि के जगतगुरु जयेन्द्र के दीपावली की रात जेल जाने के बाद संतों की औकात सोनिया को पता चल गई है और नारायण दत्त तिवारी द्वारा रक्त का नमूना देने के बाद लोकसेवकों की भी| वेश्यावृति के रक्षकों का किसी लोकसेवक ने विरोध नहीं किया| यह संत ही हैं, जो बताते हैं कि ईसा और मुहम्मद महान संत थे, जघन्य आतताई नहीं| सभी मजहब ईश्वर तक पहुंचने के अलग अलग मार्ग हैं| वीर्यहीन कर दास और अधीन नहीं करते! विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

दंड प्रक्रिया संहिता की धाराएं १९६ व १९७ सिद्ध करती हैं कि जज सोनिया की कठपुतलियाँ हैं| जजों के पास भारतीय संविधान व कानूनों के उल्लंघन का अधिकार नहीं है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अनुसार मानव मात्र ईसा अथवा अल्लाह का अपराधी है| मुसलमान की हत्या ईसाई करेगा और ईसाई की हत्या मुसलमान| लेकिन दोनों का पहला लक्ष्य वैदिक सनातन संस्कृति है| जब मिट जायेगी, तब मुसलमानों की बारी आएगी|

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँहमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है| हमारा विनाश, यदि आएगा, तो वह दूसरे प्रकार से आएगा| वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही| ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है|

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो, तुम पराजित नहीं हो सकते और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है|  ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया, जो भारत है, का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| लोकसेवक अपनी ही सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किये गए हैं| पराधीन लोकसेवक बेबस हैं|

अपनी खैर मनाएं लोकसेवक

वैदिक सनातन संस्कृति किसी भी अन्य मजहब के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

जिन्हें परभक्षी, लुटेरी और बलात्कारी संस्कृतियों से अपनी मुक्ति चाहिए, परभक्षी और खूनी भारतीय संविधान को निरस्त करने में हमारी गुप्त सहायता करें| अन्यथा मानवजाति डायनासोर की भांति मिट जायेगी|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Registration Number is: MINHA/E/2013/02230 य 

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AyodhyaP Tripathi,
Nov 3, 2013, 8:25 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Nov 3, 2013, 8:23 AM
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