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बलात्कारी संत २?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हर यहूदी, ईसाई व मुसलमान को अपनी-अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया है| उनके कुरान और बाइबल के उद्धरण नीचे पढ़ें:-

http://rozkiroti.blogspot.in/2011_07_22_archive.html

(बाइबल, लूका २४:४४) के साथ पठित|

Isa 13:16 उनके (गैर ईसाइयों के) बाल-बच्चे उनके साम्हने पटक दिए जाएंगे और उनके घर लूटे जाएंगे, और उनकी स्त्रियां भ्रष्ट की जाएंगी।(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१४) भी देखें|

"अपनी पत्नियों के साथ (और) जो औरतें तुम्हारे कब्जे में हों; उनके साथ सहवास करने में कोई निंदनीय काम नहीं है" कुरान, सूरा -मआरिज ७०:३० व २३:६

यानी हर ईसाई व मुसलमान के पास धरती के किसी नारी का बलात्कार करने का संवैधानिक अधिकार है| लेकिन ईसाइयों' व मुसलमानों का विरोधी तो कोई नहीं! लेकिन जिसका अपराध अभी सिद्ध नहीं है, उस आशाराम बापू के पीछे लोकसेवक, एनजीओ, जज, मीडिया और यहाँ तक कि सारा हिंदू समाज हाथ धो कर पड़ा है| इतना ही नहीं! इस सत्य को उजागर करने से साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ता है| ऐसा कहने या लिखने वाले पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देकर राष्ट्रपति और राज्यपाल अभियोग चलवाने के लिये विवश हैं|

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँहमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है| हमारा विनाश, यदि आएगा, तो वह दूसरे प्रकार से आएगा| वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही| ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है|

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन पूर्व संस्तुति की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति और राज्यपाल के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं- इन बलात्कारियों के विरुद्ध अभियोग ही नहीं चला सकता| राष्ट्रपति और राज्यपाल को इन कुकर्मियों के बलात्कार के संरक्षणपोषण व संवर्धन की क्रमशः भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेनी पड़ती है|

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है – शत्रु की रणनीति जानो, तुम पराजित नहीं हो सकते  और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है|  ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया, जो भारत है, का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| लोकसेवक अपनी ही सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किये गए हैं| पराधीन लोकसेवक बेबस हैं|

वैदिक सनातन धर्म यानी सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित दुश्मनी के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सिपाही बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है|" वैदिक सनातन संस्कृति के पीछे पड़ने का यही कारण है|

खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो लिखते हैं कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (अधीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने, किसान के सांड की भांति, यहूदियों व मुसलमानों को दास बनाने के लिए खतना को मजहब से जोड़ दिया है| यहूदी और मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैं और जीवन भर रोगी, अशक्त और दास बन कर जीते हैं|

पूरा विवरण देखें:-

http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

संसार की सभी लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है| कम्प्यूटर विशेषज्ञ स्वीकार करते हैं कि संस्कृत ही आदर्श भाषा है| वीर्यरक्षा की शिक्षा मात्र गुरुकुलों में सम्भव है| वह भी निःशुल्क|

पूरा विवरण देखें:-

http://www.aryavrt.com/veerya-1

एक बार बाला सोनिया ने पूरे मानव जाति को वीर्यहीन कर सबके प्राणों को संकट में डाल कर अपने अधीन कर रखा है| किसी के पास साहस नहीं कि सोनिया का विरोध कर सके!

अपनी खैर मनाओ संतों के विरोधियों|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Your Request/Grievance Registration Number is : PRSEC/E/2013/14584

http://helpline.rb.nic.in/

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AyodhyaP Tripathi,
Sep 7, 2013, 6:46 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 7, 2013, 6:47 PM
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