Muj13W35 Pension RBhawan

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प्रेषक;

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी पुत्र स्व० बेनी माधव त्रिपाठी,

मंगल आश्रम, टिहरी मोड़, मुनि की रेती, ऋषिकेश, टिहरी गढ़वाल २४९१३७ उख

फोन; ९१५२५७९०४१

दिनांक; गुरुवार, १५ अगस्त २०१३य

विषय: सूचना प्राप्ति के लिए अपील की सुनवाई दिनांक १३ अगस्त, २०१३.

प्रतिष्ठा में,

माननीय मुख्यमंत्री श्री विजय बहुगुणा जी,

देहरादून, उत्तराखण्ड|

विषय; पेंशन व देयक अवशेषों के भुगतान हेतु आरटीआई के अधीन सूचना का अनुरोध|

सन्दर्भ: अधिशासी अभियंता, सिचाई खंड, चमोली, का पत्र क्रमांक १२५४/सिखच/कोर्टकेस/ दिनांक: १७-०५-२०१३ तदुपरांत लोक सूचना अधिकारी, पी०एम०गी०एस०वाई०, सिचाई खंड, श्रीनगर, गढ़वाल पत्रांक १२६३/ पी०एम०गी०एस०वाई०सि०ख०/ सू०अधि०/ का पत्र दिनांक २२/०६/२०१३. तदुपरांत अधिशासी अभियंता, सिचाई खंड, श्रीनगर गढ़वाल पत्रांक १५२४/सि०ख०श्री/पेंशन/ दिनांक जुलाई १६, २०१३. अंततः सम्पन्न हुई सुनवाई दिनांक १३-०८-१३.

मान्यवर महोदय,

सुनवाई के लिए मैं आप के सिचाई विभाग का आभारी हूँ|

उपरोक्त प्रकरण के सन्दर्भ में आज मुझे सूचना मिल चुकी है कि मेरा स्थानान्तरण ३१ जुलाई, १९८४ को, फैजाबाद नलकूप मंडल में कर दिया गया है| मैं स्थानान्तरण पत्रों की छाया प्रति दिए जाने के लिए भी आप के सिचाई विभाग का आभारी हूँ|

अपने स्थानान्तरण का मुझे उस समय ही ज्ञान था| लेकिन मेरी सेवा पुस्तिका (आज गायब) विष्णु प्रयाग निर्माण प्रखंड ३ में नहीं थी (संलग्नक १) और न मेरे वेतन प्रकरण का निस्तारण ही किया गया था| अतएव मैने अपने सहायक अभियंता प्रथम को पत्र दिया था कि बिना सेवा पुस्तिका में सत्यापन और वेतन विवाद का निस्तारण किये मुझे कार्य मुक्त न किया जाये| इसके लिए मैंने तहसील कार्यालय में धरना भी दिया था| इस कार्य के लिए मैं बनारस चला भी गया था| (संलग्नक २) मेरी अनुपस्थिति में मेरा स्थानान्तरण इसलिए किया गया कि कर्मचारियों को कार्य न करना पड़े|

आप के सिचाई विभाग ने मुझे यह सूचना नहीं दी कि मेरी अनुपस्थिति में बिना सेवा पुस्तिका के और बिना मेरे पत्र दिनांक २८-०७-१९८४ में उल्लिखित विवादों का निस्तारण किये मुझे कार्य मुक्त किये जाने के कारण संलग्नक ४ व ५ के अधीन आप को मुझे पेंशन देनी पडेगी| २९ वर्षों से विलम्ब के अनुमानित कारण, निम्नलिखित लगते हैं:-

वस्तुतः जब सरकारी नौकरी दी जाती है, तो लोकसेवक कार्य करेगा या नहीं, यह नहीं पूछा जाता, बल्कि योग्यता पूछी जाती है| अतएव वेतन तो लोक सेवक को योग्यता अर्जित करने के लिए मिलती है| कार्य करने के लिए कर्मचारी को अलग से (सोनिया या उसके मातहतों को देने के लिए) सुविधा शुल्क देना आवश्यक है| मेरे साथ समस्या सेवा प्रारम्भ करने से आज तक यही है कि मैं कभी भी सुविधा शुल्क न दे पाया| अतएव नौकरी भी नहीं कर पाया| बिना पेंशन व शेष भुगतान के मेरे २९ वर्ष गुजर गए| वस्तुतः, भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधीन लोकसेवक की नियुक्ति ही नागरिकों को लूटने के लिए की जाती है और इसके लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेकर लोकसेवक को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण देने के लिए बाध्य हैं|

आज स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश मुझे पेंशन इसलिए नहीं देगी कि मैंने १९८४ के स्थानान्तरण के बाद विभाग में सेवा की ही नहीं| मेरी अंतिम सेवा उत्तराखंड में रही| इस आशय का पत्र प्रमुख अभियंता उत्तर प्रदेश ने प्रमुख अभियंता उत्तराखंड को लिख भी दिया है| (संलग्नक ३). चूंकि ट्रिब्यूनल ने मेरे पक्ष में निर्णय दिया है, अतएव यदि मुझे पेंशन मिलेगी तो उत्तराखंड से ही मिलेगी| क्यों कि मेरी अंतिम सेवा उत्तराखंड की है|

http://www.aryavrt.com/pension-sat-appeal

माननीय मुख्यमंत्री जी, मुझे आप से कोई शिकायत नहीं है| यह मेरे पूर्वजों के कर्मों का फल है, जो मुझे भुगतना पड़ रहा है| जब से लुटेरे और मौत के फंदे भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ३९(ग) व २९(१) का संकलन किया गया, तब से आज तक सबने, यहाँ तक कि आप ने भी, इसी भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली, लेकिन किसी ने भी विरोध नहीं किया| कोई कर भी नही सकता| हमने विरोध किया और २००८ से आज तक हमारे साथी बिना किसी अभियोग के जेलों में बंद हैं| पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी रंडी उज्जवला के लिए दूध की मक्खी हो गए| केंद्र में सोनिया है और आप की छाती पर अजीज| मात्र हम ही वैदिक सनातन संस्कृति को बचा सकते हैं| बकाया राशियां देकर मेरी सहायता करें| अर्जी मेरी मर्जी आप की!

प्रार्थी

 

(अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी) फोन ९१५२५७९०४१

दिनांक: दिनांक; गुरुवार, १५ अगस्त २०१३य

 

संलग्न: १ से ५ तक|

मुख्यमंत्री महोदय,

संलग्नकों के लिए आप को मेरी वेबसाइट http://www.aryavrt.com/pension-sat-appeal देखनी पड़ेगी|

जो भी पन्थनिरपेक्ष है और जिसने भी भारतीय संविधान की शपथ ली है-आत्मघाती और अपराधी है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() से प्राप्त अधिकार से अपने मजहब का पालन करते हुए उसकी हत्या या तो ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) करेगा अथवा मुसलमान (कुरान :१९१).

भारतीय संविधान मानव जाति का शत्रु है| आज कल भ्रष्टाचार मिटाने और विदेशों में जमा धन वापस लाने की अन्ना योगगुरू की मुहिम जारी है| पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी भ्रष्टाचार करने वालों को नंगा कर रहे हैं| इन लोगों में एक समानता है| यह लोग भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९() का विरोध नहीं करते| तो भ्रष्टाचार के संरक्षक दंप्रसं की धारा १९७ का विरोध करते हैं|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के विरोध न करने के कारण एक विशेष स्थिति बनी है| जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) हर लोकसेवक को जनता को लूटने के लिए विवश करता है, वहीँ सोनिया को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ एकाधिकार प्रदान करती है कि वह जिसे चाहे अपराधी माने और जिसे न चाहे अपराधी न माने|

भ्रष्टाचार भारतीय संविधान से प्रायोजित है| विकल्पहीन लोकसेवकों की नियुक्ति ही लूटने के लिए की जाती है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ|  जहां भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के मौलिक अधिकार को सांसदों और जजों ने मिलकर नागरिकों से लूट लिया और अनुच्छेद ३९() व्यक्ति को सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं देता, वहीं दंप्रसं की धारा १९७ ने सत्ता का केन्द्रीयकरण सोनिया के हाथों में कर दिया है| सोनिया के मनोनीत लुटेरों के विरुद्ध कहीं सुनवाई नहीं हो सकती| यह कहना गलत है कि कानून सबके लिए एक समान है अथवा कानून अपना कार्य करता है| सोनिया द्वारा दंप्रसं की धारा १९७ भयादोहन के लिए उपयोग में लाई जा रही है| लोकसेवक, पुलिस, नागरिक जज सभी दंप्रसं की धारा १९७ से पीड़ित हैं| आज अपराधी वह है जिसे सोनिया अपराधी माने| यही कारण है कि जहां येदियुरप्पा और मधु कोड़ा जेल गए, वहीं किसानों, लोकसेवकों और यहाँ तक कि रामप्रसाद बिस्मिल जैसे उन हुतात्माओं तक की जमीनें लूटने, जिसके बलिदान के कारण वे मुख्य मंत्री राज्यपाल बने, वाले मुख्य मंत्री मुलायम मायावती जेल नहीं भेजे जा रहे हैं| चुनाव द्वारा भी जनता सोनिया की लूट से मुक्ति नहीं पा सकती| जहाँ बेटी से विवाह कराने वाला सोनिया का ईसा सम्माननीय है, वहीँ बेचारे नारायण दत्त तिवारी को उज्जवला के कारण अपमानित होना पड़ा|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी भारतीय संविधान को रद्द करेंगे|


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AyodhyaP Tripathi,
Sep 6, 2013, 2:44 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 6, 2013, 2:45 AM
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